*महाराष्ट्र में मरीजों को बड़ी राहत:अस्पताल अब अपनी फार्मेसी से दवा खरीदने के लिए नहीं कर सकेंगे मजबूर,FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे का सख्त आदेश*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*महाराष्ट्र में मरीजों को बड़ी राहत:अस्पताल अब अपनी फार्मेसी से दवा खरीदने के लिए नहीं कर सकेंगे मजबूर,FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे का सख्त आदेश*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई 


(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई)महाराष्ट्र के मरीजों के लिए एक ऐतिहासिक और राहत भरा फैसला सामने आया है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने राज्य के सभी अस्पतालों,नर्सिंग होम और क्लीनिकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे मरीजों को अपनी अंदरूनी या संलग्न फार्मेसी से ही दवा खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। 



यह आदेश 12 जून 2026 को जारी किया गया है और इसका उद्देश्य अस्पतालों की एकाधिकारशाही को तोड़ना तथा मरीजों को उनकी पसंद की दवा खरीदने की आजादी देना है । दवाईयां मरीज का अधिकार है पर अस्पताल की मजबूरी नहीं । तुकाराम मुंढे ने स्पष्ट किया कि किसी भी मरीज को कानूनी तौर पर किसी विशेष दुकान से दवा खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता । 



अब डॉक्टरों के लिए यह बाध्यकारी होगा कि वे लिखित प्रिस्क्रिप्शन सीधे मरीज या उनके परिजनों को सौंपें न कि उसे सीधे किसी विशेष मेडिकल स्टोर पर भेजें। यह कदम उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम,2019 के तहत मरीजों के अधिकारों की रक्षा के लिए उठाया गया है क्योंकि दवा खरीदने के विकल्प को सीमित करना अनुचित व्यापार प्रथा मानी जाती है। सूचना फलक अनिवार्य और सख्त कार्रवाई के इशारे के मुताबिक आदेश के अनुसार सभी अस्पतालों को अपने परिसर में मराठी और अंग्रेजी में स्पष्ट सूचना फलक लगाना होगा। जिसमें लिखा होगा कि मरीजों को अस्पताल की फार्मेसी से दवा खरीदने की कोई बाध्यता नहीं है और वे किसी भी लाइसेंस प्राप्त दवा विक्रेता से दवा खरीद सकते हैं। मुंढे ने चेतावनी दी है कि इस आदेश का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों,डॉक्टरों या औषधि विक्रेताओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 



अभ्यास में आने वाली चुनौतियाँ के हिसाब से हालांकि इस आदेश का स्वागत किया जा रहा है लेकिन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और फार्मासिस्टों ने कुछ व्यावहारिक चुनौतियों की ओर भी इशारा किया है। अक्सर डॉक्टर किसी विशेष कंपनी की ब्रांडेड दवा लिखते हैं। जो बाहरी दुकानों पर आसानी से उपलब्ध नहीं होती । मरीजों को कई दुकानों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। खासकर आपात स्थितियों में। जेनेरिक दवाओं के विकल्प मौजूद होने के बावजूद मरीज अक्सर डॉक्टर द्वारा सुझाए गए ब्रांड पर ही भरोसा करते हैं। जिससे यह विकल्प व्यावहारिक रूप से कठिन हो जाता है । FDA की सक्रिय कार्रवाई और नागपुर में छापेमारी के मद्देनजर इस आदेश के बाद FDA ने कार्रवाई भी शुरू कर दी है। नागपुर के"न्यू एरा अस्पताल"में हाल ही में हुई छापेमारी में बिना परवाने के 20 लाख रुपये से अधिक का दवा का जत्था जप्त किया गया । 



तपासणी में यह भी पाया गया कि अस्पताल प्रिस्क्रिप्शन मरीजों को न देकर सीधे अपनी फार्मेसी को भेज रहा था। जिससे मरीजों को बाहर से दवा खरीदने का अधिकार ही नहीं मिल पा रहा था। यह कार्रवाई दर्शाती है कि FDA अपने आदेश को सख्ती से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। तुकाराम मुंढे का यह फैसला महाराष्ट्र के आम नागरिकों के लिए एक बड़ी राहत है। खासकर उन लोगों के लिए जो अस्पतालों की मनमानी कीमतों और एकाधिकार का शिकार होते थे हालांकि व्यावहारिक कठिनाइयाँ बनी हुई हैं लेकिन यह आदेश मरीजों के अधिकारों की दिशा में एक मजबूत कदम है। FDA ने नागरिकों से आग्रह किया है कि अगर कोई अस्पताल या डॉक्टर प्रिस्क्रिप्शन देने से मना करता है या किसी विशेष दुकान से दवा खरीदने का दबाव बनाता है तो वे संबंधित विभागीय कार्यालय या FDA में शिकायत दर्ज कराएं ।(Photos Courtesy Social media and AI)

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