*कोलकाता के हुगली के किनारे बसा अंग्रेजी साम्राज्य: सन1690 में जब कोलकाता बना एशिया का व्यापारिक दिल*/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*कोलकाता के हुगली के किनारे बसा अंग्रेजी साम्राज्य: सन1690 में जब कोलकाता बना एशिया का व्यापारिक दिल*/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई
(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई) कोलकाता को ऐतिहासिक संदर्भ में देखें तो 24 अगस्त 1690 को जॉब चार्नक ने ईस्ट इंडिया कंपनी के तहत बंगाल मुख्यालय की स्थापना के लिए हुगली नदी के किनारे सुतानुति नामक गाँव में कदम रखा था। यह स्थान तीन ओर से जंगल से घिरा होने के कारण शत्रु आक्रमण से सुरक्षित माना गया था। चार्नक ने सुतानुति,कालीकाता और गोबिंदपुर तीन गाँवों को चुना था । जो बाद में मिलकर कलकत्ता शहर बने थे। यह केवल एक घाट नहीं था। सन 1698 में अंग्रेजों ने इन तीनों गाँवों की ज़मींदारी (राजस्व वसूली का अधिकार) खरीद ली थी। सन 1696 में ही उन्होंने फोर्ट विलियम नामक किलेबंदी का निर्माण शुरू कर दिया था। सन 1717 में मुगल बादशाह फर्रुख-सिय्यर ने कंपनी को 3,000 रुपये वार्षिक कर के बदले व्यापार की छूट दी थी। जिससे कलकत्ता का विकास तेज़ी से बढ़ा था। यह बंदरगाह एशिया के सबसे व्यस्त बंदरगाहों में शुमार हुआ। यहाँ से बंगाली रेशम,सूती वस्त्र,नील, चाय,नमकीन,अदरक और जूट यूरोप भेजे गए थे। 17वीं शताब्दी में ही कलकत्ता से मैसाचुसेट्स तक व्यापारिक संबंध स्थापित हो गए थे। जहाँ अमेरिका से लकड़ी, शराब और बर्फ आती थी। सन1870 में आधुनिक बंदरगाह का औपचारिक उद्घाटन हुआ और यह ब्रिटिश भारत का प्रमुख बंदरगाह बन गया था। दिलचस्प बात यह है कि साल 2003 में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने फैसला दिया कि जॉब चार्नक को शहर का''संस्थापक'' नहीं कहा जा सकता क्योंकि ये गाँव उनके आगमन से पहले से बसे हुए थे और सबर्ण राय चौधरी परिवार की ज़मींदारी में थे फिर भी कलकत्ता की आधुनिक कहानी 24 अगस्त 1690 को ही शुरू होती है। अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत के पश्चिमी,पूर्वी और दक्षिणी तटों पर एक व्यापारिक त्रिकोण बनाया था। जिसके तहत मद्रास (चेन्नई) और बॉम्बे (मुंबई) के बंदरगाह,कोलकाता के साथ मिलकर कंपनी के तीन मुख्य स्तंभ थे । इनके अलावा प्रमुख बंदरगाहों पर एक नज़र डाले तो
~पश्चिमी तट (अरब सागर)यहाँ से मसालों और कपड़े का व्यापार होता था।
~सूरत (Surat) में गुजरात में यह कंपनी का पहला बड़ा व्यापारिक केंद्र था। सन 1600 के दशक की शुरुआत में यहाँ कारखाना (फैक्ट्री) स्थापित किया गया था हालाँकि बाद में बॉम्बे के उभार के साथ इसका महत्व कम हो गया था।
~बॉम्बे (Bombay/मुंबई) में सन1668 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपना मुख्यालय सूरत से यहाँ स्थानांतरित किया था ।जो पश्चिमी तट पर उनका सबसे शक्तिशाली केंद्र बन गया था।
~दक्षिण-पूर्वी तट (कोरोमंडल तट) यह क्षेत्र कपड़ा और रंग-रोगन के सामान के लिए जाना जाता था।
~मद्रास (Madras/चेन्नई) यहाँ फोर्ट सेंट जॉर्ज बनाया गया, जो दक्षिण भारत में कंपनी का मुख्य गढ़ बना था ।
~मसुलीपट्टनम (Masulipatnam) आंध्र प्रदेश में एक प्रारंभिक व्यापारिक चौकीथी। जो कोरोमंडल तट पर महत्वपूर्ण थी ।
~पश्चिमी तट (मालाबार तट)यह मसालों के व्यापार के लिए प्रसिद्ध था।
~कोचीन (Cochin/कोच्चि) में यह मसालों (काली मिर्च,इलायची) के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण बंदरगाह था। डचों के बाद अंग्रेजों ने इस पर नियंत्रण कर लिया था।
~कालीकट (Calicut/कोझीकोड),कन्नानोर (Cannanore/कन्नूर) और टेलिचेरी (Tellicherry/थलास्सेरी) ये केरल तट पर अन्य प्रमुख व्यापारिक केंद्र थे ।
~अंजेंगो (Anjengo/अंचुथेंगु) केरल में एक और किलाबंद व्यापारिक चौकी थी । इसके अलावा बालासोर (Balasore) उड़ीसा में एक आश्रय स्थल था। जबकि करीमनगर (Coringa) और कोकनाडा (Cocanada/काकीनाडा) आंध्र प्रदेश में अन्य छोटे बंदरगाह थे । अंग्रेजी हुकूमत के उन प्रमुख बंदरगाहों की एक तथ्यात्मक तुलनात्मक सारणी जाने तो जिन्होंने भारत के व्यापारिक नक्शे को आकार दिया था। यह कोलकाता के अलावा अन्य केंद्रों की भूमिका स्पष्ट करेगी। अंग्रेजी बंदरगाहों की तुलनात्मक झलक के हिसाब से बंदरगाह (Port) स्थापना/अधिग्रहण वर्ष मुख्य व्यापारिक वस्तुएँ विशेष ऐतिहासिक महत्व जाने तो
~सूरत (Surat) 1608 (पहली फैक्ट्री) कपड़ा,नील, मसाले,सोना-चाँदी। भारत में कंपनी का प्रथम व्यापारिक मुख्यालय। 1687 तक पश्चिमी तट का सबसे बड़ा केंद्र।
~बॉम्बे (Mumbai) सन1668 (ईस्ट इंडिया कंपनी को हस्तांतरित) कपास,अफीम,दालचीनी,लौंग। पश्चिमी कमान मुख्यालय। अरब एवं अफ्रीका व्यापार का गेटवे। यहाँ से हज यात्री भी जाते थे।
~मद्रास (Chennai) सन1639 (फोर्ट सेंट जॉर्ज निर्माण) मलमल,पेंटिंग्स,इंडिगो,हाथीदाँत । दक्षिण-पूर्वी कमान मुख्यालय। कंपनी की सेना व प्रशासनिक शिक्षा का केंद्र।
~कोचीन (Kochi) सन 1663 में डचों से छीना था। सन1795 में अंग्रेज़ों के कब्जे में कालीमिर्च,अदरक, इलायची,नारियल तेल। मालाबार तट पर मसालों का सबसे बड़ा निर्यातक। चीन-यूरोप मार्ग पर मिडवे स्टेशन।
~मसुलीपट्टनम (Machilipatnam) सन 1611 (फैक्ट्री) कालीन,रंग-रोगन,सूती वस्त्र। कोरोमंडल तट का सबसे पुराना अंग्रेजी बंदरगाह। यहाँ से व्यापारी जहाज़ दक्षिण-पूर्व एशिया जाते थे।
~बालासोर (Balasore) सन 1633 चावल,रेशम, शहद, मोम। बंगाल की खाड़ी में प्रारंभिक चौकी। यहाँ से बर्मा (म्यांमार) तक जलमार्ग था।
~कालीकट (Kozhikode) सन1615 (फैक्ट्री) कालीमिर्च,दारचीनी,छाल। वास्को द गामा की पुरानी बस्ती। बाद में अंग्रेज़ों ने इसे डच व पुर्तगालियों से छीनकर किलाबंद किया।
~टेलिचेरी (Thalassery) सन1683 इलायची,लौंग, कपूर। केरल में तीसरा सबसे बड़ा बंदरगाह। यहाँ से मालदीव व अरब देशों को निर्यात।
~अंजेंगो (Anjengo) सन 1694 (किला निर्माण) कालीमिर्च,नारियल रस्सियाँ,इमारती लकड़ी। त्रावणकोर राज्य से लड़ाई में रणनीतिक चौकी। यूरोपीय जहाजों के लिए पानी और रसद का ठिकाना। अंग्रेजी हुकूमत कीव्यापारिक नीति का बड़ा चित्र देखें तो अंग्रेजों ने त्रिध्रुवीय नीति अपनाई थी।
~बॉम्बे → पश्चिम (यूरोप, अफ्रीका, मध्य-पूर्व) से जुड़ाव
~मद्रास → दक्षिण-पूर्व एशिया (मलक्का, जावा, चीन) से जुड़ाव
~ कोलकाता → पूर्वोत्तर (चीन, जापान, यूरोप) से चाय, रेशम, अफीम का निर्यात। इन तीनों के बीच हुगली, मसुलीपट्टनम,कोचीन और सूरत फीडर पोर्ट (खाद्य व कच्चा माल भरने वाले ठिकाने) थे। जो मुख्य बंदरगाहों को सामान पहुँचाते थे। यहां पाठ-आधारित (Text-based) व्यापारिक नक्शा दिया गया है। जिसमें 17वीं–18वीं शताब्दी के अंग्रेज़ी बंदरगाह,समुद्री मार्ग और उनके वैश्विक जुड़ाव को सरल रेखाचित्र (ASCII) के रूप में समझाया गया है। ध्यान दें कि यह एक संरचनात्मक प्रतिनिधित्व है। भौगोलिक सटीकता के लिए मानचित्र नहीं परंतु व्यापारिक तर्क को स्पष्ट करता है। भारत के मुख्य अंग्रेज़ी बंदरगाह और व्यापारिक मार्ग
(सन् 1690–1800)
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यूरोप (लंदन, लिवरपूल)
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(कीप ऑफ गुड होप)
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(अफ्रीका का पूर्वी तट) --------------------
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अरब सागर |
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बॉम्बे ------------- | ---------- सूरत |
(पश्चिमी मुख्य) | |
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(मालाबार तट) | |
कोचीन --------| |
कालीकट | |
टेलिचेरी | |
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|------ बंगाल की खाड़ी ----|
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मद्रास (दक्षिण-पूर्वी) |
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मसुलीपट्टनम |
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बालासोर |
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कोलकाता (पूर्वी मुख्य) ------|
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(मलक्का जलडमरूमध्य)
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चीन (ग्वांगझू), जावा, जापान
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-मार्गों की दिशाएँ और व्यापारिक वस्तुओं के मद्देनजर
मार्ग (दिशा) जुड़े बंदरगाह मुख्य आयात-निर्यात देखें तो
~पश्चिमी मार्ग (यूरोप) बॉम्बे → सूरत → कोचीन निर्यात में कपास, अफीम, नील, कालीमिर्च आयात: सोना, चाँदी, शराब, हथियार।
~दक्षिण-पूर्वी मार्ग (मलक्का, चीन) मद्रास → मसुलीपट्टनम → कोलकाता निर्यात: मलमल,चीनी, रेशम । आयात में चीनी मिट्टी, चाय, जायफल।
~पूर्वी मार्ग (बंगाल → यूरोप) कोलकाता → बालासोर → (सीधे यूरोप) निर्यात में चाय, जूट, रेशम, अफीम आयात में मशीनरी, ऊनी कपड़ा।
~अफ्रीका-अरब मार्ग बॉम्बे → कोचीन → अंजेंगो निर्यात में दालचीनी,इलायची,लकड़ी । आयात में हाथीदाँत, सोना, गुलाम (प्रारंभिक दौर)। अंग्रेजी हुकूमत का व्यापारिक चक्र (ट्रायंगुलर ट्रेड) के हिसाब से अंग्रेज़ इस त्रिकोणीय मार्ग का सबसे अधिक उपयोग करते थे। जिसके तहत
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लंदन (यूरोप)
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▼ (हथियार, शराब, चाँदी)
बॉम्बे/कोलकाता।
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▼ (कपास, अफीम, चाय)
चीन (ग्वांगझू)।
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▼ (चीनी मिट्टी, रेशम, चाय)
वापस लंदन।
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रणनीतिक महत्व (नक्शे की कुंजी) के मद्देनजर
~बॉम्बे = पश्चिम का गेटवे (अफ्रीका/यूरोप)।
~मद्रास = दक्षिण-पूर्व एशिया का प्रवेशद्वार।
~कोलकाता = पूर्वोत्तर का व्यापारिक दिल (चीन/जापान)।
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~कोचीन/सूरत = मसाला मार्ग पर चौकियाँ।
~बालासोर/मसुलीपट्टनम = फीडर पोर्ट (छोटे जहाज़ों के लिए आश्रय)।(Photos Courtesy Social media and AI)
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