*अजीत डोभाल:राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में कार्यकाल,विवाद और रणनीतिक बदलाव*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*अजीत डोभाल:राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में कार्यकाल,विवाद और रणनीतिक बदलाव*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई 


(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई) विवाद,उपलब्धियां और सुरक्षा नीति में बदलाव - जाने NSA अजीत डोभाल की पूरी कहानी। अजीत डोभाल भारत के वर्तमान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान कई विवादों और उपलब्धियों के केंद्र में रहे हैं। उनकी नियुक्ति से लेकर उनकी रणनीतिक सोच और व्यक्तिगत विवादों तक डोभाल का करियर चर्चाओं से भरा रहा है। 


आइए जानते हैं उनके बारे में विस्तार से। गुजरात से शुरुआत और विवेकानंद कनेक्शन के हिसाब से अजीत डोभाल की यात्रा गुजरात से शुरू होती है। जहाँ उन्हें मोदी सरकार ने आंतरिक सुरक्षा और पुलिस विज्ञान से संबंधित एक विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया था। इसी पहल के तहत उन्होंने गुजरात में''रक्षा शक्ति''विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। साल 2009 में अजीत डोभाल की मुलाकात RSS से जुड़े एकनाथ रानडे से हुई थी। जो उस समय तमिलनाडु में''विवेकानंद केंद्र''नामक संगठन चला रहे थे। इस संगठन का मुख्य उद्देश्य स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं को बढ़ावा देना था। डोभाल ने एकनाथ रानडे के संगठन की मदद से ''विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन'' (VIF) की स्थापना की थी। जो बाद में पूरे भारत में चर्चा का विषय बन गया था।


 साल 2011 में विवेकानंद फाउंडेशन ने ''इंडियन ब्लैक मनी अब्रॉड इन सीक्रेट बैंक्स एंड टैक्स हेवन'' नामक एक रिपोर्ट जारी की थी । जिसने काफी सुर्खियाँ बटोरीं थी। NSA के रूप में नियुक्ति और विवाद के मद्देनजर जून 2014 में अजीत डोभाल को भारत का राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया गया था। यह नियुक्ति अपने आप में विवादास्पद थी क्योंकि परंपरागत रूप से यह पद IFS भारतीय विदेश सेवा अधिकारियों को दिया जाता था। डोभाल इस परंपरा को तोड़कर NSA बने थे। जिस पर काफी हल्ला मचा था। सुरक्षा नीति में बदलाव के मद्देनजर अजीत डोभाल के NSA बनने के बाद भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला था। आजादी के बाद से भारत ने ज्यादातर ''डिफेंसिव'' रक्षात्मक रणनीति अपनाई थी। डोभाल ने इसे बदलकर ''डिफेंसिव- ऑफेंसिव'' रक्षात्मक- आक्रामक रणनीति की सिफारिश की थी। 
जिसके परिणाम पहले की तुलना में काफी बेहतर रहे और हमलों में कमी आई थी। इसके अंतर्गत विवाद के हिसाब से पाकिस्तानी कनेक्शन और इन्वेस्टमेंट कंपनी का मामला देखें तो डोभाल परिवार एक विवाद में तब घिर गया था। जब यह खुलासा हुआ कि अजीत डोभाल के बेटे विवेक डोभाल ''टॉर्च इन्वेस्टमेंट''(पूर्व में ''जीस कैब'') नामक एक सिंगापुर- आधारित इन्वेस्टमेंट कंपनी के सह-संस्थापक हैं। 


जिसमें एक पाकिस्तानी नागरिक सैयद अली अब्बास भी शामिल थे। कांग्रेस ने इस मुद्दे को उठाया और देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया कि देश का NSA आतंकियों का मुकाबला कर रहा है जबकि उसका बेटा एक पाकिस्तानी के साथ कारोबार कर रहा है। जयराम रमेश केस और माफी के मामले के मद्देनजर देखें तो इस विवाद को और गहरा करते हुए अजीत डोभाल ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश और''कैराविन''पत्रिका पर आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया था। अंततः जयराम रमेश को अजीत डोभाल के बेटे विवेक डोभाल से माफी माँगनी पड़ी थी और विवेक डोभाल ने भी बदले में माफी स्वीकार की थी हालांकि यह अजीत डोभाल की एक विवादास्पद सुरक्षा रणनीतिकार की संपूर्ण कहानी है। 


अब जाने पाकिस्तान में गुप्त मिशन से लेकर सर्जिकल स्ट्राइक तक। जानिए भारत के''ग्रेट वॉल''की अनकही कहानी। अजीत डोभाल भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अपने अब तक के करियर में कई उपलब्धियों,विवादों और रणनीतिक बदलावों के केंद्र रहे हैं। आइए जानते हैं उनके बारे में गहराई से उनका IPS से NSA तक का एक सफर । अजीत डोभाल साल 1968 बैच के केरल कैडर के IPS अधिकारी थे। उन्होंने दशकों तक ऐसे काम किए जिनकी कल्पना करना भी मुश्किल है। साल 1988 के''ऑपरेशन ब्लैक थंडर''के दौरान जब आतंकियों ने स्वर्ण मंदिर पर कब्जा कर लिया था। डोभाल ने निहत्थे होकर अंदर प्रवेश किया था और आतंकियों के बीच घुल-मिलकर खतरे को बिना किसी रक्तपात के समाप्त किया था। पाकिस्तान में भी अंडरकवर ऑपरेशन किया था। अजीत डोभाल उन कुछ खुफिया अधिकारियों में से एक हैं जिन्होंने सात साल तक पाकिस्तान में अंडरकवर रहकर काम किया था। उन्होंने स्क्रीन के पीछे नहीं बल्कि सड़कों पर बातचीत और मानवीय व्यवहार से जानकारी जुटाई थी। NSA के रूप में योगदान और नीतिगत बदलाव देखें तो अजीत डोभाल भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को 'रक्षात्मक' से''आक्रामक''(ऑफेंसिव) दिशा में ले गए थे ।


उनके नेतृत्व में उरी के बाद सर्जिकल स्ट्राइक ने स्पष्ट संदेश दिया कि भारत जवाब देगा। बालाकोट हवाई हमले ने प्रतिरोध को पुनर्परिभाषित किया था। डोकलाम गतिरोध को बिना बढ़ोतरी के लेकिन दृढ़ता से संभाला गया था। विवाद के हिसाब से पाकिस्तानी कनेक्शन और इन्वेस्टमेंट कंपनी रही थी। डोभाल परिवार तब विवादों में आया जब यह सामने आया कि उनके बेटे विवेक डोभाल की ''टॉर्च इन्वेस्टमेंट''जो पूर्व में''जीस कैब''थी,नामक सिंगापुर-आधारित कंपनी में एक पाकिस्तानी नागरिक सैयद अली अब्बास सह-संस्थापक थे। कांग्रेस ने इसे देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया था। इसके अलावा विवेकानंद फाउंडेशन (VIF) द्वारा आयोजित सेमिनारों के प्रायोजकों में बोइंग और इस्राइल की मंगल सिक्योरिटी जैसी विदेशी रक्षा कंपनियाँ शामिल थीं। जिसने भी सवाल खड़े किए। इसी 


दौरान जयराम रमेश मामला सामने आया था। अजीत डोभाल ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश और''कैराविन''पत्रिका के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर किया। अंततः जयराम रमेश को डोभाल के बेटे से माफी माँगनी पड़ी थी।''भारत की महान दीवार''के रूप में उभरे। 80 वर्ष की आयु में भी अजीत डोभाल सक्रिय हैं। उन्हें 'भारत की महान दीवार'और ''द मैन इंडिया स्लीप्स बिकॉज़ ऑफ'' कहा जाता है। उन्होंने साबित किया है कि असली सेवा मान्यता नहीं माँगती,ताकत शांत होती है,शोरगुल वाली नहीं।(Photos Courtesy Social media and AI)

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