*ईरान के नेतृत्व संकट की गहराई:अगर मोजतबा खामेनेई की मौत होती है तो क्या होगा?*/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*ईरान के नेतृत्व संकट की गहराई:अगर मोजतबा खामेनेई की मौत होती है तो क्या होगा?*/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई
(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई) ईरान इन दिनों एक अभूतपूर्व राजनीतिक और संवैधानिक संकट से गुजर रहा है। फरवरी 2026 में अमेरिका-इज़राइल संयुक्त हमलों में पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मृत्यु के बाद उनके पुत्र मोजतबा खामेनेई ने यह पद संभाला था लेकिन अब गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं और यह सवाल उठ रहा है अगर मोजतबा खामेनेई की भी मौत हो गई तो ईरान में क्या होगा?
संवैधानिक प्रावधान के मद्देनजर अंतरिम नेतृत्व समिति का गठन हो सकता हैं। ईरान का संविधान विशेष रूप से अनुच्छेद 111 इस स्थिति के लिए स्पष्ट प्रावधान करता है। यदि सुप्रीम लीडर की मृत्यु हो जाती है या वह अपने कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ हो जाते हैं तो तीन सदस्यों वाली एक अंतरिम नेतृत्व समिति (Interim Leadership Council) सत्ता संभालती है । इस समिति में शामिल होते हैं। जो राष्ट्रपति वर्तमान में मसूद पेजेश्कियान, न्यायपालिका के प्रमुख गोलामहोसैन मोहसेनी-एजेई और गार्जियन काउंसिल के एक धार्मिक सदस्य जिसे एक्सपीडिएंसी काउंसिल द्वारा चुना जाता है । यह त्रि-सदस्यीय समिति तब तक सुप्रीम लीडर के सभी कार्यों को संभालेगी। जब तक कि स्थायी रूप से नए नेता का चयन नहीं हो जाता। विशेषज्ञों की सभा में स्थायी नेता के चयन की प्रक्रिया हो सकती हैं। सर्वोच्च नेता के चयन की अंतिम जिम्मेदारी 88-सदस्यीय असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स (विशेषज्ञों की सभा) पर है । यह पूर्ण रूप से शिया धर्मगुरुओं का निकाय है। जो हर आठ साल में जनता द्वारा चुने जाते हैं हालांकि उनकी उम्मीदवारी को गार्जियन काउंसिल द्वारा अनुमोदित किया जाता है ।
संविधान के अनुसार यह सभा "जितनी जल्दी हो सके" एक नए सुप्रीम लीडर का चुनाव करेगी लेकिन यह प्रक्रिया जटिल है और इसके पीछे वर्षों की तैयारी होती है । संभावित उत्तराधिकारी और उनकी चुनौतियाँ के हिसाब से मोजतबा खामेनेई एक विवादास्पद उत्तराधिकार है। मोजतबा खामेनेई जो 56 वर्षीय शिया धर्मगुरु हैं। उन्होंने कभी कोई सरकारी पद नहीं संभाला था। पिता से पुत्र को सत्ता हस्तांतरण को ईरान में बड़े वर्ग द्वारा अलोकतांत्रिक और इस्लाम विरोधी माना जाता है। खासकर साल 1979 की शाह सरकार के पतन के बाद एक नए धार्मिक राजवंश की स्थापना के डर से इसलिए संभावित विकल्पों में विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान में ऐसा कोई एक प्रमुख व्यक्ति नहीं है। जो अली खामेनेई की धार्मिक और राजनीतिक साख को पूरी तरह से माप सके। संभावित उम्मीदवारों में आयतुल्लाह अलीरेज़ा अराफी का नाम आता है।
जो इस समय अंतरिम समिति के सदस्य भी हैं और उन्होंने इस्लामी न्यायशास्त्र पर 20 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित की हैं। आयतुल्लाह मोहम्मद मेहदी मिरबाघेरी और आयतुल्लाह हाशेम हुसैनी बुशेहरी भी संभावित उम्मीदवारों की सूची में शामिल हैं । स्वास्थ्य संकट की अटकलों के मद्देनजर क्या मोजतबा की स्थिति वाकई गंभीर है? तो रिपोर्ट्स और दावे को देखें तो इरानवायर की रिपोर्ट के अनुसार सरकार के उच्चतम स्तरों पर यह अफवाह है कि मोजतबा खामेनेई की हालत "अत्यंत गंभीर" है और वह किसी भी समय दुनिया छोड़ सकते हैं। उनके पिता की मृत्यु के बाद से मोजतबा ने एक भी सार्वजनिक उपस्थिति नहीं दी है और न ही कोई टेलीविज़न भाषण दिया है। ईरानी राज्य मीडिया ने केवल लिखित बयान जारी किए हैं।
राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने खुद राज्य टेलीविज़न पर स्वीकार किया कि मोजतबा से संपर्क करना"बहुत मुश्किल"है । खबरों के अनुसार पेजेश्कियान को मोजतबा से मिलने के लिए एक अंधेरी गाड़ी में बिठाया गया था। जहाँ वह उनका चेहरा नहीं देख सके और बाद में उन्होंने संदेह जताया कि आवाज मोजतबा की थी या नहीं? मोजतबा अपने पिता के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हुए थे । आधिकारिक खंडन के हिसाब से ईरानी अधिकारियों ने इन दावों की पुष्टि नहीं की है और कुछ सूत्रों का कहना है कि उनकी चोटें सीमित थीं लेकिन मोजतबा की यह लंबी अनुपस्थिति ईरानी समाज में राजनीतिक अनिश्चितता को बढ़ा रही है। सुरक्षा और शक्ति संतुलन यानि वास्तविक नियंत्रण किसके पास?यह एक सवाल है।
यद्यपि संवैधानिक प्रक्रिया स्पष्ट है। ईरान की वास्तविक शक्ति सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (SNSC) और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के हाथों में केंद्रित है। अली लारिजानी जो SNSC के प्रमुख हैं और अली खामेनेई के करीबी माने जाते हैं। इस संक्रमण काल में एक प्रमुख शक्ति केंद्र के रूप में उभरे हैं। यह सुरक्षा तंत्र ही तय करेगा कि ईरान अगले नेता की ओर कैसे बढ़ता है। एक नाजुक संक्रमण काल के मद्देनजर मोजतबा खामेनेई की संभावित मृत्यु ईरान को एक अभूतपूर्व संकट में डाल देगी। एक तरफ संविधान अंतरिम समिति और विशेषज्ञों की सभा के माध्यम से एक स्पष्ट रास्ता प्रदान करता है।
वहीं दूसरी ओर अत्यधिक केंद्रीकृत शक्ति, अप्रत्याशित उत्तराधिकार और बढ़ता स्वास्थ्य संकट इस प्रक्रिया को अत्यंत जटिल बना देता है। ईरान इस समय न केवल बाहरी दबाव जैसे अमेरिका- इज़राइल संघर्ष,होर्मुज जलडमरूमध्य वार्ता का सामना कर रहा है बल्कि आंतरिक रूप से नेतृत्व के अभाव में शासन की स्थिरता भी खतरे में पड़ सकती है। यह देखना बाकी है कि क्या ईरानी शासन इस संक्रमण को सुचारू रूप से पार कर पाता है या यह सत्ता संघर्ष और अराजकता की ओर ले जाता है।(Photos Courtesy Social media and AI)
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