*चांद के बाद अब पृथ्वी पर दोहराया गया ऐतिहासिक प्रयोग,निर्वात में एक साथ जमीन पर पहुंचे हथौड़ा और पंख*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*चांद के बाद अब पृथ्वी पर दोहराया गया ऐतिहासिक प्रयोग,निर्वात में एक साथ जमीन पर पहुंचे हथौड़ा और पंख*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई 


(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई)विज्ञान जगत के सबसे चर्चित प्रयोगों में से एक, जिसे अपोलो 15 मिशन के दौरान चांद की सतह पर अंतरिक्ष यात्री डेविड स्कॉट ने किया था। अब उसे पृथ्वी पर एक कांच के चैंबर में सफलता पूर्वक दोहराया गया है। इस प्रयोग का मुख्य उद्देश्य यह सिद्ध करना था कि निर्वात (वैक्यूम) की स्थिति में गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से सभी वस्तुएं,चाहे वे भारी हों या हल्की एक समान ऊंचाई से गिराए जाने पर एक ही समय पर जमीन पर पहुंचती हैं।


 दरअसल गुरुत्वाकर्षण के कारण उत्पन्न त्वरण (g) किसी भी वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता यानि पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल हर वस्तु को समान त्वरण देता है लेकिन पृथ्वी पर वायुमंडल (हवा) की मौजूदगी के कारण हल्की वस्तुएं जैसे पंख हवा के प्रतिरोध (ड्रैग) के कारण धीमी गिरती हैं। जबकि भारी वस्तुएं तेजी से नीचे आती हैं। इसी भ्रांति को दूर करने के लिए वैज्ञानिकों ने एक मजबूत कांच का चैंबर बनाया। जिसके अंदर से सारी हवा को बाहर निकालकर पूर्ण निर्वात (Zero Air Pressure) की स्थिति उत्पन्न की गई। इस चैंबर के अंदर एक हथौड़ा (भारी वस्तु) और एक पंख (हल्की वस्तु) को समान ऊंचाई से एक साथ छोड़ा गया। 








ध्यान देने वाली बात यह है कि निर्वात होने के कारण हवा का कोई प्रतिरोध नहीं था इसलिए दोनों वस्तुएं एक समान गति से गिरीं और ठीक उसी क्षण जमीन पर पहुंच गईं। यह प्रयोग स्लो मोशन कैमरे में कैद किया गया ताकि दर्शक स्पष्ट रूप से देख सकें कि दोनों के बीच गिरने के समय में कोई अंतर नहीं है। वैज्ञानिकों के अनुसार "निर्वात में गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव सभी वस्तुओं पर समान होता है। वस्तु का द्रव्यमान चाहे जितना भी हो।  यदि हवा नहीं है तो सभी एक ही दर से गिरेंगे।"यही कारण है कि चांद पर यह प्रयोग सफल हुआ था क्योंकि चांद पर वायुमंडल नहीं है और वहां भी हथौड़ा और पंख एक साथ जमीन पर गिरे थे। अब इस प्रयोग को पृथ्वी पर कृत्रिम निर्वात बनाकर दोहराकर वैज्ञानिकों ने गैलीलियो के सिद्धांत को एक बार फिर साबित कर दिया है। यह प्रयोग न केवल भौतिकी के छात्रों के लिए बल्कि आम लोगों के लिए भी अत्यंत शिक्षाप्रद है क्योंकि यह हमें यह समझाता है कि गुरुत्वाकर्षण किसी भी वस्तु के भार पर निर्भर नहीं करता बल्कि यह पृथ्वी का एक स्थायी गुण है। 




चांद की धरती से लेकर पृथ्वी के प्रयोगशाला तक  निर्वात में हथौड़ा और पंख ने तोड़ा गुरुत्वाकर्षण का मिथक के मद्देनजर विज्ञान के इतिहास में 2 अगस्त 1971 का दिन स्वर्णाक्षरों में लिखा गया। जब अपोलो 15 मिशन के कमांडर डेविड स्कॉट ने चांद की सतह पर एक हथौड़ा और एक बाज़ का पंख एक साथ छोड़ा था। और वे दोनों एक ही समय पर चांद की धरती पर पहुंचे थे । जबकि यही ऐतिहासिक प्रयोग पृथ्वी पर एक कांच के निर्वात चैंबर में सफलतापूर्वक दोहराया गया। जिसने एक बार फिर गैलीलियो के उस सिद्धांत को साबित किया जो सदियों पुराना है।


 यह प्रयोग वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह समतुल्यता सिद्धांत (Principle of Equivalence) को प्रदर्शित करता है। जो आइंस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत (Theory of General Relativity) की आधारशिला है। इस सिद्धांत के अनुसार गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में सभी वस्तुएं समान त्वरण से गिरती हैं। चाहे उनका द्रव्यमान या संरचना कुछ भी हो। इसी को वैज्ञानिक भाषा में ''गुरुत्वाकर्षण द्रव्यमान''और''जड़त्वीय द्रव्यमान''की समानता कहते हैं। 



गणितीय व्याख्या सरल भाषा में इसे समझे तो न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम के अनुसार किसी वस्तु पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल F = GMm/r² होता है। जबकि न्यूटन के दूसरे नियम से F = mg। दोनों को बराबर रखने पर mg = GMm/r² → g = GM/r² यहाँ g (गुरुत्वीय त्वरण) वस्तु के द्रव्यमान (m) पर निर्भर नहीं करता बल्कि पृथ्वी के द्रव्यमान (M) और उसकी त्रिज्या (r) पर निर्भर करता है यानि पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण का त्वरण (9.8 m/s²) हर वस्तु के लिए समान है तो फिर पृथ्वी पर हथौड़ा और पंख एक साथ क्यों नहीं गिरते?इसका कारण है वायु प्रतिरोध (Air Resistance)। पंख का घनत्व कम और सतह क्षेत्र अधिक होने के कारण हवा उसे अधिक रोकती है। जबकि हथौड़ा भारी होने के कारण वायु प्रतिरोध को आसानी से पार कर लेता है। जब हवा को पूरी तरह हटा दिया जाता है । निर्वात तो यह अंतर समाप्त हो जाता है। 








रोचक ऐतिहासिक तथ्य के मद्देनजर गैलीलियो का पीसा की झुकी मीनार वाला प्रयोग संभवतःकभी हुआ ही नहीं था । यह एक किंवदंती है! उन्होंने वास्तव में झुके हुए तलों (inclined planes) पर प्रयोग करके वायु प्रतिरोध के प्रभाव को कम किया था । चांद पर यह प्रयोग मिशन कंट्रोलर जो एलन का विचार था। डेविड स्कॉट ने प्रयोग के बाद बस इतना कहा कि "How about that?(कैसा रहा?)। स्कॉट ने 1.32 किलोग्राम का एल्युमीनियम भूवैज्ञानिक हथौड़ा और महज 0.03 किलोग्राम का बाज़ पंख करीब 1.6 मीटर की ऊंचाई से छोड़ा था। दोनों एक साथ चांद की सतह पर पहुंचे थे । आधुनिक विज्ञान में महत्व के मद्देनजर यह प्रयोग केवल एक कक्षा प्रदर्शन नहीं है। समतुल्यता सिद्धांत को आज भी अत्यंत सटीक प्रयोगों से परखा जा रहा है। साल 2008 में अमेरिकी Eöt-Wash समूह ने टॉर्शन पेंडुलम का उपयोग करके इसे 13 दशमलव स्थानों तक सटीक कसिद्ध किया था । यही सिद्धांत आज GPS तकनीक, उपग्रह नेविगेशन और अंतरिक्ष मिशनों की सफलता की नींव है ।(Photos Courtesy Social media and AI)

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