*महाराष्ट्र की खेल प्रतिभा को मिलेगा नया आयाम: खेलो इंडिया रिवैम्प्ड स्कीम के तहत ₹36,441 करोड़ का विशाल बजट,10 गुना एथलीट समर्थन का लक्ष्य*/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*महाराष्ट्र की खेल प्रतिभा को मिलेगा नया आयाम: खेलो इंडिया रिवैम्प्ड स्कीम के तहत ₹36,441 करोड़ का विशाल बजट,10 गुना एथलीट समर्थन का लक्ष्य*/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई 


(मुंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई) मुंबई 18 अगस्त 2026  को आयोजित एक पत्रकार परिषद में भारत सरकार की महत्वाकांक्षी "खेलो इंडिया रिवैम्प्ड स्कीम (2026-31)" के तहत खेल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए ₹36,441 करोड़ के बजट का ऐलान किया गया। यह राशि पिछले बजट से लगभग आठ गुना अधिक है। स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के क्षेत्रीय केंद्र मुंबई द्वारा आयोजित इस प्रेस इंटरैक्शन में यह जानकारी साझा की गई।


 इस योजना का प्रमुख लक्ष्य समर्थित एथलीटों की संख्या में लगभग 10 गुना की वृद्धि करना है। जिससे जमीनी स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक की एक सशक्त खेल श्रृंखला का निर्माण किया जा सके ।"खेलो इंडिया स्कीम 2026-31 के तहत उसका बड़ा बजट ही बड़ा लक्ष्य है। यह नवीनीकृत योजना केवल इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण पर केंद्रित नहीं है बल्कि एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। इसमें वैज्ञानिक प्रतिभा पहचान,उन्नत प्रशिक्षण,खेल विज्ञान और तकनीक पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ।


 इस योजना के तहत साल 2036 ओलंपिक में शीर्ष 10 और साल2048 ओलंपिक में शीर्ष 5 में स्थान पाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। जिसके लिए 2036 में 12-14 स्वर्ण सहित कुल 30-35 पदक और 2048 में 35-40 स्वर्ण सहित कुल 90-100 पदकों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है । महाराष्ट्र एक प्रमुख खेल राज्य है। SAI क्षेत्रीय केंद्र मुंबई के क्षेत्रीय निदेशक माननीय पांडुरंग चाटे (IRS) ने कहा कि यह योजना खेल विकास को अलग-अलग पहलों के संग्रह के बजाय एक समग्र खेल मार्ग के रूप में देखने की दिशा में एक मौलिक बदलाव है। महाराष्ट्र में एक मजबूत खेल संस्कृति और प्रतिभाओं का गहरा समूह है। 


हमारा उद्देश्य उस प्रतिभा को हर स्तर पर सही अवसरों से जोड़ना होना चाहिए। मुंबई में एक उच्च-प्रदर्शन केंद्र के रूप में उभरने की क्षमता है। जबकि राज्य के अन्य जिलों में सुविधाओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है ताकि प्रतिभाओं को उनके पैतृक स्थान के करीब ही पहचाना और विकसित किया जा सके। तीन-स्तरीय खेल बुनियादी ढांचा रणनीति के मुताबिक इस योजना के तहत खेल बुनियादी ढांचे के लिए एक तीन-स्तरीय रणनीति बनाई गई है। 



उसके तहत सबसे पहले पदक रणनीति के लिए खेल बुनियादी ढांचा तैयार करना है। मौजूदा सुविधाओं का ओलंपिक,एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों के मानचित्रण के साथ अंतराल विश्लेषण किया जाएगा । दूसरा सामरिक खेल परिसंपत्तियों को सुदृढ़ बनाना है और तिसरा राज्य कार्य योजना के मद्देनजर यह 60:40 (केंद्र-राज्य) लागत साझाकरण मॉडल पर काम करेगी। जो प्रतिभा प्रगति और एथलीट प्रतिधारण से जुड़ी है । 



30,000 एथलीटों के लिए वैज्ञानिक पहचान और समर्थन को जाने तो योजना की एक प्रमुख विशेषता एक मानकीकृत, वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी-आधारित राष्ट्रीय प्रतिभा पहचान प्रणाली का विकास करना है। इसके तहत ''खेलो इंडिया स्कूल'',''फीडर स्कूल'' और''खेलो इंडिया केंद्र''स्थापित किए जाएंगे। 'खेलो इंडिया एथलीट (KIA)' और ''इमर्जिंग खेलो इंडिया एथलीट"(E-KIA)' कोचिंग,आहार,आवास,खेल उपकरण,यात्रा,प्रतिस्पर्धा, चिकित्सा देखभाल और शैक्षिक सहायता सहित व्यापक सहायता प्रदान की जाएगी । इस योजना को लेकर प्रमुख एथलीटों ने जताया आभार। इस अवसर पर उपस्थित भारत के दिग्गज खिलाड़ियों ने इस योजना की सराहना की। 



पैरालंपिक गोल्ड मेडलिस्ट और पद्मश्री प्रमोद भगत ने कहा उ प्रतिभा तो बस शुरुआत है। शीर्ष स्तर तक पहुँचने के लिए सही कोचिंग,सुविधाओं,प्रतिस्पर्धा और खेल विज्ञान की आवश्यकता होती है। । BWF विश्व चैंपियन और पैरा-बैडमिंटन स्टार सुकांत कदम ने कहा कि यह ढांचा युवा एथलीटों को बड़े सपने देखने का आत्मविश्वास देगा । एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता सुश्री रुतुजा संपतराव भोसले ने नियमित प्रतिस्पर्धा और घर के करीब सुविधाओं के महत्व पर जोर दिया । फिट इंडिया और खेल प्रौद्योगिकी पर जोर के मद्देनजर इस योजना के तहत''फिट इंडिया''आंदोलन को सामुदायिक फिटनेस हब,योग और देसी खेलों के माध्यम से बढ़ावा दिया जाएगा। 



जिसमें महिलाओं और दिव्यांगजनों की भागीदारी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा साथ हीएक नए खंड के रूप में ''स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी'' को शामिल किया गया है। इसमें AI-आधारित प्रतिभा खोज,IoT सेंसर,वीडियो विश्लेषण और प्रदर्शन एनालिटिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके एथलीटों की यात्रा को डिजिटल रूप से ट्रैक किया जाएगा । SAI क्षेत्रीय केंद्र मुंबई ने एक बयान में कहा कि महाराष्ट्र के लिए यह मौका पूरी खेल श्रृंखला को मजबूत करने का है। जमीनी स्तर पर पहचान से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक। यह नई योजना भारत को एक वैश्विक खेल महाशक्ति बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है । (Photos by MCP)

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