*FY27 में भारत की GDP ग्रोथ 6.6% पर फिसलने के आसार,S&P ग्लोबल की चेतावनी,क्या मंदी के बादल मंडरा रहे?*/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*FY27 में भारत की GDP ग्रोथ 6.6% पर फिसलने के आसार,S&P ग्लोबल की चेतावनी,क्या मंदी के बादल मंडरा रहे?*/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई
(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई)भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक नई चेतावनी आई है। अमेरिकी रेटिंग एजेंसी S&P ग्लोबल ने अपने ताज़ा अनुमान में कहा है कि वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में देश की GDP विकास दर घटकर 6.6% रह सकती है। यह आंकड़ा पिछले वर्षों के मुकाबले काफी कम है। FY26 में यह दर 7.7% और FY25 में 7.1% थी यानि तीन सालों में लगातार गिरावट का सिलसिला बनता दिख रहा है। S&P ग्लोबल के विशेषज्ञों के मुताबिक इस मंदी की रफ्तार के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ा खतरा कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की बढ़ती कीमतों से है। जो भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए महंगाई और चालू खाते के घाटे को बढ़ा सकती है। वहीं कमजोर मॉनसून का सीधा असर कृषि उत्पादन और ग्रामीण मांग पर पड़ेगा।
जो भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इसके अलावा अमेरिका,यूरोप और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की सुस्ती से भारत के निर्यात और IT सेवाओं पर भी दबाव बनेगा। एक और अहम संकेत S&P ने मौद्रिक नीति को लेकर दिया है। एजेंसी का मानना है कि RBI इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही (अक्टूबर 2026-मार्च 2027) में ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है ताकि बढ़ती महंगाई पर काबू पाया जा सके हालांकि ब्याज दरें बढ़ने से कर्ज महंगा होगा। जिससे निवेश और उपभोग दोनों प्रभावित होंगे। जो आगे चलकर विकास दर को और धीमा कर सकता है। गौरतलब है कि FY27 के लिए भारत सरकार ने अभी कोई आधिकारिक लक्ष्य नहीं दिया है लेकिन S&P का यह अनुमान उन आशंकाओं को हवा देता है। जो पहले से ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक की रिपोर्टों में जताई जा रही थीं हालांकि 6.6% की दर भी वैश्विक मानकों के हिसाब से काफी मजबूत है लेकिन भारत को अपनी 8% की संभावित विकास क्षमता तक पहुंचने के लिए संरचनात्मक सुधार, निवेश बढ़ाने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की जरूरत होगी।
आने वाले महीनों में मॉनसून की बारिश, अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतें और RBI की रणनीति ही तय करेंगी कि यह अनुमान सच साबित होता है या भारत फिर से सबको चौंकाता है। GDP ग्रोथ पर ब्रेक! FY27 में 6.6% पर सिमट सकती है भारतीय अर्थव्यवस्था। S&P ने क्यों बढ़ाई चिंता? वह देखें तो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक नई चेतावनी के मद्देनजर देखें तो जो महंगाई, कच्चे तेल की कीमतों और कमजोर मॉनसून के त्रिकोणीय संकट की ओर इशारा करती है। अमेरिकी रेटिंग एजेंसी S&P ग्लोबल ने अनुमान जताया है कि वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में भारत की GDP विकास दर घटकर 6.6% रह सकती है। यह अनुमान पिछले वर्षों के मुकाबले काफी कम है। FY26 में यह दर 7.7% और FY25 में 7.1% थी यानि तीन सालों में लगातार गिरावट का सिलसिला बनता दिख रहा है हालांकि यह दर भारत के पिछले दशक के औसत 6.1% से अभी भी ऊपर है। क्यों घट रही है रफ्तार? तीन बड़े झटके के मद्देनजर S&P ग्लोबल ने इस सुस्ती के पीछे तीन प्रमुख कारण बताए हैं। जो एक-दूसरे को और मजबूत कर रहे हैं । तेल-गैस की बढ़ती कीमतों के हिसाब से (एनर्जी स्ट्रेस) भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 88% आयात करता है।पश्चिम एशिया (ईरान-अमेरिका) में बढ़ते तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। एक अनुमान के मुताबिक अगर कच्चा तेल $90-$100 के स्तर पर बना रहा तो भारत का चालू खाता घाटा (CAD) बढ़कर GDP का 2.5% तक पहुंच सकता है और रुपया 97 के स्तर तक गिर सकता है।
इससे आयात बिल बढ़ेगा,महंगाई बढ़ेगी और कंपनियों की लागत बढ़ जाएगी। एक ऐसा माहौल जो निवेश के लिए ठंडक पैदा करता है। उपर से कमजोर मॉनसून का कहर भी है। इस साल एल नीनो के प्रभाव ने मॉनसून को कमजोर कर दिया है। 22 जून 2026 तक देश में औसत बारिश में 43% की कमी दर्ज की गई थी । कम बारिश का सीधा असर खरीफ फसलों पर पड़ता है। कम पैदावार,ग्रामीण इलाकों में आमदनी में कमी और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें। यह ग्रामीण मांग को कमजोर करता है। जो कि FMCG कंपनियों से लेकर ऑटोमोबाइल तक हर सेक्टर को प्रभावित करता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था की सुस्ती के मद्देनजर अमेरिका, यूरोप और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में मंदी का खतरा भारत के निर्यात और IT सेवाओं पर दबाव बनाएगा। विदेशी निवेशक (FPI) पहले से ही भारतीय बाजारों से पैसा निकाल रहे हैं। इस कैलेंडर वर्ष में अब तक ₹2.56 लाख करोड़ से अधिक की निकासी हो चुकी है । महंगाई का बढ़ता दंश और RBI का संकेत है । S&P ग्लोबल का कहना है कि बढ़ती ऊर्जा और उर्वरक लागतें कंपनियों को मजबूर करेंगी कि वे यह बोझ उपभोक्ताओं पर डालें। FY27 में उपभोक्ता मुद्रास्फीति (CPI) 5.1% तक पहुंचने का अनुमान है। खास बात यह है कि RBI का अपना अनुमान भी GDP ग्रोथ 6.6% और महंगाई 5.1% का ही है यानि केंद्रीय बैंक और अंतरराष्ट्रीय एजेंसी की राय लगभग एक जैसी है। इसी के साथ S&P और BofA सिक्योरिटीज जैसी संस्थाओं का मानना है कि RBI इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही (दिसंबर 2026 से) में ब्याज दरों में 50 आधार अंकों (bps) की बढ़ोतरी कर सकता है। आम भाषा में कहें तो, साल के अंत तक होम लोन,कार लोन और अन्य किस्तों (EMI) का बोझ बढ़ सकता है हालांकि बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तेल की कीमतें $75-$80 के स्तर पर आ जाएं तो रुपया स्थिर हो सकता है और FDI व FPI की वापसी हो सकती है। क्या है उम्मीद की किरण?हालांकि यह आंकड़ा पिछले सालों से कम है लेकिन 6.6% की दर भी वैश्विक मानकों के हिसाब से काफी मजबूत है। सरकार ने कम बारिश से निपटने के लिए राज्य-वार आपातकालीन योजनाएं बनाई हैं और वैकल्पिक फसलों के बीजों का भंडार बढ़ाया है साथ ही भारत के पास मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और घरेलू मांग का सहारा है। आने वाले महीनों में मॉनसून की बारिश,पश्चिम एशिया में शांति और RBI की नीतियां ही तय करेंगी कि यह अनुमान सच साबित होता है या भारत फिर से सबको चौंकाता है।(Photos Courtesy Social media and AI)
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