*सूर्य के 'खोए हुए' चाँदी का रहस्य आखिरकार हुआ सुलझा! वैज्ञानिकों ने खोज निकाला छिपा हुआ खजाना*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*सूर्य के 'खोए हुए' चाँदी का रहस्य आखिरकार हुआ सुलझा! वैज्ञानिकों ने खोज निकाला छिपा हुआ खजाना*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई)क्या आप जानते हैं कि हमारा सूर्य जो हमें प्रकाश और ऊर्जा देता है। अपने अंदर एक अनमोल धातु का अखूट भंडार छिपाए हुए है? वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक चौंकाने वाली खोज की है। स्वीडन की प्रतिष्ठित उप्साला यूनिवर्सिटी (Uppsala University) के शोधकर्ताओं ने पाया है कि सूर्य में चाँदी (Silver) की मात्रा पहले के अनुमान से 55% अधिक है। यह खोज न केवल दशकों पुरानी एक ब्रह्मांडीय पहेली को सुलझाती है बल्कि हमारे सौर मंडल के इतिहास को समझने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है । क्या था''गायब चाँदी''(Missing Silver) का रहस्य? वह जाने तो वैज्ञानिकों के लिए यह एक लंबे समय से सिरदर्द बना हुआ था। हमारा सूर्य और कुछ प्राचीन उल्कापिंड (meteorites) दोनों एक ही गैस और धूल के बादल से बने थे। जो लगभग 4.6 अरब साल पहले अस्तित्व में आया था इसलिए सिद्धांत रूप में दोनों में भारी तत्वों (जैसे चाँदी) की मात्रा लगभग बराबर होनी चाहिए लेकिन पुराने मापों में सूर्य में चाँदी की मात्रा हमेशा उल्कापिंडों की तुलना में काफी कम पाई जाती थी।
यह विसंगति खगोलविदों को दशकों से परेशान कर रही थी । कैसे हुआ यह बड़ा खुलासा?वह समझे तो इस पहेली को सुलझाने के लिए उप्साला विश्वविद्यालय की शोधकर्ता सेमा कैलिस्कान (Sema Caliskan) और उनकी टीम ने एक नया और अधिक यथार्थवादी मॉडल विकसित किया। उन्होंने सूर्य के वायुमंडल के पुराने सरलीकृत मॉडल को एक नए 3D डायनामिक मॉडल से बदल दिया। जो सूर्य की बाहरी परतों की वास्तविक अशांत प्रकृति को बेहतर ढंग से दर्शाता है । इसके अलावा उन्होंने परमाणु भौतिकी (Atomic Physics) की गणनाओं में भी सुधार किया। उन्होंने यह ध्यान में रखा कि जिस प्रकाश का विश्लेषण किया जा रहा है। वह खुद चाँदी के परमाणुओं को प्रभावित करता है। पुराने मॉडलों में इस''गैर- संतुलन'' non- equilibrium प्रभाव को नज़रअंदाज़ कर दिया गया था।
जिससे माप में कमी आ गई थी। इस सटीक तकनीक जिसे स्पेक्ट्रोस्कोपी (Spectroscopy) कहा जाता है। उसमें वैज्ञानिक सूर्य के प्रकाश को उसके तरंगदैर्ध्य (wavelengths) में विभाजित करके उसमें मौजूद तत्वों की''उंगलियों के निशान''(spectral lines) ढूंढते हैं। चाँदी के निशान पराबैंगनी (Ultraviolet) क्षेत्र में मिलते हैं। जो बेहद धुंधले होते हैं और अन्य तत्वों के साथ मिल जाते हैं। कैलिस्कान की टीम ने इन्हीं मुश्किल निशानों को खंगालकर सही मात्रा का पता लगाया । इस बात की सुपरकंप्यूटर से मिली पुष्टि । इन जटिल गणनाओं को अंजाम देने के लिए टीम ने स्वीडन के सुपरकंप्यूटर "Tetralith" का सहारा लिया । इस मॉडल ने चाँदी की जितनी मात्रा बताई। वह उल्कापिंडों में पाई जाने वाली चाँदी से लगभग पूरी तरह मेल खाती है। जिससे यह साबित हो गया कि सूर्य में चाँदी कभी''गायब''नहीं थी बल्कि हम उसे सही से माप नहीं पा रहे थे। क्यों है यह खोज इतनी महत्वपूर्ण? वह जाने तो यह खोज महज़ एक संख्या में सुधार नहीं है बल्कि यह खगोल विज्ञान (Astronomy) की एक आधारशिला है।
ब्रह्मांडीय संदर्भ बिंदु के हिसाब से सूर्य हमारी आकाशगंगा में अन्य तारों,ग्रहों और ब्रह्मांडीय पदार्थों को समझने का सबसे महत्वपूर्ण संदर्भ बिंदु है। इसकी सटीक रासायनिक संरचना जानना अत्यंत आवश्यक है। भारी तत्वों के जन्म के मद्देनजर चाँदी जैसे भारी तत्व तारों के अंदर और उनके विस्फोट जैसे सुपरनोवा के दौरान बनते हैं। सूर्य में चाँदी की सही मात्रा जानने से हमें यह समझने में मदद मिलती है कि ब्रह्मांड में ये तत्व कैसे बने और कैसे फैले?दूर के सितारों का अध्ययन के हिसाब से इस सफलता के बाद वैज्ञानिक अब इसी पद्धति का उपयोग अन्य तारों के अध्ययन के लिए करेंगे। इससे हमें यह जानने में मदद मिलेगी कि ब्रह्मांड में चाँदी कहाँ बनती है और वह आकाशगंगा में कैसे फैली?यह खोज इस बात का एक शानदार उदाहरण है कि पुराने डेटा को नई तकनीक और गहन विज्ञान से दोबारा परखने पर कितने बड़े रहस्य उजागर हो सकते हैं। हमारा सूर्य न सिर्फ ऊर्जा का बल्कि ज्ञान का भी अथाह स्रोत है!(Photos Courtesy Social media and AI)
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