*नासा का AI रोबोट PRAXIS: शनि के रहस्यमयी छल्लों की गहराई में पहली बार होगा नमूना संग्रह*/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*नासा का AI रोबोट PRAXIS: शनि के रहस्यमयी छल्लों की गहराई में पहली बार होगा नमूना संग्रह*/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई 


(मुंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई)अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए नासा (NASA) ने PRAXIS नामक एक अत्याधुनिक AI-संचालित रोबोटिक मिशन का प्रस्ताव रखा है। इस मिशन का लक्ष्य सौर मंडल के सबसे आकर्षक और रहस्यमयी संरचनाओं में से एक शनि के छल्लों (Saturn's Rings) से सीधे नमूने एकत्र करना है। जो अपने आप में एक अभूतपूर्व प्रयास होगा ।


 क्या है PRAXIS मिशन की खासियत? वह देखें तो पारंपरिक मिशनों के विपरीत जहां अंतरिक्ष यान को किसी खगोलीय पिंड पर उतरना पड़ता है। PRAXIS रोबोट बिना उतरे ही शनि के छल्लों के कणों का विश्लेषण करेगा। रोबोट में लगी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) इसे स्वायत्त रूप से निर्णय लेने,सर्वोत्तम नमूना स्थलों की पहचान करने और वास्तविक समय में डेटा विश्लेषण करने में सक्षम बनाएगी। यह तकनीकी उन्नति उन क्षेत्रों में भी काम करना संभव बनाती है। जहां पृथ्वी से तुरंत नियंत्रण संभव नहीं है। वैज्ञानिक महत्व में क्यों है यह मिशन अहम? उसे समझे तो शनि के छल्ले न केवल अपनी सुंदरता के लिए बल्कि अपनी वैज्ञानिक रहस्यों के लिए भी प्रसिद्ध हैं। वे मुख्य रूप से पानी की बर्फ (water ice) से बने हैं लेकिन इनमें सिलिकेट (silicate), कार्बनिक पदार्थ (organics) और अन्य रहस्यमयी अवशोषक तत्व भी मौजूद हैं । 


PRAXIS मिशन का उद्देश्य इन छल्लों की सटीक संरचना,उनकी उत्पत्ति और समय के साथ हुए विकास से जुड़े प्रश्नों का उत्तर देना है । वैज्ञानिक समुदाय की क्या है उम्मीद? वह देखें तो सबसे पहले उत्पत्ति का रहस्य क्या है ?ये छल्ले शनि के साथ ही बने थे या किसी टूटे हुए चंद्रमा (moon) के अवशेष हैं? वैज्ञानिकों का मानना है कि ये छल्ले अपेक्षाकृत युवा हो सकते हैं। संभवतः 10 मिलियन से 100 मिलियन वर्ष पुराने । इस मिशन से इस सिद्धांत की पुष्टि या खंडन हो सकता है। विकास की गाथा के मद्देनजर छल्लों पर लगातार उल्कापिंडों (micrometeoroids) की बमबारी होती रहती है। 


जो उनकी संरचना को बदलती है । नमूनों के विश्लेषण से यह समझने में मदद मिलेगी कि ये छल्ले किस दर से बदल रहे हैं और भविष्य में इनका क्या होगा। सौर मंडल के इतिहास के हिसाब से शनि के छल्ले एक प्राकृतिक प्रयोगशाला की तरह हैं। जो डिस्क (disk) प्रणालियों के गतिकी (dynamics) को समझने में मदद करते हैं। यह ज्ञान हमें अन्य ग्रहों और यहां तक कि दूर के तारा मंडलों (planetary systems) में ग्रहों के निर्माण को समझने में सहायता कर सकता है । 


PRAXIS मिशन शनि के छल्लों के अध्ययन में एक नया अध्याय शुरू करने जा रहा है। AI की मदद से यह रोबोट उन रहस्यों को उजागर कर सकता है। जिन्होंने वैज्ञानिकों को दशकों तक हैरान किया है। यह मिशन न केवल शनि के बारे में हमारी समझ को गहरा करेगा बल्कि अंतरिक्ष अन्वेषण में AI के उपयोग के लिए एक नया मानक भी स्थापित करेगा। शनि के चंद्रमा (Saturn's Moons) और छल्लों के बीच गहरा संबंध है ।


 माना जाता है कि कुछ छोटे चंद्रमा,जिन्हें''रिंग मून्स''(Ring Moons) कहा जाता है। उस ने छल्लों को फैलने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है । PRAXIS के आंकड़े इन चंद्रमाओं की उत्पत्ति और छल्लों के साथ उनके जटिल नृत्य के बारे में भी नई जानकारी दे सकते हैं।(Photos Courtesy Social media and AI)

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