*अमेरिका-चीन AI युद्ध:कैरेबियन में $175 मिलियन की केबल परियोजना बनी नई चौकी,क्या बिजनेस और डेटा सुरक्षा दांव पर?*/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*अमेरिका-चीन AI युद्ध:कैरेबियन में $175 मिलियन की केबल परियोजना बनी नई चौकी,क्या बिजनेस और डेटा सुरक्षा दांव पर?*/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई
(मुंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई)अमेरिका-चीन तकनीकी प्रतिद्वंद्विता वैश्विक एआई बूम के लिए महत्वपूर्ण समुद्र के नीचे फाइबर-ऑप्टिक केबल पर बढ़ गई है। अमेरिका ने कैरेबियन और मध्य अमेरिका में पुराने केबलों को बदलने के लिए $175.8 मिलियन का निवेश करने की योजना बनाई है। जिसका उद्देश्य चीनी भागीदारी को अवरुद्ध करना है। बीजिंग ने वाशिंगटन पर वैश्विक केबल नेटवर्क का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया। चेतावनी दी कि इस तरह की कार्रवाइयां अंतरराष्ट्रीय बाजार के नियमों को बाधित कर सकती हैं और वैश्विक डेटा कनेक्टिविटी को खतरे में डाल सकती हैं। संघीय संचार आयोग (एफसीसी) ने पनडुब्बी लाइन टर्मिनल उपकरण ऑपरेटरों के लिए लाइसेंस अनिवार्य कर दिया है। जो प्रभावी रूप से अमेरिकी नेटवर्क से चीनी फर्मों को रोक रहा है। यह अमेरिकी से जुड़े उप-केबल प्रतिष्ठानों से चीनी दूरसंचार दिग्गजों पर पिछले प्रतिबंध का अनुसरण करता है।
जो चल रही तकनीकी प्रतियोगिता में इन केबलों के रणनीतिक महत्व को रेखांकित करता है। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तकनीकी प्रतिद्वंद्विता अब समुद्र की गहराइयों तक पहुँच गई है। अमेरिका ने कैरेबियन सागर और मध्य अमेरिका के तटों पर बिछी पुरानी पनडुब्बी फाइबर-ऑप्टिक केबलों को बदलने के लिए 175.8 मिलियन डॉलर (लगभग ₹1,450 करोड़) के निवेश की योजना बनाई है। यह परियोजना सीधे तौर पर चीनी कंपनियों को इस रणनीतिक नेटवर्क से दूर रखने के उद्देश्य से प्रस्तावित की गई है, ताकि डेटा ट्रैफ़िक पर पश्चिमी देशों का एकाधिकार बना रहे। वाशिंगटन का तर्क है कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और संवेदनशील डेटा की सुरक्षा के लिए आवश्यक है क्योंकि इन केबलों से वैश्विक इंटरनेट,वित्तीय लेन-देन और उभरती AI सेवाओं का विशाल भाग गुज़रता है हालाँकि बीजिंग ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है ।
चीनी विदेश मंत्रालय ने वाशिंगटन पर “वैश्विक संचार बुनियादी ढाँचे का राजनीतिकरण” करने का आरोप लगाया है और चेतावनी दी है कि इस प्रकार की “एकतरफा कार्रवाइयाँ” अंतरराष्ट्रीय बाजार नियमों को तोड़ती हैं और वैश्विक डेटा कनेक्टिविटी को नाजुक स्थिति में डाल सकती हैं। इसके साथ ही अमेरिकी संघीय संचार आयोग (FCC) ने नए नियम बनाए हैं। जिनके तहत किसी भी पनडुब्बी केबल टर्मिनल उपकरण को अमेरिकी तट से जोड़ने के लिए अनिवार्य लाइसेंस की आवश्यकता होती है । यह एक ऐसा कदम है जिसने Huawei,ZTE और अन्य चीनी दूरसंचार दिग्गजों को प्रभावी रूप से अमेरिकी नेटवर्क से बाहर कर दिया है। यह साल 2019 के उस फैसले के बाद आया है। जब अमेरिका ने चीनी कंपनियों को देश से जुड़ने वाली सभी नई केबल परियोजनाओं से प्रतिबंधित कर दिया था। जिससे Google और Meta जैसी कंपनियों को भी अपनी केबल योजनाएँ बदलनी पड़ीं।
आपकी जानकारी के लिए अतिरिक्त तथ्य विश्लेषणात्मक दृष्टि से इस मसले को जाने तो इसके रणनीतिक महत्व के मद्देनजर दुनिया की 99% अंतरमहाद्वीपीय डेटा ट्रैफ़िक पनडुब्बी केबलों से होकर गुजरती है । जिनकी लंबाई 1.4 मिलियन किलोमीटर से अधिक है। AI और क्वांटम कंप्यूटिंग के युग में ये केबलें “डिजिटल सिल्क रूट” की तरह हैं। इसी दौरान चीन का विकल्प देखें तो चीन अपनी “डिजिटल सिल्क रोड” पहल के तहत एशिया-अफ्रीका -यूरोप को जोड़ने वाली केबल परियोजनाओं में तेज़ी ला रहा है और उसने अमेरिकी मॉडल को दरकिनार करते हुए SAT-3/WASC और SEA-ME-WE-6 जैसी केबलों में भागीदारी बढ़ाई है।
आर्थिक प्रभाव के हिसाब से विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रतिबंध से वैश्विक केबल निर्माण लागत 15-20% तक बढ़ सकती है क्योंकि चीनी उपकरण जो 30% सस्ते हैं । उसको बाज़ार से बाहर कर दिया गया है। भू-राजनीतिक चेतावनी के मद्देनजर EU और ASEAN देशों ने इस “द्विध्रुवीकरण” पर चिंता जताई है क्योंकि यह छोटे देशों के लिए डिजिटल विकल्पों को सीमित कर सकता है और “दो इंटरनेट” (US-नेतृत्व वाला और China-नेतृत्व वाला) की परिकल्पना को बल दे सकता है। इसका पर्यावरणीय पहलू देखें तो पुरानी केबलों को हटाने और नई बिछाने से समुद्री पारिस्थितिकी पर असर पड़ता है। अमेरिका ने इस परियोजना में “ग्रीन केबल” तकनीक अपनाने का वादा किया है। जबकि चीन ने इसे “दिखावटी पर्यावरणीयता” करार दिया है।(Photos Courtesy Social media and AI)
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