*विश्व का सबसे बड़ा भू-सीमावर्ती देश:चीन जो पूरे यूरोप से बड़ा और 14 देशों से जुड़ा हुआ है*/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*विश्व का सबसे बड़ा भू-सीमावर्ती देश:चीन जो पूरे यूरोप से बड़ा और 14 देशों से जुड़ा हुआ है*/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई 

(मुंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई)दुनिया में एक ऐसा देश है । जो क्षेत्रफल में पूरे यूरोप महाद्वीप से भी विशाल है फिर भी उसकी पहचान समुद्र से नहीं बल्कि उसकी विशाल भू-सीमाओं से बनती है। यह देश है चीन जो 14 विभिन्न देशों के साथ अपनी सीमा साझा करता है। जो कि किसी भी अन्य राष्ट्र की तुलना में सर्वाधिक पड़ोसी हैं। चीन की भू-सीमा लगभग 22,000 किलोमीटर से अधिक फैली हुई है। जो इसे रूस,भारत,मंगोलिया, कज़ाखस्तान,वियतनाम, म्यांमार,लाओस,नेपाल,भूटान, पाकिस्तान, अफगानिस्तान,ताजिकिस्तान,किर्गिज़स्तान और उत्तर कोरिया से जोड़ती है। दिलचस्प बात यह कि चीन की तटरेखा विशाल होते हुए भी उसकी स्थलीय सीमाओं के सामने फीकी पड़ जाती है। यह भौगोलिक विशेषता चीन को एक ऐसा देश बनाती है। जो सागरों से नहीं बल्कि चारों ओर से जुड़े पड़ोसी देशों की श्रृंखला से परिभाषित होता है । एक ऐसा भू-रणनीतिक केंद्र जो एशिया की राजनीति,अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर गहरा प्रभाव डालता है। चीन की यह विशाल भू-सीमा मात्र एक भौगोलिक तथ्य नहीं, बल्कि एक जटिल भू-रणनीतिक वास्तविकता है। लगभग 2.2 लाख किलोमीटर लंबी यह स्थलीय सीमा दुनिया की सबसे लंबी और सबसे जटिल सीमाओं में से एक है। इसके साथ ही, चीन की समुद्री सीमा लगभग 1.8 लाख किलोमीटर है और समुद्र में वह 8 देशों से जुड़ा हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि चीन एक साथ भूमि और समुद्र दोनों से जुड़ने वाला देश है क्योंकि उसके पड़ोसियों में कोरिया और वियतनाम ऐसे हैं जिनसे उसकी सीमा थल और जल दोनों माध्यमों से जुड़ती है। सीमा विवाद और समाधान के मद्देनजर यद्यपि चीन की सीमा 14 देशों से जुड़ी है किंतु अभी तक भारत और भूटान के साथ सीमा संधि पर हस्ताक्षर नहीं हुए हैं। शेष 12 देशों के साथ लगभग 20,000 किलोमीटर सीमा का सीमांकन और परिसीमन हो चुका है। जो कि एक बड़ी राजनयिक उपलब्धि है। यह विशेषता चीन को भारत और भूटान के साथ संबंधों में एक अलग ही भू-राजनीतिक परिदृश्य में खड़ा करती है। रणनीतिक महत्व के हिसाब से हाल के वर्षों में चीन ने अपनी सीमावर्ती नीति को "संपूर्ण क्षेत्र सुरक्षा" और "पड़ोसी कूटनीति" का केंद्र बनाया है। 2025 में आयोजित "केंद्रीय परिधि कार्य सम्मेलन" में चीन ने अपने पड़ोसी देशों के साथ "साझा भविष्य का समुदाय" बनाने पर जोर दिया। जिसमें विकास, सुरक्षा और सभ्यता के तीन स्तंभ शामिल थे। इसके तहत चीन ने 17 क्षेत्रीय देशों को इस मॉडल में शामिल किया है और 25 देशों के साथ बेल्ट एंड रोड पहल के तहत सहयोग समझौते किए हैं। सीमावर्ती राज्यों की भूमिका के मद्देनजर चीन की 9 सीमावर्ती प्रांत और स्वायत्त क्षेत्र देश के कुल भू-भाग का 62% हिस्सा हैं। ये क्षेत्र न केवल सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं बल्कि आर्थिक एकीकरण और सांस्कृतिक आदान- प्रदान के माध्यम से चीन को अपने पड़ोसियों से जोड़ने का कार्य भी करते हैं। चीन की विशाल भू-सीमा उसे एक ऐसी शक्ति के रूप में स्थापित करती है। जो समुद्रों से परिभाषित न होकर अपने पड़ोसी देशों की शृंखला से गढ़ी गई है। यह भौगोलिक वास्तविकता चीन को एशिया का "गुरुत्वाकर्षण केंद्र" बनाती है। जो कूटनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के त्रिकोण में संतुलन साधता है।( Photos Courtesy Social media and AI)

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