*पुतिन का ‘डूम्सडे प्लेन’ US के ईरान पर हमला करने से कुछ घंटे पहले मॉस्को-तेहरान-बीजिंग का रहस्यमयी सफ़र,24 घंटे की इस उड़ान के पीछे राज़ क्या है?*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*पुतिन का ‘डूम्सडे प्लेन’ US के ईरान पर हमला करने से कुछ घंटे पहले मॉस्को-तेहरान-बीजिंग का रहस्यमयी सफ़र,24 घंटे की इस उड़ान के पीछे राज़ क्या है?*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
(मुंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई) एक ऐसे घटनाक्रम में जिसने "इंटरनेशनल स्ट्रेटेजिक कम्युनिटी"को हिलाकर रख दिया है। रूस के बहुत ज़्यादा "क्लासिफाइड एयरबोर्न कमांड एयरक्राफ्ट"जिसे अनौपचारिक रूप से“डूम्सडे प्लेन” के नाम से जाना जाता है। उसने इस हफ़्ते की शुरुआत में तीन राजधानियों में 24 घंटे का एक असामान्य सफ़र किया। जिससे US-ईरान की बढ़ती दुश्मनी के बीच एक सीक्रेट हाई-स्टेक्स डिप्लोमैटिक मिशन के बारे में तेज़ अटकलें लगाई जा रही हैं। वो फ़्लाइट जिसने सबका ध्यान खींचा। AirNav Radar और Flightradar24 के फ़्लाइट-ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक एक रूसी टुपोलेव Tu-214PU कमांड एयरक्राफ़्ट,जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर RA-64531 है और जिसका कॉलसाइन RSD420 है। 13 जुलाई को लोकल टाइम के हिसाब से सुबह करीब 8:30 बजे मॉस्को के"वनुकोवो एयरपोर्ट" से उड़ा। रूस के एलीट स्पेशल फ़्लाइट स्क्वाड्रन रोसिया,जो देश के टॉप पॉलिटिकल और मिलिट्री लीडरशिप को लाने-ले जाने के लिए ज़िम्मेदार यूनिट है। उसके द्वारा ऑपरेट किया जाने वाला यह एयरक्राफ़्ट सुबह करीब 8:05 बजे तेहरान के"इमाम खुमैनी इंटरनेशनल एयरपोर्ट"पर उतरा।
इसके बाद जो हुआ वह और भी दिलचस्प था। प्लेन करीब 12 घंटे तक तेहरान में ही रहा,उसके दरवाज़े सील थे। कोई ऑफिशियल यात्रा का प्लान नहीं बताया गया था और इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी कि उसमें कौन था या क्या काम हो रहा था? लोकल टाइम के हिसाब से शाम 7:08 बजे इसने फिर से उड़ान भरी लेकिन मॉस्को लौटने के बजाय,यह पूरब की ओर बढ़ गया। एयरक्राफ्ट14 जुलाई को सुबह 2:25 AM बजे "बीजिंग कैपिटल इंटरनेशनल एयरपोर्ट" पर लैंड हुआ। टाइमिंग बहुत अच्छी साबित हुई।
Tu-214PU के ईरानी एयरस्पेस छोड़ने के कुछ ही घंटों बाद यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कई ईरानी मिलिट्री टारगेट के खिलाफ बड़े पैमाने पर मिलिट्री ऑपरेशन शुरू किया। US के हमले जो 13 जुलाई को कीव टाइम के हिसाब से रात करीब 11:45 PM बजे शुरू हुए और 14 जुलाई को सुबह 5:15 AM बजे तक पांच घंटे से ज़्यादा चले उन्होंने बुशहर,चाबहार,जस्क, कोनारक,अबू मूसा और बंदर अब्बास में मौजूद जगहों को टारगेट किया। CENTCOM ने कहा कि ऑपरेशन का मकसद ओमानी पानी में UAE के दो तेल टैंकरों पर ईरानी क्रूज मिसाइल हमलों के बाद इस इलाके में कमर्शियल शिपिंग को खतरा पहुंचाने की ईरान की क्षमता को कम करना था। जिसमें एक क्रू मेंबर मारा गया था और आठ अन्य घायल हो गए थे।
रूस का‘'डूम्सडे प्लेन’'क्या है? वह देखें तो हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स में इस एयरक्राफ्ट को बड़े पैमाने पर “डूम्सडे प्लेन” कहा गया है लेकिन टेक्निकली यह नाम सही नहीं है। Tu-214PU रूस में बने Tu-214 नैरोबॉडी एयरलाइनर का बहुत ज़्यादा मॉडिफाइड वर्शन है, जिसमें “PU” शब्द रूसी शब्द “कमांड पोस्ट” “पंकट उप्रावलेनिया” से लिया गया है। रूस के मुख्य न्यूक्लियर-वॉर कमांड एयरक्राफ्ट बड़े "इल्यूशिन Il-80 मैक्सडोम"जिसे न्यूक्लियर लड़ाई से बचने के लिए डिज़ाइन किया गया है । उसके उलट Tu-214PU रूस के सीनियर सरकारी लीडरशिप के लिए एक सुरक्षित एयरबोर्न कम्युनिकेशन और कमांड प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करता है।"कज़ान एविएशन प्लांट"में बने इस एयरक्राफ्ट ने दिसंबर 2018 में अपनी पहली उड़ान भरी और 2019 में रूस के स्पेशल फ़्लाइट स्क्वाड्रन में शामिल हुआ। यह एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन सिस्टम, सुरक्षित सैटेलाइट लिंक,मज़बूत डेटा रिले और एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स वॉरफेयर क्षमताओं से लैस है। जिन्हें ज़मीनी इंफ्रास्ट्रक्चर के नष्ट होने पर भी सरकारी कम्युनिकेशन बनाए रखने के लिए डिज़ाइन किया गया है। असल में यह एक“फ्लाइंग क्रेमलिन”की तरह काम करता है। एक मोबाइल कमांड सेंटर जहाँ से रूस की लीडरशिप किसी बड़े संकट के दौरान आसमान से सरकारी मामलों और मिलिट्री ऑपरेशन को कोऑर्डिनेट कर सकती है। खास बात यह है कि प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन खुद इस तरह के एयरक्राफ्ट में सफर कर चुके हैं।
दिसंबर 2017 में उन्होंने सीरिया में रूस के "खमीमिम एयर बेस"पर एक बहुत मशहूर विज़िट के लिए Tu-214PU का इस्तेमाल किया था। जब बहुत ज़्यादा दुश्मनी चल रही थी और उन्हें रूसी Su-30SM फाइटर्स ने एस्कॉर्ट किया था। एक पैटर्न जो सवाल खड़े करता है। यह पहली बार नहीं है। जब Tu-214PU ने संकट के समय तेहरान की रहस्यमयी ट्रिप की हो। फरवरी के बीच में US और इज़राइल के ईरान पर जॉइंट स्ट्राइक शुरू करने से कुछ दिन पहले वही एयरक्राफ्ट तेहरान पहुँचा और 18 फरवरी तक दो दिन रुका। उस मौके पर भी न तो रूस और न ही ईरान ने विज़िट का मकसद बताया और न ही उसमें सवार लोगों की पहचान बताई। इस पैटर्न के बार-बार होने से ईरान के खिलाफ बड़ी मिलिट्री कार्रवाई से एक दिन पहले तेहरान में एक रूसी कमांड एयरक्राफ्ट का पहुंचने पर एनालिस्ट्स ने इस डिप्लॉयमेंट को एक अहम जियोपॉलिटिकल सिग्नल के तौर पर देखा है। कुछ लोगों का कहना है कि इस मिशन में मॉस्को और तेहरान के बीच एग्जीक्यूटिव- लेवल की बातचीत शामिल हो सकती है। जिसमें शायद मिलिट्री- टेक्निकल सहयोग,इंटेलिजेंस शेयरिंग या कंटिंजेंसी प्लानिंग शामिल हो सकती है क्योंकि ईरान पर अमेरिका और उसके सहयोगियों से लगातार मिलिट्री दबाव है। जियोपॉलिटिकल शतरंज की बिसात के मद्देनजर देखें तो एयरक्राफ्ट का रूट मॉस्को से तेहरान और फिर बीजिंग अपने आप में एक बयान है। मॉस्को से साइबेरिया होते हुए बीजिंग का सबसे छोटा रास्ता लेने के बजाय प्लेन जानबूझकर नॉर्थ कॉकेशस और कैस्पियन सागर के इलाकों से होते हुए दक्षिण की ओर तेहरान गया । वहाँ आधे दिन तक रहा और फिर पूरब की ओर बढ़ गया। इससे पता चलता है कि ईरान सिर्फ़ एक रिफ्यूलिंग स्टॉप नहीं था बल्कि एक ज़रूरी डेस्टिनेशन था । जहाँ चीन जाने से पहले जाना ज़रूरी था।
यह टाइमिंग रूस पर बड़े स्ट्रेटेजिक दबावों से भी मेल खाती है। यूक्रेन विवाद के तेज़ होने के साथ खबर है कि यूक्रेनी ड्रोन रूस के इलाके में अंदर तक हमला कर रहे हैं। जिसमें रूस के1,500 किलोमीटर अंदर एक बड़ी तेल रिफाइनरी भी शामिल है और यूरोपीय देशों की बढ़ती दखलअंदाज़ी के साथ मॉस्को अपने पश्चिमी,दक्षिणी और पूर्वी मोर्चों पर एक साथ दबाव का सामना कर रहा है। मॉस्को, तेहरान और बीजिंग के बीच 24 घंटे की तेज़ शटल शायद तीनों दिशाओं में रूस के खास पार्टनर्स के साथ स्ट्रेटेजी को कोऑर्डिनेट करने के लिए डिज़ाइन की गई होगी। खामोशी बहुत कुछ कहती है वह क्या? उस बात को जाने तो शायद सबसे ज़्यादा बताने वाली बात वह है जो नहीं कही गई है। रूस,ईरान और चीन में से किसी ने भी इस फ़्लाइट के लिए कोई ऑफ़िशियल वजह नहीं बताई है। किसी डेलीगेशन का ऐलान नहीं किया गया,कोई मकसद नहीं बताया गया और कोई "स्टैंडर्ड डिप्लोमैटिक नोटिफ़िकेशन"जारी नहीं किया गया। यह नॉर्मल प्रोटोकॉल से हटकर है। जहाँ ऐसे विज़िट के साथ आम तौर पर पब्लिक स्टेटमेंट होते हैं कि कौन ट्रैवल कर रहा है और क्यों?जानकारी न होने से इस बात के अंदाज़े तेज़ हो गए थे कि उसमें क्या या कौन था? कुछ ऑब्ज़र्वर ने नोट किया है कि इस क्लासिफ़िकेशन वाले एयरक्राफ़्ट को डिप्लॉय करने से पता चलता है कि उसमें कोई बहुत सीनियर ऑफ़िसर मौजूद था। शायद डिफ़ेंस मिनिस्टर सर्गेई शोइगु या उससे ऊपर के लेवल का यह देखते हुए कि पुतिन खुद पहले भी हाई-स्टेक्स मिशन के लिए इस तरह के एयरक्राफ़्ट का इस्तेमाल कर चुके हैं।
इस सबका क्या मतलब है वह जाने तो ईरान के ख़िलाफ़ बड़े US स्ट्राइक से एक दिन पहले रूस के “डूम्सडे प्लेन” को डिप्लॉय करने से कई सिग्नल मिलते हैं। यह दिखाता है कि मॉस्को मैक्सिमम टेंशन के समय तेहरान के साथ स्ट्रेटेजिक अलाइनमेंट का सिग्नल देने को तैयार है। इससे पता चलता है कि रूस को US मिलिट्री प्लान के बारे में पहले से पता था या कम से कम स्ट्राइक के टाइम का अंदाज़ा था और यह रूस,ईरान और चीन के बीच बढ़ते कोऑर्डिनेशन को दिखाता है क्योंकि वे तेज़ी से बदलते इंटरनेशनल माहौल में आगे बढ़ रहे हैं। चाहे मिशन में इंटेलिजेंस-शेयरिंग,मिलिट्री कोऑर्डिनेशन, क्राइसिस डिप्लोमेसी या ये सब शामिल हो सकता है एक बात साफ़ है कि जब रूस का “डूम्सडे प्लेन” आसमान में उड़ता है तो दुनिया ध्यान देती है और जब यह एक ही दिन में मॉस्को से तेहरान और फिर बीजिंग का रास्ता अपनाता है। ईरानी टारगेट पर अमेरिकी बम गिरने से कुछ घंटे पहले तो मैसेज साफ़ होता है। भले ही कोई यह बताने को तैयार न हो कि वह क्या है? (Photos Courtesy Social media and AI)
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