*जॉर्जिया में ठुकराया,भारत में गले लगाया: क्या AI डेटा सेंटर्स की प्यास बुझाएगा हिंदुस्तान का पानी?*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*जॉर्जिया में ठुकराया,भारत में गले लगाया: क्या AI डेटा सेंटर्स की प्यास बुझाएगा हिंदुस्तान का पानी?*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई






(मुंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई)अमेरिका का सबक,जब डेटा सेंटर ने सुखा दिया पूरा शहर। अमेरिका के जॉर्जिया राज्य के फेयेटविले शहर में रहने वाले लोगों ने पिछले साल एक अजीब समस्या का सामना किया। उनके घरों में पानी का दबाव अचानक गिर गया। नल से पानी आना ही बंद हो गया और जो थोड़ा-बहुत आ रहा था। वह भी उपयोग लायक नहीं था। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से पानी कम इस्तेमाल करने की अपील की लेकिन असली वजह कुछ और थी ।


Blackstone की स्वामित्व वाली कंपनी QTS यानि Quality Technology Services का विशाल डेटा सेंटर प्रोजेक्ट। जांच में पता चला कि इस डेटा सेंटर ने दो औद्योगिक पानी के कनेक्शन लगा रखे थे। एक तो प्रशासन को बिना बताएं और दूसरा बिलिंग सिस्टम से जुड़ा ही नहीं था। नतीजा? कंपनी ने लगभग 29 मिलियन गैलन यानि करीब 11 करोड़ लीटर पानी बिना बिल दिए इस्तेमाल कर लिया है यानि 44 ओलंपिक स्विमिंग पूल के बराबर!। जब मामला सामने आया तो QTS पर $147,474 का बिल बनाया गया लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि कंपनी पर कोई जुर्माना नहीं लगाया गया। वाटर सिस्टम की निदेशक वैनेसा टाइगर्ट ने साफ कहा कि वे हमारे सबसे बड़े ग्राहक हैं और हमें पार्टनर बने रहना है। इसे कस्टमर सर्विस कहते हैं। इस घटना के बाद फेयेटविले सिटी काउंसिल ने नए डेटा सेंटर्स के निर्माण पर प्रतिबंध लगा दिया।



भारत में billions of dollars की investment लेकिन क्या कीमत?जिस AI इंफ्रास्ट्रक्चर को अमेरिका में नकार दिया गया था। उसे भारत खुशी-खुशी अपना रहा है। Microsoft,Amazon, Google, AirTrunk जैसी दिग्गज कंपनियाँ भारत के अलग-अलग शहरों में AI डेटा सेंटर्स लगाने जा रही हैं।




कितना बड़ा है निवेश? उस पर एक नजर डालें तो और वह कंपनी देखें व उनके निवेश के बारे में जाने तो Amazon 35 बिलियन डॉलर आगामी साल 2030 तक। Microsoft 17.5 बिलियन डॉलर अगले 4 साल में। Google15 बिलियन डॉलर। AirTrunk Blackstone-backed,30 बिलियन डॉलर आगामी साल 2030 तक। कुल मिलाकर 67.5 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश भारत के इतिहास में किसी एक सेक्टर में सबसे बड़ा पूंजी प्रवाह। Microsoft की हैदराबाद में "हाइपरस्केल क्लाउड रीजन" मिड-2026 में शुरू हो रही है। चौंकाने वाले आंकड़े देखें तो कितना बिजली और पानी खाएंगे ये डेटा सेंटर्स?पानी की खपत के मद्देनजर एक 100 मेगावाट डेटा सेंटर प्रतिदिन लगभग 20 लाख लीटर पानी खपत करता है। भारत के डेटा सेंटर सालाना 37.5 अरब लीटर पानी खपत कर सकते हैं। जो 7-8 लाख लोगों की सालाना ज़रूरत के बराबर है। साल 2025 में भारत के डेटा सेंटरों ने 150 अरब लीटर पानी खपत किया था। जो आगामी साल 2030 तक 358 अरब लीटर से अधिक हो सकता है।



Morgan Stanley की रिपोर्ट के अनुसार आगामी साल 2028 तक वैश्विक AI डेटा सेंटर पानी की खपत 1,068 अरब लीटर सालाना तक पहुँच सकती है। साल 2024 के मुकाबले 11 गुना वृद्धि। बिजली की खपत के मद्देनजर भारत की डेटा सेंटर क्षमता साल 2020 में 375 मेगावाट से बढ़कर साल 2025 में 1,500 मेगावाट हो गई थी। जो आगामी साल 2030 तक यह क्षमता 4.1 GW से 8.3 GW के बीच पहुँच सकती है। Economic Survey 2025-26 ने चेतावनी दी है कि AI डेटा सेंटर "तलवार की दो धार" हैं। ये भारी मात्रा में बिजली और पानी खपत करते हैं। भारत के लिए खतरे की घंटी है कैसे? वह जाने तो पानी की किल्लत वाले इलाकों में डेटा सेंटर प्रस्थापित करना। लगभग 75% भारतीय डेटा सेंटर पहले से ही पानी की कमी वाले क्षेत्रों में स्थित हैं।


बेंगलुरु के डेटा सेंटर शहर के सबसे पानी-तनावग्रस्त पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी इलाकों में केंद्रित हैं। हैदराबाद में साल 2027 तक 870 मिलियन लीटर प्रतिदिन पानी की कमी होने का अनुमान है। S&P Global की भविष्यवाणी इस दशक में 60-80% भारतीय डेटा सेंटर उच्च जल-तनाव का सामना करेंगे। बिजली ग्रिड पर दबाव के बारे में जाने तो Economic Survey ने उत्तरी वर्जीनिया (USA) की घटना का ज़िक्र किया। जहां 2024 में 1,500 मेगावाट डेटा सेंटर लोड अचानक गिरने से पूरे सिस्टम में वोल्टेज और फ्रीक्वेंसी में बड़ी गड़बड़ी आ गई थी। AI डेटा सेंटर पारंपरिक डेटा सेंटरों से कहीं अधिक संसाधन खपत करते हैं। जेनरेटिव AI सिस्टम को सघन GPU क्लस्टर और उन्नत कूलिंग सिस्टम की ज़रूरत होती है। "डेटा हीट आइलैंड"का प्रभाव देखें तो कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के अध्ययन के अनुसार डेटा सेंटर शुरू होने के बाद आसपास के क्षेत्र का तापमान औसतन 2.07°C बढ़ जाता है। यह गर्मी का प्रभाव सुविधा से 10 किलोमीटर तक फैल सकता है।


दुनिया भर में 34 करोड़ से अधिक लोग इस दायरे में रहते हैं। गौरतलब है कि भारत की कमजोर स्थिति है। भारत में दुनिया की 18% आबादी रहती है लेकिन केवल 4% ताजे पानी के संसाधन हैं। भारत दुनिया का 20% डेटा जनरेट करता है लेकिन केवल 3% डेटा सेंटर क्षमता रखता है। गूगल,मेटा,अमेज़न जैसे एप्स के चिली,मैक्सिको,जॉर्जिया (USA) और स्कॉटलैंड में पहले ही डेटा सेंटरों के पानी के दुरुपयोग को लेकर गंभीर चिंताएँ उठ चुकी हैं। क्या है रास्ता?वह देखें तो केंद्र सरकार ने उन्नत कूलिंग तकनीकों डायरेक्ट-टू-चिप लिक्विड कूलिंग, एडियाबेटिक कूलिंग,इमर्शन सिस्टम को अपनाने की बात कही है। विशेषज्ञ ट्रीटेड वेस्टवॉटर के उपयोग,वॉटर यूसेज की अनिवार्य रिपोर्टिंग और रेनवॉटर हार्वेस्टिंग पर जोर दे रहे हैं लेकिन सवाल अभी भी बरकरार है । क्या भारत billions of dollars की investment के साथ-साथ अपने जल और ऊर्जा संसाधनों की भी रक्षा कर पाएगा?"



AI data centres are double-edged swords" — Economic Survey 2025-26 । (Photos Courtesy Social media)

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