*क्या स्पेस 'एयरबैग' बचाएगा पृथ्वी को खतरनाक सौर तूफानों से? जानें StormWall योजना के बारे में सब कुछ*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*क्या स्पेस 'एयरबैग' बचाएगा पृथ्वी को खतरनाक सौर तूफानों से? जानें StormWall योजना के बारे में सब कुछ*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई)वैज्ञानिकों ने पृथ्वी को विनाशकारी सौर तूफानों से बचाने के लिए एक बेहद दिलचस्प और महत्वाकांक्षी योजना ''स्टॉर्मवॉल'' StormWall पेश की है। जिसमें स्कूल बस के आकार के उपग्रह और अंतरिक्ष में नमक जैसे रसायनों का छिड़काव कर एक विशाल प्लाज्मा दीवार बनाई जाएगी। क्या है यह अनोखी योजना?वह जाने तो ''स्टॉर्मवॉल'' नामक इस अवधारणा को बोस्टन यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के वैज्ञानिकों की एक टीम ने''स्पेस वेदर''जर्नल में प्रकाशित किया है। यह विचार पृथ्वी की प्राकृतिक ढाल यानि मैग्नेटोस्फीयर (चुंबकीय क्षेत्र) को अस्थायी रूप से मजबूत करने का है। ठीक उसी तरह जैसे किसी गाँव में बाढ़ से बचने के लिए दीवार बनाई जाती है।
इसके प्रमुख वैज्ञानिक ब्रायन वॉल्श कहते हैं कि हम भविष्यवाणी कर सकते हैं लेकिन इससे बेहतर है कि हम एक सुरक्षा दीवार बनाएं। कैसे काम करेगा यह "स्टॉर्मवॉल"?वह देखें तो यह प्रणाली छह उपग्रहों की एक टोली पर आधारित है। जिन्हें भू-समकालिक कक्षा लगभग 36,000 किलोमीटर ऊपर में स्थापित किया जाएगा। जब भी कोई भीषण कोरोनल मास इजेक्शन (CME) एक प्रकार का सौर तूफान पृथ्वी की ओर बढ़ता हुआ दिखे तो ये उपग्रह सक्रिय हो जाएंगे। रासायनिक छिड़काव के मद्देनजर ये उपग्रह बेरियम,लिथियम,सोडियम या कैल्शियम जैसी प्रतिक्रियाशील गैसों का एक विशाल भंडार अंतरिक्ष में छोड़ेंगे। प्लाज्मा दीवार का निर्माण के हिसाब से सूर्य की रोशनी के संपर्क में आते ही यह गैस तुरंत आयनित होकर एक विशाल प्लाज्मा बादल में बदल जाएगी। जो एक''एयरबैग''की तरह काम करेगी। ऊर्जा को कम करना । यह कृत्रिम प्लाज्मा दीवार ''मैग्नेटिक रिकनेक्शन''नामक प्रक्रिया को बाधित करेगी। जिससे सौर तूफान की ऊर्जा पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश नहीं कर पाएगी और उसका प्रभाव कम हो जाएगा। यह तूफान को रोकती नहीं बल्कि उसके विनाशकारी प्रभाव को काफी हद तक कम कर देती है।
कितना कारगर है यह उपाय?उसके मद्देनजर शोध कर्ताओं ने कंप्यूटर सिमुलेशन के जरिए मई 2024 के उस भीषण भू-चुंबकीय तूफान पर इसका परीक्षण किया गया था। जो पिछले 20 वर्षों में सबसे शक्तिशाली था। नतीजे चौंकाने वाले थे। यह प्रणाली सौर तूफान की तीव्रता (Geomagnetic fallout) को 84% तक कम कर सकती है। एक अन्य महत्वपूर्ण पैमाने (Auroral Electrojet Index) पर इसकी तीव्रता 50% से अधिक घट गई। चुनौतियाँ और लागत के हिसाब से हालांकि यह विचार अत्याधुनिक है लेकिन इसे वास्तविकता बनाने में कई बड़ी बाधाएँ हैं। भारी लागत के हिसाब से इस परियोजना पर अरबों डॉलर खर्च हो सकते हैं। एक अनुमान के अनुसार एक बड़े तूफान से 2.4 से 3.4 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है इसलिए शोधकर्ताओं का मानना है कि यह निवेश सार्थक हो सकता है। एकल-उपयोग प्रणाली के मुताबिक सबसे बड़ी कमी यह है कि एक बार गैस छोड़ने के बाद उपग्रह बेकार हो जाएंगे। हर तूफान के लिए नए उपग्रह या रिफिलिंग की आवश्यकता होगी। विशाल मात्रा में करीब 4,36,000 किलोग्राम (लगभग 400 टन) सामग्री को अंतरिक्ष में भेजना होगा। जो एक विशाल चुनौती है।
अंतर्राष्ट्रीय सहमति के मद्देनजर यह प्रणाली पूरी पृथ्वी की रक्षा करेगी इसलिए इसे किसी एक देश के बजाय अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से ही संचालित किया जा सकता है। अब देखें क्यों है यह योजना जरूरी? वह जाने तो सन् 1859 में''कैरिंगटन इवेंट'' नामक एक सौर तूफान ने दुनिया भर की टेलीग्राफ प्रणाली को चरमरा दिया था। आज की डिजिटल दुनिया में जहाँ हर चीज़ उपग्रहों,GPS और बिजली ग्रिड पर निर्भर है। इतना ही तीव्र तूफान पूरी सभ्यता को पाषाण युग में वापस ले जा सकता है हालांकि यह अभी एक सैद्धांतिक अवधारणा है। ''स्टॉर्मवॉल'' मानवता के लिए एक ''बीमा पॉलिसी'' की तरह है। यह हमें सूर्य के प्रकोप से निपटने का एक सक्रिय तरीका देती है। न कि केवल भविष्यवाणी करके चुपचाप प्रतीक्षा करने का। वैज्ञानिक अब इसकी लागत कम करने व बेहतर सामग्री खोजने और इसके दुष्प्रभावों को समझने के लिए और शोध कर रहे हैं। (Photos Courtesy Social media and AI)
~ब्यूरो रिपोर्ट स्पर्श देसाई √•Metro City Post• Digital World• #StormWall #SolarStorm #SpaceWeather #EarthProtection #PlasmaShield #GeomagneticStorm #ScienceNews #SpaceTechnology #PlanetaryDefense #HindiNews






Comments