*ISRO में वैज्ञानिकों के इस्तीफ़ों का संकट:क्या देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम को खतरा?*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*ISRO में वैज्ञानिकों के इस्तीफ़ों का संकट:क्या देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम को खतरा?*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
(मुंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई) ISRO के 120 से अधिक वैज्ञानिकों ने दिए इस्तीफ़े दौरान सरकार ने बदले नियम। गगनयान मिशन के बीच ISRO में वैज्ञानिकों का पलायन क्या है वजह?ISRO Scientists Exodus100+वैज्ञानिकों के जाने से सरकार ने कसी नकेल। प्राइवेट सेक्टर का लालच या नीतिगत असफलता?ISRO के बड़े वैज्ञानिकों के इस्तीफ़े। Gaganyaan पर खतरा? ISRO के टॉप साइंटिस्टों ने छोड़ा साथ, सरकार ने रोकी राह।ISRO में संकट के मद्देनजर 120 वैज्ञानिकों ने छोड़ा संस्थान,विशेषज्ञ बोले कि बड़ा नुकसान।
Space Startups का कमाल या सरकारी नौकरी की मजबूरी? ISRO में वैज्ञानिकों के इस्तीफ़े । कहीं BSNL जैसा हाल ISRO का न हो जाए?100+ वैज्ञानिकों के इस्तीफ़े पर उठे सवाल। ISRO के 120 साइंटिस्टों ने ठोका ताला। सरकार ने इस्तीफ़ा स्वीकारने के नियम बदले। Brain Drain in ISRO क्या प्राइवेट कंपनियाँ खींच रही हैं देश के बेहतरीन दिमाग़?भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने हाल के महीनों में अपने शीर्ष वैज्ञानिकों और तकनीकी अधिकारियों के एक बड़े पलायन को देखा है। सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में 100 से 120 वैज्ञानिकों ने ISRO से इस्तीफा दिया है। इस खबर ने देश के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रमों, विशेष रूप से गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन पर गहरी चिंता पैदा कर दी है। क्यों छोड़ रहे हैं वैज्ञानिक ISRO? वह जाने तो इस्तीफ़ों की इस लहर के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। जिसमें प्राइवेट स्पेस सेक्टर का तेज़ी से बढ़ता प्रभाव सबसे अहम है । साल 2020 में भारत सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोला। जिसके बाद से 400 से अधिक स्पेस स्टार्टअप्स ने जन्म लिया है । इन कंपनियों ने लगभग 500 मिलियन डॉलर का निवेश आकर्षित किया है।
ये स्टार्टअप ISRO के अनुभवी वैज्ञानिकों को बेहतर वेतन,स्टॉक ऑप्शन,तेज़ करियर ग्रोथ और नेतृत्व के अवसर देकर लुभा रहे हैं। किन बड़े नामों ने दिया इस्तीफा? वह देखें तो रिपोर्ट्स के अनुसार इन इस्तीफ़ों में कई बड़े नाम शामिल हैं। विक्टर जोसेफLVM-3 (गगनयान मिशन के लिए उपयोग होने वाला रॉकेट) प्रोजेक्ट के निदेशक,स्पा डेक्स प्रोजेक्ट के निदेशक (URSC से) और आदित्य रल्लपल्ली चंद्रयान-3 मिशन के प्रमुख वैज्ञानिकों में से एक जिन्होंने लैंडिंग सीक्वेंस को वैलिडेट करने में अहम भूमिका निभाई । सरकार की प्रतिक्रिया के मद्देनजर नए नियम और बयानबाजी। इस संकट को देखते हुए अंतरिक्ष विभाग (DoS) ने 14 जुलाई 2026 को एक आदेश जारी किया है। इस आदेश में ग्रुप 'A' के वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों के इस्तीफा या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के आवेदनों को''नियमित प्रक्रिया''के तहत स्वीकार करने पर रोक लगा दी गई है। खासकर उन वैज्ञानिकों के लिए जो गगनयान या अन्य महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़े हैं। अब सभी ऐसे आवेदन DoS को भेजे जाने अनिवार्य हैं। जहाँ अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
ISRO अध्यक्ष वी.नारायणन ने इस्तीफ़ों को स्वीकार किया लेकिन इसे किसी बड़े संकट के रूप में नहीं देखा। उन्होंने कहा कि हाँ,बहुत से लोग जाते हैं लेकिन यह हर संगठन का हिस्सा है अगर कोई जा रहा है तो कोई और जिम्मेदारी लेगा। केंद्रीय मंत्री डॉ.जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह निर्णय ''पूरी तरह से प्रशासनिक''है ताकि''अधिक परिपक्व स्तर''पर निर्णय लिए जा सकें। क्या यह चिंता का विषय है? उसके मद्देनजर यह संख्या ISRO के कुल 14,600+ कर्मचारियों की तुलना में छोटी हो सकती है लेकिन सबसे बड़ी चिंता''विशेषज्ञता''के जाने की है। UR Rao Satellite Centre (बेंगलुरु) से लगभग 80 और विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (तिरुवनंतपुरम) से 20 वैज्ञानिकों ने इस्तीफा दिया है ।
इन केंद्रों का राष्ट्रीय मिशनों में सीधा योगदान है। विशेषज्ञों का मानना है कि गगनयान जैसे मिशनों में सालों की मेहनत और विशेषज्ञता की जगह भरना इतना आसान नहीं है। यह स्थिति इस सवाल को जन्म देती है कि क्या सरकार की प्राइवेटाइजेशन-अनुकूल नीतियाँ जिन्होंने BSNL जैसे संस्थानों की स्थिति खराब की, ISRO के साथ भी ऐसा ही खेल तो नहीं खेल रही हैं? हालाँकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल प्रशासनिक नियमों से यह समस्या हल नहीं होगी। इसके लिए ISRO को एक प्रतिस्पर्धी नियोक्ता बनाना होगा।(Photos Courtesy Social media and AI)
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