*अमेरिका को ललकारने वाले नेताओं का अंजाम: डॉलर से खिलवाड़ से लेकर CIA की साजिशों तक की कहानी* रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*अमेरिका को ललकारने वाले नेताओं का अंजाम: डॉलर से खिलवाड़ से लेकर CIA की साजिशों तक की कहानी* रिपोर्ट स्पर्श देसाई
(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई) इतिहास गवाह है कि जब भी किसी नेता ने अमेरिकी वर्चस्व को चुनौती दी। उसे भारी कीमत चुकानी पड़ी है। कुछ को फांसी दी गई । कुछ की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई तो कुछ साजिशों के बावजूद बच निकले। पैटर्न साफ है तेल,डॉलर और भू- राजनीतिक दबदबा इन कहानियों की रीढ़ हैं। अमेरिका को चुनौती देने वाले ये नेता कैसे बने अपनी हिमाकत का शिकार?सद्दाम,गद्दाफी,संकारा से लेकर कास्त्रो तक की पूरी दास्तान ।
उसमें सबसे पहला नाम सद्दाम हुसैन का आता है। इराक के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन ने अक्टूबर 2000 में ऐतिहासिक कदम उठाया। इराकी तेल की बिक्री डॉलर की जगह यूरो में शुरू कर दी थी। यह पेट्रोडॉलर सिस्टम पर सीधा हमला था। साल 1971 में डॉलर का सोने से संबंध खत्म होने के बाद अमेरिका ने तेल को डॉलर से जोड़कर अपनी मुद्रा का दबदबा बरकरार रखा था। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के पूर्व चेयरमैन एलन ग्रीनस्पैन ने अपनी किताब में खुद स्वीकारा"इराक युद्ध बड़े पैमाने पर तेल के बारे में था"। साल 2003 में अमेरिकी आक्रमण के बाद न सिर्फ सद्दाम की सरकार गिरीं थी बल्कि इराकी तेल व्यापार को फिर से डॉलर में वापस लाया गया था। साल 2006 में सद्दाम को फांसी दे दी गई। आज भी इराक खूनी संघर्ष और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है। जहां 200,000 से अधिक नागरिक मारे गए और 9 मिलियन से अधिक विस्थापित हुए हैं।
~गद्दाफी का सुनहरा वह सपना था। लीबिया के नेता मुअम्मर गद्दाफी ने और बड़ा सपना देखा था। पूरे अफ्रीका के लिए सोने से समर्थित ''गोल्ड दीनार'' मुद्रा लाने की योजना। इससे अफ्रीकी देश तेल-गैस का व्यापार डॉलर या यूरो के बिना कर सकते थे। जिससे अमेरिकी और यूरोपीय वित्तीय वर्चस्व को बड़ा झटका लगता। हिलेरी क्लिंटन के लीक ईमेल से पता चला कि फ्रांस को गद्दाफी की इस योजना से बड़ा खतरा महसूस हुआ क्योंकि कई फ्रांसीसी उपनिवेश रहे अफ्रीकी देश CFA फ्रैंक से अलग हो सकते थे। साल 2011 में NATO के हस्तक्षेप के बाद गद्दाफी की हत्या कर दी गई और तब से लीबिया आज तक अराजकता में डूबा है।
~संकारा:'अफ्रीका का चे ग्वेवारा',बुर्किना फासो के क्रांतिकारी नेता थॉमस संकारा ने IMF और विश्व बैंक के कर्ज को खारिज कर दिया था। कहा कि यह उपनिवेशवाद की विरासत है। उन्होंने देश का नाम "अपर वोल्टा"से बदलकर"बुर्किना फासो"यानि ईमानदार लोगों की धरती रखा था। साल 1987 में अफ्रीकी एकता संगठन की बैठक में उन्होंने कहा कि अगर बुर्किना फासो अकेले कर्ज चुकाने से इनकार करता है तो मैं अगली बैठक में नहीं रहूंगा लेकिन सबके साथ हम चुकाने से बच सकते हैं। दो महीने बाद15 अक्टूबर 1987 को उनके करीबी दोस्त ब्लेज कॉम्पाओरे ने तख्तापलट कर उनकी हत्या करा दी। कहा जाता है कि विदेशी ताकतों का समर्थन इस हत्या के पीछे था।
~कास्त्रो: 638 हत्याकांडों से बचे थे । क्यूबा के नेता फिदेल कास्त्रो इस सूची में सबसे अनोखा नाम हैं। CIA के पूर्व काउंटरइंटेलिजेंस प्रमुख फैबियन एस्केलांटे के अनुसार कास्त्रो के खिलाफ 638 हत्या के लिए हमले हुए थे। CIA ने माफिया के साथ मिलकर उन्हें जहरीली गोलियां देने की साजिश रची थी। जहरीले सिगार,यहां तक कि उनके खाने-पानी में जहर डालने की योजनाएं बनाईं गई थी लेकिन कास्त्रो साल 2016 में 90 वर्ष की आयु में स्वाभाविक मौत से अपने बिस्तर पर शांत हुए। रहस्यमयी मौतें और संदिग्ध हालात के मद्देनजर कुछ मामले आज भी रहस्य बने हुए हैं। जैसे
~लाल बहादुर शास्त्री: साल 1966 में ताशकंद में उनकी मौत दिल का दौरा बताई गई लेकिन पोस्टमार्टम नहीं हुआ। उनकी असामयिक मृत्यु को लेकर आज भी सवाल उठते हैं।
~यासर अराफात: फलस्तीनी नेता की साल 2004 में मौत के बाद स्विस लैब ने उनके शरीर में पोलोनियम (रेडियोधर्मी पदार्थ) पाया। जिससे विषाक्तता की आशंका जताई गई।
~हूगो शावेज़: वेनेजुएला के राष्ट्रपति ने अमेरिकी कंपनियों का राष्ट्रीयकरण किया। साल 2013 में कैंसर से मौत से पहले उन्होंने खुद आशंका जताई कि उन्हें जानबूझकर बीमार किया गया है।
~निकोलस मादुरो: वेनेजुएला के मौजूदा राष्ट्रपति अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद डटे हैं और वैकल्पिक मुद्राओं में तेल बेचकर अमेरिकी दबाव को नाकाम करने की कोशिश कर रहे हैं।
~इमरान खान: पाकिस्तान के पूर्व PM ने अमेरिकी दखल को खारिज किया और सत्ता गंवाने के बाद जेल की सजा काट रहे हैं। सिर्फ टिप ऑफ आइसबर्ग के मद्देनजर अमेरिका सिर्फ इन्हीं नेताओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता। CIA ने इतिहास में कई देशों में सरकारें गिराईं थी।
उसमें ईरान के साल 1953 में लोकतांत्रिक PM मोहम्मद मोसद्देक को हटाया था। ग्वाटेमाला में साल1954 राष्ट्रपति हाकोबो अरबेंस को उखाड़ा था। कांगो में साल1960 में PM पैट्रिस लुमुम्बा की CIA की मदद से हत्या की थी।
डोमिनिकन गणराज्य में साल 1961 में राष्ट्रपति ट्रुजिलो की हत्या हुई थी। साउथ वियतनाम में साल1963 में राष्ट्रपति गो दिन्ह डिएम की हत्या हुई थी। ब्राजील में 1964 में राष्ट्रपति जोआओ गौलार्ट को सैन्य तख्तापलट के जरिए हटाया गया था और चिली में साल1973 में राष्ट्रपति साल्वादोर अलेंदे की हत्या और पिनोशे की तानाशाही स्थापित हुई थी। यह पूरी कहानी''अमेरिकी हितों के खिलाफ जाने की कीमत''बताती है हालांकि कास्त्रो और मादुरो जैसे कुछ उदाहरण यह भी दिखाते हैं कि डटे रहने वालों का डटना कभी-कभी सफल होता है लेकिन कितने नेताओं के साथ ऐसा हुआ है? यह इतिहास का सबसे बड़ा सबक है।( Photos Courtesy Social media and AI)
~ब्यूरो रिपोर्ट स्पर्श देसाई √•Metro City Post•Digital World•
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