*जेम्स वेब टेलीस्कोप की बड़ी खोज: बीटा पिक्टोरिस प्रणाली में छिपा तीसरा विशाल ग्रह 'बीटा पिक्टोरिस डी'*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*जेम्स वेब टेलीस्कोप की बड़ी खोज: बीटा पिक्टोरिस प्रणाली में छिपा तीसरा विशाल ग्रह 'बीटा पिक्टोरिस डी'*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई)नासा के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) ने एक अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। वैज्ञानिकों ने पृथ्वी से 63 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित एक युवा तारा मंडल में एक विशाल छिपे हुए ग्रह का पता लगाया है। 'बीटा पिक्टोरिस डी' (Beta Pictoris d) नामक यह गैसीय दानव ग्रह बृहस्पति (हमारे सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह) से लगभग दोगुना विशाल है और अब तक सीधे तौर पर (डायरेक्ट इमेजिंग) देखे गए सबसे कम द्रव्यमान वाले एक्सोप्लैनेट्स में से एक है। बीटा पिक्टोरिस तारा मंडल खगोलविदों के लिए ग्रहों के निर्माण को समझने का एक प्रमुख लक्ष्य रहा है। यह तारा मात्र 23 मिलियन वर्ष पुराना है। जो हमारे 4.5 अरब वर्ष पुराने सूर्य की तुलना में बिल्कुल शैशवावस्था में है। इससे पहले वैज्ञानिक इसी मंडल में दो विशाल ग्रहों (बीटा पिक्टोरिस बी और सी) को खोज चुके हैं। जिनका द्रव्यमान लगभग बृहस्पति के 8.7 से 10 गुना तक है। नया खोजा गया 'डी' ग्रह अपने साथियों की तुलना में काफी छोटा (मात्र 2.4 गुना बृहस्पति) है। जिससे यह और भी खास हो जाता है। कैसे हुई यह आकस्मिक खोज?उस बात को जाने तो यह खोज किसी चमकीले बिंदु या सीधे फोटो से नहीं। बल्कि एक अनोखी तकनीक की बदौलत हुई। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय (सैन डिएगो) के शोधकर्ता एडान गिब्स की टीम मूल रूप से बीटा पिक्टोरिस बी ग्रह के वायुमंडल का अध्ययन कर रही थी। वेब टेलीस्कोप के निकट-अवरक्त स्पेक्ट्रोग्राफ (NIRSpec) के डेटा की जांच करते समय उन्हें एक अनपेक्षित रासायनिक 'हस्ताक्षर' मिला। कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) गैस की स्पष्ट अवशोषण रेखाएँ,जो किसी विशाल ग्रह के वायुमंडल की विशिष्ट पहचान हैं। चूंकि स्पेक्ट्रोग्राफी से गति भी मापी जा सकती है। टीम ने पुष्टि की कि यह रहस्यमयी वस्तु बीटा पिक्टोरिस तारे की परिक्रमा कर रही है। दिलचस्प बात यह है कि यह ग्रह पिछले 11 वर्षों से खगोलविदों की नजरों से बचा हुआ था क्योंकि यह अपने बड़े साथियों की तुलना में 100 गुना अधिक धुंधला है साथ ही यह तारे के चारों ओर फैली विशाल धूल और मलबे की डिस्क (धूल भरे कोहरे) के अंदर छिपा हुआ था। जिससे इसकी रोशनी बिखर जाती थी। गौरतलब है कि एडिनबर्ग विश्वविद्यालय (बेन सटलीफ के नेतृत्व) की एक और स्वतंत्र टीम ने भी यूरोपीय दक्षिणी वेधशाला (VLT) के 11 साल पुराने अभिलेखीय आंकड़ों में इसी ग्रह के संकेत खोजे,जिससे यह खोज दोहरी सत्यापन के साथ और मजबूत हो गई। कक्षा, वातावरण और महत्व के अनुसार बीटा पिक्टोरिस डी अपने तारे से लगभग 30 खगोलीय इकाई (AU) की दूरी पर स्थित है।
जो हमारे सौरमंडल में नेपच्यून की दूरी के बराबर है। यह तीनों ज्ञात ग्रहों में सबसे बाहरी कक्षा में है, फिर भी यह धूल भरी डिस्क के भीतरी किनारे के ठीक अंदर मौजूद है। वेब टेलीस्कोप के MIRI (मिड-इन्फ्रारेड इंस्ट्रूमेंट) ने आगे की जांच में इस ग्रह के वायुमंडल में जलवाष्प (पानी) और मीथेन गैस की मौजूदगी की भी पुष्टि की है। मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट की वैज्ञानिक एलिजाबेथ मैथ्यूज के अनुसार यह पहली बार है । जब इतने कम द्रव्यमान वाले सीधे-इमेज किए गए ग्रह का इतना विस्तृत रासायनिक स्पेक्ट्रम प्राप्त हुआ है। जो तापमान,संरचना और वायुमंडलीय गतिशीलता को समझने में मदद करेगा। यह खोज क्यों है मील का पत्थर? उसके मद्देनजर देखें तो बीटा पिक्टोरिस अब HR 8799 प्रणाली के बाद दूसरा ऐसा ज्ञात बाहरी तारा मंडल बन गया है। जहाँ तीन से अधिक ग्रहों को सीधे 'फोटो खींचकर' देखा गया है। इस तरह के बहु-ग्रह सिस्टम अत्यंत दुर्लभ हैं और वैज्ञानिकों को एक ही वातावरण में जन्मे ग्रहों की तुलनात्मक विकास यात्रा को समझने का अनोखा मौका देते हैं। इससे भी बड़ी बात यह है कि इस खोज ने ग्रहों को ढूंढने की एक नई पद्धति को सफलतापूर्वक साबित कर दिया है। सीधा चित्र (फोटो) लिए बिना, केवल उनके वायुमंडलीय रासायनिक 'फिंगरप्रिंट' (अवशोषण रेखाओं) के आधार पर। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की टीम की सदस्य जेन बिर्कबी ने कहा कि यह ग्रह हमारे साथ एक दशक से छिपन-छिपाई खेल रहा था लेकिन अब हम कह सकते हैं कि हमने तुम्हें पा लिया! वेब टेलीस्कोप अब इस ग्रह की कक्षा,मौसमी बदलावों और वायुमंडलीय परतों का और गहन अध्ययन करेगा। जिससे ब्रह्मांड में अन्य पृथ्वी-जैसे रहने योग्य ग्रहों की खोज के लिए नए मापदंड स्थापित करने में मदद मिलेगी। (Photos Courtesy Social media and AI)
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