*हिंद महासागर का 'नया शतरंज का बोर्ड': म्यांमार में अराकान आर्मी का उदय और भारत के सामने रणनीतिक दुविधा*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*हिंद महासागर का 'नया शतरंज का बोर्ड': म्यांमार में अराकान आर्मी का उदय और भारत के सामने रणनीतिक दुविधा*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई)जब पूरी दुनिया की नज़र आज यूक्रेन,गाजा और ईरान-इज़राइल जैसे युद्धों पर टिकी है। तब म्यांमार के पश्चिमी तट पर एक ऐसा बदलाव हो रहा है जो पूरे दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक नक्शे को फिर से लिख सकता है। अराकान आर्मी (Arakan Army - AA) एक संगठन जिसे कभी अनदेखा किया जाता था। अब म्यांमार के "रखाइन राज्य"(पूर्व में अराकान) के 17 में से 14 टाउनशिप पर पूर्ण नियंत्रण रखता है साथ ही यह राजधानी "सितवे"और चीनी निवेश वाले बंदरगाह शहर "क्याउकफ्यू"को घेरे हुए है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि यही हालात रहे तो रखाइन आने वाले समय में म्यांमार से अलग एक स्वतंत्र प्रशासन जैसा रूप ले सकता है। ऐतिहासिक आख्यान से आधुनिक युद्धक्षेत्र तक अराकान आर्मी का लक्ष्य महज़ आत्मनिर्णय से कहीं आगे है। इसके कमांडर-इन-चीफ तुन मायत नाइंग ने स्पष्ट किया है कि वे 1784 से पहले की स्थिति में लौटना चाहते हैं। जब अराकान साम्राज्य का विस्तार आज के बांग्लादेश के चटगांव से लेकर भारत के कोलकाता तक था। हाल ही में अराकान आर्मी से जुड़े एक धार्मिक नेता ने "स्वतंत्र रखाइन देश" का नक्शा जारी किया। जिसमें बांग्लादेश के चटगांव क्षेत्र को भी रखाइन का हिस्सा दिखाया गया । जिससे बांग्लादेश में हड़कंप मच गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अराकान आर्मी कई मोर्चों पर आगे बढ़ रही है। जिसके तहत दक्षिणी मोर्चा के मद्देनजर इरावदी नदी क्षेत्र में घुसपैठ। मध्य मोर्चा के हिसाब से बागो और मागवे क्षेत्रों की ओर बढ़ाव और उत्तरी मोर्चा के मद्देनजर चीन,सगाइंग और कछिन राज्यों तक विस्तार। युद्ध का बदलते स्वरूप को लेकर ड्रोन युग का आगमन हो चुका है। संघर्ष अब सिर्फ जमीनी लड़ाई तक सीमित नहीं है।
म्यांमार की सैन्य सरकार ने हवाई हमलों और नौसैनिक अभियानों में तेज़ी ला दी है। नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच रखाइन राज्य में 411 सशस्त्र संघर्ष हुए। जिनमें 136 हवाई हमलों में 288 लोग मारे गए। जवाब में अराकान आर्मी ने भी अपनी रणनीति बदल ली है। निगरानी ड्रोन,विस्फोटक ले जाने वाले ड्रोन और वायु रक्षा प्रणालियों का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। इससे म्यांमार की वायु सेना के लिए कई इलाकों में खुलेआम कार्रवाई करना मुश्किल हो गया है। यह असममित युद्ध (asymmetric warfare) म्यांमार के गृह युद्ध के स्वरूप को पूरी तरह बदल रहा है। नए शरणार्थी संकट का खतरा है। संघर्ष के बढ़ने से शरणार्थियों की एक नई लहर का खतरा पैदा हो गया है। म्यांमार की सेना "बुटीडॉंग" जैसे क्षेत्रों पर हवाई हमले कर रही है। जिससे आम नागरिक प्रभावित हो रहे हैं। बांग्लादेश पहले से ही अपनी सीमा पर बाड़ लगाने की तैयारी में है। यदि हालात और बिगड़े तो रोहिंग्या शरणार्थियों की एक नई लहर भारत और बांग्लादेश की सीमाओं पर दस्तक दे सकती है।
भारत की रणनीतिक दुविधा को जाने तो रखाइन भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसके पीछे मुख्य कारण है कलादान मल्टी-मोडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (KMTTP) परियोजना का उद्देश्य के मद्देनजर कोलकाता बंदरगाह को म्यांमार के "सितवे"बंदरगाह से जोड़ना फिर "कलादान नदी"के रास्ते और सड़क मार्ग से मिजोरम तक पहुँचना। निवेश को लेकर भारत ने इस परियोजना में 160 मिलियन डॉलर बंदरगाह विकास के लिए और 324 मिलियन डॉलर सड़क निर्माण के लिए निवेश किए हैं। स्थिति के मद्देनजर "सितवे"और "पालेतवा"के बंदरगाह तैयार हैं लेकिन सड़कें अभी निर्माणाधीन हैं और आगामी साल 2027 तक पूरी होने की उम्मीद है।
समस्या यह है कि यह संपूर्ण परियोजना "सितवे"से "पालेतवा"तक अराकान आर्मी के नियंत्रण वाले क्षेत्रों से होकर गुजरती है। जैसा कि रखाइन राज्य के वरिष्ठ राजनीतिज्ञ पे थान ने कहा। यदि परिवहन संचालन योजना के अनुसार शुरू होना है तो"सितवे"छोड़ने के बाद उन्हें अराकान आर्मी के नियंत्रण वाले क्षेत्रों से भारतीय सीमा तक गुजरना होगा इसलिए यह केवल AA/ULA की अनुमति से ही काम करेगा। वे AA से बातचीत किए बिना नहीं रह सकते। अच्छी बात यह है कि पे थान यह भी मानते हैं कि अराकान आर्मी का "कलादान परियोजना"को अवरुद्ध करने में कोई हित नहीं है क्योंकि इससे क्षेत्रीय विकास होगा और उन्हें टोल और कर एकत्र करने का अवसर मिलेगा। चीन की मौजूदगी यह प्रतिस्पर्धा है या सह-अस्तित्व?उसे समझे तो चीन भी इस इलाके पर कड़ी नज़र रखे हुए है। रखाइन में चीन के रणनीतिक हित जुड़े हैं। क्याउकफ्यू बंदरगाह जो चीन की "बेल्ट एंड रोड" पहल (BRI) का अहम हिस्सा हैं। चीन-म्यांमार तेल और गैस पाइपलाइन के मद्देनजर यह पाइपलाइन रखाइन से होकर गुजरती है। चीन-म्यांमार आर्थिक गलियारा (CMEC) है ।
यह कुनमिंग को रखाइन के बंदरगाहों से जोड़ता है। दिलचस्प बात यह है कि अराकान आर्मी ने चीन के साथ बातचीत शुरू कर दी है । विशेष रूप से "बेल्ट एंड रोड" रेलवे की सुरक्षा को लेकर। चीन अराकान आर्मी को एक तथ्यात्मक शासन प्राधिकरण (de facto governing authority) के रूप में मान्यता दे रहा है। भारत के सामने तीन विकल्प है। रणनीतिक विश्लेषकों के अनुसार भारत के सामने तीन मुख्य विकल्प हैं। वो समझे तो केवल म्यांमार की सैन्य सरकार के साथ खड़ा रहना।लाभ को लेकर मौजूदा राजनयिक संबंध बनाए रखना और हानि को लेकर जमीनी हकीकत से आँखें मूंदना। जब नियंत्रण पहले ही बदल चुका है। अराकान आर्मी के साथ खुलकर बातचीत करना जरूरी है। इसके लाभ के मद्देनजर कलादान परियोजना की सुरक्षा। चीन के मुकाबले बढ़त के जोखिम के हिसाब से म्यांमार सरकार को नाराज़ करना,रोहिंग्या मुद्दे पर नैतिक दुविधा। दोहरी रणनीति (वर्तमान में अपनाई जा रही है)। भारत ने दोनों पक्षों से संपर्क बनाए रखा है। मिजोरम सरकार ने अराकान आर्मी के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने पर ज़ोर दिया है।
हाल ही में भारत ने अराकान आर्मी सहित विभिन्न विद्रोही समूहों को नई दिल्ली में एक संगोष्ठी के लिए आमंत्रित किया। आगे का रास्ता और वास्तविकता का सामना के मद्देनजर सच्चाई यह है कि रखाइन राज्य में सत्ता का संतुलन पहले ही बदल चुका है। नेपीडो (म्यांमार की राजधानी) में हस्ताक्षरित समझौतों का क्रियान्वयन तेजी से उन ताकतों पर निर्भर होता जा रहा है जो नेपीडो के नियंत्रण से बाहर हैं। अराकान आर्मी अब समानांतर प्रशासन चला रही है। आठ प्रशासनिक जिले बनाए गए हैं। न्याय,शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग काम कर रहे हैं। रखाइन भाषा में स्कूली पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है। कस्बों के नाम ऐतिहासिक नामों में बदले जा रहे हैं।
भारत के लिए चुनौती सिर्फ़ राजनयिक नहीं है । यह रणनीतिक,आर्थिक और मानवीय है। कलादान परियोजना की दीर्घकालिक व्यवहार्यता अराकान आर्मी के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में स्थिरता, सुरक्षा और प्रशासनिक सहयोग पर निर्भर करती है। भारत को अब यह तय करना है। क्या वह केवल राजधानी नेपीडो में बैठी सरकार के साथ खड़ा रहेगा या जमीनी हकीकत को स्वीकार करते हुए रखाइन की नई शक्ति अराकान आर्मी के साथ संवाद का रास्ता खोलेगा?आपके हिसाब से भारत को क्या करना चाहिए? कमेंट में ज़रूर बताएँ।
(Photos Courtesy Social media and AI)
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