*ईरान के पूर्व राष्ट्रपति अहमदीनेजाद नजरबंदी और मोसाद से सांठगांठ के आरोपों में घिरे,कार्यालय ने न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट को बताया हॉलीवुड फिल्मी कहानी*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*ईरान के पूर्व राष्ट्रपति अहमदीनेजाद नजरबंदी और मोसाद से सांठगांठ के आरोपों में घिरे,कार्यालय ने न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट को बताया हॉलीवुड फिल्मी कहानी*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई) मध्य पूर्व की राजनीति में एक बड़ा हलचल मच गया है। अमेरिकी अखबार''न्यूयॉर्क टाइम्स''ने एक ऐसा दावा किया है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। रिपोर्ट के अनुसार ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद को उनके ही देश की खुफिया एजेंसी ने नजरबंद यानि हाउस अरेस्ट कर रखा है। इसके पीछे का कारण और भी चौंकाने वाला है । उन पर इजराइली खुफिया एजेंसी''मोसाद''के प्रमुख से गुप्त संपर्क रखने का आरोप लगा है हालाँकि अहमदीनेजाद के कार्यालय ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे''बेतुका और हॉलीवुड काल्पनिक''करार दिया है। क्या है पूरा मामला?'' न्यूयॉर्क टाइम्स''में छपी रिपोर्ट के मुताबिक इजराइली एजेंसी मोसाद ने पिछले कई सालों से अहमदीनेजाद को ईरान की मौजूदा सरकार के खिलाफ भड़काने और उन्हें सत्ता में वापस लाने की साजिश रची थी। रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं। गुप्त मुलाकात के मद्देनजर साल 2024 में हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के दौरान मोसाद प्रमुख ने अहमदीनेजाद से मुलाकात की थी। इसके बाद मोसाद ने इस बात की जानकारी अमेरिकी एजेंसी सीआईए (CIA) को भी दी। बचाव अभियान का नाटक के मद्देनजर रिपोर्ट के अनुसार जब ईरान और अमेरिका/इजराइल के बीच युद्ध शुरू हुआ साल 2026 की शुरुआत में तो इजराइल ने अहमदीनेजाद के घर पर हवाई हमला करवाया था और उनके अंगरक्षकों को मार गिराया था। इसके बाद मोसाद के एजेंट उन्हें एक गुप्त ठिकाने पर ले गए थे। इजराइल चाहता था कि अहमदीनेजाद ईरान का नया शासक बने ताकि अंदर से ही''शासन परिवर्तन''(रीजीम चेंज) किया जा सके हालाँकि अहमदीनेजाद ने कुछ दिनों बाद इजराइल की योजना पर भरोसा खो दिया और वहां से निकल गए। इसके बाद ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने उन्हें गिरफ्तार कर नजरबंद कर लिया। अहमदीनेजाद का पलटवार के हिसाब से इन गंभीर आरोपों पर खुद अहमदीनेजाद के कार्यालय ने एक बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट "पूरी तरह झूठी" है। उन्होंने इसे "हॉलीवुड की फिल्मों की उड़ाई गई कहानी" करार दिया और कहा कि यह ईरान के खिलाफ एक मनोवैज्ञानिक जंग यानि साइकोलॉजिकल वॉरफेयर है। जिसका मकसद जनता को भ्रमित करना और देश में फूट डालना है। क्या सच में नजरबंद हैं अहमदीनेजाद? वह जाने तो इस रिपोर्ट के अगले ही दिन 15 जुलाई ईरान के राज्य टीवी पर अहमदीनेजाद की एक तस्वीर सामने आई। जिसमें वे हाल ही में गुजरे सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह खामनई के जनाजे में शामिल हो रहे थे। इस वीडियो में वे पूरी तरह स्वतंत्र नजर आए और अन्य अधिकारियों से मिलते-जुलते दिखे। इससे ''नजरबंदी'' वाले दावे पर गहरे संदेह पैदा हो गए हैं हालाँकि न तो ईरान सरकार,न इजराइल और न ही अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर इस रिपोर्ट की पुष्टि की है। कौन हैं अहमदीनेजाद? एक विरोधाभासी शख्सियत के मद्देनजर इस पूरे मामले की विडंबना यह है कि अहमदीनेजाद वही व्यक्ति हैं। जिन्होंने साल 2005 से साल 2013 तक राष्ट्रपति रहते हुए मंच से"इजराइल को मिटा दो"(Death to Israel) के नारे लगाएं और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को तेज किया। वे इजराइल के सबसे बड़े विरोधियों में गिने जाते थे लेकिन सत्ता से बाहर होने के बाद वे सुप्रीम लीडर खामनई के खिलाफ हो गए और भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। हाल के वर्षों में उन्होंने खुद को''जनता का आवाज'' बताने की कोशिश की लेकिन उन्हें चुनाव लड़ने से भी रोक दिया गया। यही कारण है कि अगर वे वाकई विदेशी एजेंसियों के संपर्क में आए तो यह उनके पुराने ''कट्टर''चरित्र से बिल्कुल उलट है इसलिए कई विशेषज्ञ इस रिपोर्ट को सच नहीं मान रहे हैं फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि''न्यूयॉर्क टाइम्स'' की यह रिपोर्ट कितनी सच है। क्या यह कोई बड़ी जासूसी साजिश थी या फिर सिर्फ एक सूचना युद्ध इंफॉर्मेशन वॉर का हिस्सा है? अभी तो इतना ही कहा जा सकता है कि यह मामला काफी उलझा हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर और खुलासे हो सकते हैं। (Photos Courtesy Social media and AI)
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