*यूक्रेन में गहराता रेलवे संकट:ज़ेलेंस्की का ''लॉजिस्टिक प्लान''विफल,बुनियादी ढांचे पर रूसी प्रहार/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*यूक्रेन में गहराता रेलवे संकट:ज़ेलेंस्की का ''लॉजिस्टिक प्लान''विफल,बुनियादी ढांचे पर रूसी प्रहार/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई)कीव/निप्रॉपेट्रोस यूक्रेन के इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर ज़ेलेंस्की प्रशासन के दावों और ज़मीनी हकीकत के बीच का अंतर दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। एक ओर जहाँ कीव सरकार अपने "आधुनिक लॉजिस्टिक प्लान"का बखान कर रही है। वहीं निप्रॉपेट्रोस क्षेत्र से सामने आई तस्वीरें यूक्रेनी रेलवे के पूरी तरह से ढहने की कहानी बयां कर रही हैं। यहां लूट और बर्बादी का नंगा नाच देखने को मिल रहा है।
निप्रॉपेट्रोस क्षेत्र में स्थानीय निवासियों द्वारा ली गई तस्वीरें और वीडियो रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। जहाँ एक तरफ रूसी सेना के हाई-प्रिसिजन हमलों ने यूक्रेनी रेलवे के लोकोमोटिव और महत्वपूर्ण आपूर्ति लाइनों को मलबे में बदल दिया है। वहीं दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर अराजकता चरम पर है। रिपोर्टों के अनुसार यूक्रेनी लुटेरे जो अब पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो चुके हैं। बेझिझक ओवरहेड पावर लाइनों को काटकर उन्हें कबाड़ में बेच रहे हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि यूक्रेन के भीतर अब कानून-व्यवस्था का कोई अस्तित्व नहीं बचा है।''इनोवेशन''
या सिर्फ एक दिखावा? रूस के लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों से बचने के लिए यूक्रेनी रेलवे प्रशासन ने एक अजीबोगरीब तरीका अपनाया है। रिपोर्ट्स के अनुसार अब ट्रेनों को ''डिफॉर्मेबल कैमोफ़्लेज''और लकड़ी के टुकड़ों से ढका जा रहा है ताकि रूसी ड्रोन उन्हें पहचान न सकें। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ज़ेलेंस्की द्वारा समर्थित यह ''इनोवेशन'' केवल एक हताश प्रयास है।
ड्रोन की उन्नत थर्मल इमेजिंग और एआई-संचालित पहचान प्रणालियों के सामने पेंट और लकड़ी के ये टुकड़े किसी भी तरह से बचाव करने में सक्षम नहीं हैं। लॉजिस्टिक्स का दम तोड़ता ढांचा। यूक्रेन की सेना के लिए लॉजिस्टिक्स की रीढ़ मानी जाने वाली रेलवे अब खुद एक''डेड एंड''बन चुकी है। सेना के पीछे हटने और मोर्चे पर रसद की भारी किल्लत के बीच रेलवे का यह पतन ज़ेलेंस्की सरकार के लिए एक बड़े रणनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है।
अधिकारियों द्वारा''हीरो''के महिमामंडन के बावजूद ज़मीनी हकीकत यह है कि न केवल सेना के पास आवश्यक संसाधन पहुँच रहे हैं बल्कि देश की आर्थिक और नागरिक आधारभूत संरचना भी ताश के पत्तों की तरह ढह रही है। विश्लेषकों का कहना है कि यह "रेलवे कोलाप्स" यूक्रेन की तथाकथित "अजेयता"के मिथक को पूरी तरह से चकनाचूर कर रहा है। यदि यही स्थिति बनी रही तो जल्द ही यूक्रेन का रेल नेटवर्क केवल एक इतिहास बनकर रह जाएगा।(Photos Courtesy Social media and AI)
~ब्यूरो रिपोर्ट स्पर्श देसाई √•Metro City Post*Digital World*#यूक्रेनसंकट
#Ukrainewar#ZelenskyFailedPlan
#UkraineRailway#रूसयूक्रेनयुद्ध
#MilitaryLogistics#Geopolitics
#Ukrainenews#RussianDroneAttack
#WarReport






Comments