*मुंबई में सात दिनों की बारिश ने दिल्ली-बेंगलुरु का सालाना औसत भी पीछे छोड़ा,जानिए क्यों टूट रहे हैं रिकॉर्ड*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*मुंबई में सात दिनों की बारिश ने दिल्ली-बेंगलुरु का सालाना औसत भी पीछे छोड़ा,जानिए क्यों टूट रहे हैं रिकॉर्ड*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
(मुंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई) मुंबईवासियों के लिए जुलाई 2026 की शुरुआत एक ऐतिहासिक आपदा की तरह रही है। पिछले लगभग एक सप्ताह से जारी मूसलाधार बारिश ने शहर की जनजीवन की लगभग हर धड़कन को ठप कर दिया है। सड़कें नदियों में तब्दील हो गईं और रेलवे ट्रैक जलमग्न हो गए व हवाई अड्डे पर अराजकता का माहौल रहा लेकिन अब इस बारिश के थमने के संकेत मिलने शुरू हो गए हैं हालांकि राहत भरी सांस लेने से पहले एक और भारी बारिश की चपेट में आने की आशंका बनी हुई है। सात दिनों में पूरे जुलाई का बरसात का कोटा पूरा हो चुका है।
मुंबई की बारिश ने दिल्ली-बेंगलुरु को भी मात दी। मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक 30 जून से 6 जुलाई के बीच सांताक्रूज़ वेधशाला ने 988.8 मिमी बारिश दर्ज की है। यह आंकड़ा पूरे जुलाई महीने के सामान्य औसत 919.9 मिमी से भी अधिक है यानि महज एक हफ्ते में ही शहर ने पूरे महीने की बारिश पी ली। वहीं कोलाबा वेधशाला में इस दौरान 882.6 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। इस बारिश ने कई बड़े शहरों के सालाना औसत को भी पीछे छोड़ दिया है। दिल्ली का सालाना औसत लगभग 774 मिमी है। सांताक्रूज़ ने सात दिनों में दिल्ली की सालाना बारिश का 128% हिस्सा बरसा दिया। बेंगलुरु का सालाना औसत लगभग 986 मिमी है। सांताक्रूज़ का सात दिनों का कुल योग 988.8 मिमी बेंगलुरु के सालाना औसत से भी अधिक है। महाराष्ट्र का पुणे शहर का सालाना औसत लगभग 720 मिमी है। जिसे मुंबई ने महज एक हफ्ते में पीछे छोड़ दिया। 4 जुलाई सबसे बरसाती दिन रहा लेकिन 2005 की आपदा से दूर रहा। 4 जुलाई को सबसे भारी बारिश हुई। जब 24 घंटों में कोलाबा में 265.6 मिमी और सांताक्रूज़ में 227.7 मिमी पानी बरसा हालांकि यह आंकड़ा 26 जुलाई 2005 को सांताक्रूज़ में दर्ज 944 मिमी की ऐतिहासिक बारिश से काफी कम है। जिसने शहर में भयंकर बाढ़ लाई थी।
एल नीनो के बावजूद क्यों हुई रिकॉर्ड बारिश? इसकी वजह जाने तो विशेषज्ञों के अनुसार इस साल एल नीनो के सक्रिय होने के बावजूद इतनी भारी बारिश के पीछे कई कारण हैं। अरब सागर का बढ़ता तापमान के हिसाब से रिकॉर्ड उच्च समुद्री सतह तापमान ने अधिक वाष्पीकरण और नमी उपलब्ध कराई। दोहरी महासागरीय प्रणाली बंगाल की खाड़ी में सक्रिय कम दबाव वाले क्षेत्र ने अपना रास्ता बदला। जलवायु परिवर्तन के मद्देनजर एल नीनो के पारंपरिक सूखे के प्रभाव को जलवायु परिवर्तन तेजी से ओवरराइड कर रहा है।
इन सबने मिलकर मानसून के सक्रिय होने पर रिकॉर्ड तोड़ बारिश को जन्म दिया। बता दें कि इसी साल 2026 का मानसून सामान्य से लगभग दो सप्ताह देरी से आया था। बारिश के कहर के हिसाब से 350 पेड़ गिरे,13 मौतें,रेल-हवाई यातायात ठप रही। लगातार हो रही इस भारी बारिश ने शहर के परिवहन तंत्र को बुरी तरह प्रभावित किया है। हवाई सेवाओ के मद्देनजर रनवे पर पानी भरने और खराब विजिबिलिटी के चलते रविवार को 22 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। जबकि 330 से अधिक विलंबित रहीं। 13 उड़ानें सूरत और अहमदाबाद के लिए डायवर्ट की गईं। रनवे परिचालन एक घंटे (सुबह 10:17 से 11:17 बजे) के लिए निलंबित रहा। रेल सेवाओं के मद्देनजर पश्चिमी रेलवे पर 40 से अधिक लोकल ट्रेनें प्रभावित हुईं। जिनमें 10 रद्द और कई डायवर्ट रहीं। मुंबई-पुणे रूट पर कर्जत-लोनावला घाट खंड में भूस्खलन के कारण ट्रेन सेवाएं निलंबित रहीं। कई लंबी दूरी की ट्रेनें रद्द हुईं। जिनमें इंद्रायणी, इंटरसिटी,डेक्कन एक्सप्रेस,डेक्कन क्वीन और वंदे भारत एक्सप्रेस शामिल हैं। सड़क मार्ग का हाल देखें तो मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे का मिसिंग लिंक सेक्शन भूस्खलन के कारण बंद करना पड़ा। पुराना पुणे-मुंबई हाईवे भी कई जगहों पर पानी भर जाने से बंद रहा।
तूफानी हवाओं के मद्देनजर बारिश के साथ 40-50 किमी/घंटा की निरंतर हवाएं चलीं। जो कुछ इलाकों में 70-80 किमी/घंटा तक पहुंच गईं। रविवार को अकेले मुंबई में 350 पेड़ गिरे। जानहानि के मद्देनजर पिछले 3-4 दिनों में बारिश से जुड़ी घटनाओं में 13 लोगों की मौत हो गई। पालघर जिले में बाढ़ से 10 लोगों की जान गई। बीएमसी की तैयारी और स्कूल-कॉलेज बंद रहे। बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े के अनुसार शहर के 6 प्रमुख पंपिंग स्टेशन और 10 मिनी पंपिंग स्टेशन पूरी तरह कार्यशील रहे। जरूरतमंद जगहों पर अतिरिक्त डीवाटरिंग पंप भी लगाए गए। भारी बारिश को देखते हुए मुंबई और एमएमआर में स्कूल-कॉलेजों की छुट्टी घोषित कर दी गई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में इसे "फोर्स मेज्योर" (अप्रत्याशित प्राकृतिक स्थिति) बताया।
अब कब थमेगी बारिश? 9 जुलाई से मिलेगी राहत। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 8 जुलाई को मुंबई, ठाणे, पालघर और रायगढ़ में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। पालघर में कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश की संभावना है हालांकि 9 जुलाई से बारिश की तीव्रता में धीरे-धीरे कमी आने की उम्मीद है। 12 जुलाई के बाद से अधिकांश जिलों में केवल हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है। मंगलवार को ही IMD ने मुंबई का अलर्ट रेड से ऑरेंज और फिर येलो में बदल दिया था क्योंकि कोलाबा में महज 0.7 मिमी और सांताक्रूज़ में 6.1 मिमी बारिश दर्ज हुई।
बारिश का रुख बदला है अब गुजरात की ओर प्रस्थान करेगी। अत्यधिक भारी बारिश का क्षेत्र अब धीरे-धीरे मुंबई से उत्तर की ओर खिसक रहा है और दक्षिणी तटीय गुजरात तथा सौराष्ट्र के इलाकों में पहुंच गया है। रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग में भी अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है हालांकि अभी मुंबई में बारिश का सिलसिला पूरी तरह नहीं थमा है लेकिन उम्मीद की जा रही है कि मध्य जुलाई तक स्थिति सामान्य हो जाएगी और मुंबईवासियों को लंबी मानसूनी परेशानी से राहत मिलेगी। (Photos Courtesy Social media and AI)
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