*जब कभी डूबता नहीं था सूरज:ब्रिटिश साम्राज्य के 400 साल और उससे आज़ाद होने वाले देशों की पूरी कहानी*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*जब कभी डूबता नहीं था सूरज:ब्रिटिश साम्राज्य के 400 साल और उससे आज़ाद होने वाले देशों की पूरी कहानी*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई 



(मुंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई) एक समय था जब ब्रिटेन की ताकत का अंदाज़ा इस कहावत से लगाया जाता था कि “ब्रिटिश साम्राज्य पर कभी सूरज नहीं डूबता।” दुनिया के हर कोने में फैली इस सल्तनत ने करीब 400 वर्षों तक अलग-अलग महाद्वीपों पर शासन किया लेकिन धीरे-धीरे स्वतंत्रता की लहर ने इस विशाल साम्राज्य के नक्शे को पूरी तरह बदल दिया। आइए विस्तार से जानते हैं कि वे कौन-कौन से प्रमुख देश थे जो ब्रिटिश हुकूमत से आज़ाद हुए और किस तरह यह वैश्विक सत्ता बिखरती चली गई? सबसे पहला बड़ा झटका ब्रिटेन को सन 1776 में लगा। जब अमेरिका ने औपनिवेशिक शासन के खिलाफ मुहिम छेड़ी और क्रांति के बाद ‘'संयुक्त राज्य अमेरिका'’ वजूद में आया था। यही देश आज दुनिया की सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्था और सैन्य ताकत माना जाता है। 




इसके बाद सन 1867 में कनाडा ने बतौर ‘डोमिनियन’ स्वशासन का दर्जा हासिल किया हालांकि आज भी ब्रिटेन के साथ उसके संवैधानिक और सांस्कृतिक रिश्ते गहरे बने हुए हैं। साल 1901 में ऑस्ट्रेलिया ने ब्रिटिश कॉलोनियों को मिलाकर एक संघ बनाया और अपनी अलग राष्ट्रीय पहचान की ओर कदम बढ़ाया था। साल 1910 में साउथ अफ्रीका ने ‘'यूनियन'’ के रूप में ब्रिटिश नियंत्रण से बाहर आकर अपनी सरकार स्थापित की थी।  यद्यपि यहाँ रंगभेद की नीतियाँ बाद में लंबे संघर्ष का कारण बनीं।




 साल 1921 में आयरलैंड ने स्वतंत्रता प्राप्त कर ब्रिटिश शासन को चुनौती देने वाले आरंभिक देशों में जगह बनाई। इसका एक हिस्सा ‘'आयरिश फ्री स्टेट'’ बनाथा। जबकि उत्तरी आयरलैंड ब्रिटेन के साथ रहा। साल 1932 में इराक ने ब्रिटिश मैंडेट से बाहर निकलकर औपचारिक संप्रभुता हासिल की फिर भी कई दशकों तक ब्रिटेन का प्रभाव जारी रहा था।  साल 1947 का साल ऐतिहासिक रहा था । जब भारत और पाकिस्तान ने एक साथ आज़ादी ली और दो नए संप्रभु राष्ट्र अस्तित्व में आए। यह ब्रिटिश साम्राज्य के पतन की सबसे बड़ी निशानी बना था। 





फ्रीका में घाना साल 1957 में स्वतंत्र हुआ। जिसने उप-सहारा क्षेत्र में उपनिवेशवाद विरोधी लहर का नेतृत्व किया था। नाइजीरिया ने साल 1960 में ब्रिटिश सत्ता को पीछे छोड़ अपनी आज़ादी सुनिश्चित की थी। खाड़ी क्षेत्र में साल 1971 में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का गठन हुआ। जब ट्रूशियल राज्यों ने ब्रिटिश संरक्षण से मुक्त होकर एक संघ बनाया था। साल 1980 में ज़िम्बाब्वे ने लंबे गुरिल्ला संघर्ष और कूटनीतिक कोशिशों के बाद अंततः श्वेत अल्पसंख्यक शासन और ब्रिटेन के अंतिम प्रभाव से छुटकारा पाया था। वे अहम देश जो इस सूची में प्रायः छूट जाते हैं। इनके अलावा कई और क्षेत्र ब्रिटिश उपनिवेश या संरक्षित राज्य रहे। जिन्हें विस्तार से जानना ज़रूरी है। साल 1922 में मिस्र को सीमित स्वतंत्रता मिली लेकिन स्वेज़ नहर पर ब्रिटिश नियंत्रण 1956 तक बना रहा था।


 
मलेशिया ने साल 1957 में साइप्रस और नाइजीरिया ने साल 1960 में जमैका और त्रिनिदाद एवं टोबैगो ने साल 1962 में कीनिया ने साल 1963 में तथा माल्टा ने साल 1964 में स्वतंत्रता प्राप्त की थी। दक्षिण एशिया में श्रीलंका (तब सीलोन)  साल 1948 में आज़ाद हुआ था। वहीं हांगकांग ब्रिटिश साम्राज्य का आखिरी बड़ा प्रतीक था। जिसे साल 1997 में चीन को सौंप दिया गया था। इसी के साथ साम्राज्य का औपचारिक अंत माना जाता है।

 साम्राज्य के बिखराव के कारण और साझा विरासत द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन आर्थिक रूप से कमज़ोर हो गया था। उपनिवेशों में राष्ट्रवादी आंदोलनों ने ज़ोर पकड़ा और अमेरिका तथा सोवियत संघ जैसी महाशक्तियों ने उपनिवेशवाद के खात्मे का समर्थन किया था। आज़ादी के बाद अधिकांश पूर्व उपनिवेश राष्ट्रमंडल (Commonwealth) के सदस्य बने रहे थे। जहाँ ब्रिटिश सम्राट केवल प्रतीकात्मक प्रमुख हैं। शिक्षा, कानून,प्रशासन और खेलों में ब्रिटिश प्रभाव आज भी इन देशों की पहचान का हिस्सा है। 400 वर्षों तक दुनिया के एक बड़े भू-भाग पर शासन करने वाले ब्रिटिश साम्राज्य का सूरज अब अस्त हो चुका है लेकिन उसकी छोड़ी हुई सांस्कृतिक,राजनीतिक और भाषायी छाप अब भी करोड़ों लोगों के जीवन में मौजूद है। (Photos Courtesy Social media and AI)

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