*अंतरिक्ष विज्ञान में बड़ी उपलब्धि: चीन के तियानवेन-2 ने पृथ्वी के दुर्लभ 'मिनीमून' की पहली क्लोज़-अप तस्वीर ली*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*अंतरिक्ष विज्ञान में बड़ी उपलब्धि: चीन के तियानवेन-2 ने पृथ्वी के दुर्लभ 'मिनीमून' की पहली क्लोज़-अप तस्वीर ली*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई 


(मुंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई) कैसा दिखता है पृथ्वी का दुर्लभ ''दूसरा चंद्रमा'' पहली ऐतिहासिक क्लोज़अप तस्वीर हुई जारी। चीन के तियानवेन-2 अंतरिक्षयान ने पृथ्वी के दुर्लभ ''मिनीमून'' की पहली क्लोज़-अप तस्वीर कैद की है । जिसे एस्टेरॉयड 2016HO3,सेकंड मून या Kamo'oalewaभी कहा जाता है। करीब एक अरब किलोमीटर की यात्रा के बाद अंतरिक्षयान ने लगभग 20 किमी की दूरी से इसकी तस्वीर ली। ''मिनीमून'' कहलाए जाने के बावजूद असल में यह पृथ्वी का दूसरा चंद्रमा नहीं है। पृथ्वी का ''दूसरा चंद्रमा'' कैसा दिखता है? उसकी पहली ऐतिहासिक क्लोज़-अप तस्वीर अब जारी हुई है। लोग जिस ''दूसरे चंद्रमा'' का ज़िक्र किया करते है। वह वास्तव में चंद्रमा नहीं है बल्कि एक अत्यंत दुर्लभ''अर्ध-उपग्रह''(Quasi-satellite) है। जिसे क्षुद्रग्रह 2016 HO3 या Kamoʻoalewa (हवाई भाषा में ''दोलनशील खगोलीय टुकड़ा'') कहा जाता है। 


''अर्ध-उपग्रह''क्या है? उस बात देखें तो यह सीधे पृथ्वी की परिक्रमा नहीं करता बल्कि सूर्य की परिक्रमा करता है। इसकी कक्षा पृथ्वी से इतनी मेल खाती है कि यह हमारे ग्रह के साथ-साथ ''नाचता'' हुआ प्रतीत होता है। यह पृथ्वी के बहुत करीब आता-जाता है पर कभी उसकी गुरुत्वाकर्षण सीमा में स्थायी रूप से नहीं बंधता। वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी के आस-पास ऐसे केवल 7 अर्ध-उपग्रह ज्ञात हैं और यह उनमें सबसे स्थिर है। पहली क्लोज़-अप तस्वीर और मिशन को पूरा जाने तो चीन का अंतरिक्ष यान ''तियानवेन-2'' Tianwen-2 2025 में लॉन्च हुआ था और लगभग 1 अरब किलोमीटर की यात्रा के बाद इस साल 2026 में इस क्षुद्रग्रह के पास पहुँचा था। 


तारीख 2 जुलाई 2026 को यान ने इससे लगभग 20 किलोमीटर की दूरी से पहली हाई-रिज़ॉल्यूशन तस्वीर खींची थी। तस्वीर में दिखा कि यह अनियमित आकार का खड्डों और चट्टानों से भरा एक पथरीला पिंड है । बिल्कुल आलू के आकार का पर बहुत बड़ा। आकार और भौतिक विशेषताएँ के मद्देनजर इसका व्यास अनुमानित 16 से 100 मीटर के बीच है । अलग-अलग अध्ययनों में भिन्नता है। यह लगभग 28 मिनट में एक बार अपनी धुरी पर घूम लेता है। इसकी सतह पर बड़े-बड़े पत्थर और मलबा है। जो इसे टक्करों से बने किसी मलबे जैसा बनाते हैं। चौंकाने वाली थ्योरी यह है कि क्या यह चंद्रमा का टुकड़ा है?इस थ्योरी को समझे तो कई वैज्ञानिकों का मानना है कि Kamoʻoalewa कोई साधारण क्षुद्रग्रह नहीं बल्कि चंद्रमा से टक्कर के कारण निकला हुआ टुकड़ा हो सकता है। इसके प्रकाशीय स्पेक्ट्रम (reflectance spectrum) चंद्रमा की चट्टानों से मेल खाते हैं। जो अन्य क्षुद्रग्रहों से अलग है। तियानवेन-2 का प्रमुख उद्देश्य इसकी सतह से नमूना (sample) लेकर पृथ्वी वापस लाना है। यदि सफल रहा तो यह सिद्ध हो सकेगा कि यह वाकई चंद्रमा का भाग है। आगे का मिशन के मद्देनजर तियानवेन-2 इस क्षुद्रग्रह का नमूना लेने के बाद एक और महत्वपूर्ण लक्ष्य  मुख्य बेल्ट का धूमकेतु 311P/PanSTARRS की ओर बढ़ेगा। जहाँ वह वैज्ञानिक अध्ययन करेगा। पृथ्वी का यह ''दूसरा चंद्रमा'' न तो चाँद है और न ही स्थायी उपग्रह बल्कि एक रहस्यमयी चट्टान है। जो हमारे साथ अंतरिक्ष में तैरती रहती है। उसकी पहली क्लोज़-अप तस्वीर ने वैज्ञानिकों को उसकी उत्पत्ति के करीब पहुँचा दिया है और उसके नमूने से हमें सौर मंडल के इतिहास के बारे में नई जानकारी मिल सकती है। अंतरिक्ष अन्वेषण के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में चीन के तियानवेन-2 (Tianwen-2) अंतरिक्षयान ने पृथ्वी के तथाकथित ''मिनीमून'' minimoonकी पहली स्पष्ट और विस्तृत क्लोज़-अप तस्वीर जारी की है।


 यह रहस्यमयी खगोलीय पिंड जिसे वैज्ञानिक रूप से एस्टेरॉयड 2016HO3 और Kamo'oalewa के नाम से जाना जाता है। अब तक वैज्ञानिकों के लिए उत्सुकता का केंद्र रहा है। क्या है यह ''मिनीमून''? वह जाने तो लगभग एक अरब किलोमीटर की लंबी और चुनौतीपूर्ण यात्रा पूरी करने के बाद तियानवेन-2 अंतरिक्षयान ने इस पिंड के करीब पहुँचकर लगभग 20 किमी की दूरी से इसकी तस्वीरें कैद कीं। सामने आई तस्वीर में यह किसी अनियंत्रित चट्टानी टुकड़े की तरह दिखाई देता है हालाँकि इसे 'मिनीमून' या 'पृथ्वी का "दूसरा चंद्रमा'' कहा जा रहा है लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से यह पृथ्वी का उपग्रह (Moon) नहीं है। यह असल में एक नियर-अर्थ एस्टेरॉयड (Near-Earth Asteroid) है। जो पृथ्वी की कक्षा के पास से गुजरते हुए एक ऐसी कक्षा में यात्रा करता है। जो इसे लंबे समय तक हमारे ग्रह के करीब रखती है। 



विकिपीडिया और वैज्ञानिक दृष्टिकोण
विकिपीडिया के अनुसार जाने तो Kamo'oalewa (2016 HO3)एक अर्ध-उपग्रह (quasi-satellite) है। इसका अर्थ है कि यह सूर्य की परिक्रमा करता है। लेकिन पृथ्वी की सापेक्ष स्थिति के कारण ऐसा प्रतीत होता है मानो यह हमारी पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगा रहा हो। यह एक स्थायी चंद्रमा नहीं है बल्कि एक ऐसा एस्टेरॉयड है जो अपनी विशिष्ट कक्षीय गति के कारण पृथ्वी के साथ एक ''नृत्य'' जैसा तालमेल बनाए हुए है। (Photos Courtesy Social media and AI)

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