*पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी से क्यों कहा था कि मैं आत्महत्या कर लूंगा? जानें साल 2012 का पूरा राजनीतिक घटनाक्रम*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी से क्यों कहा था कि मैं आत्महत्या कर लूंगा? जानें साल 2012 का पूरा राजनीतिक घटनाक्रम*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई 


(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई)पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) डॉ. एस.वाई. कुरैशी की नई किताब ''इंडिया एंड आईः ए हंड्रेड मेमोरीज,नॉट ए मेमॉयर''(India and I: A Hundred Memories,Not a Memoir) इन दिनों भारतीय राजनीतिक गलियारों में भारी चर्चा का विषय बनी हुई है। इस किताब में कुरैशी ने साल 2012 का एक ऐसा हैरान कर देने वाला वाकया साझा किया है। जिसने तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह की संवेदन शीलता और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति उनके अगाध सम्मान को एक नए रूप में देश के सामने रखा है। मुख्य घटनाक्रम के मामले को गंभीरता से समझे तो जब प्रधानमंत्री आवास पर भावुक हुए थे डॉ.मनमोहन सिंह।


यह पूरा मामला जनवरी-फरवरी 2012 का है। जब उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव चल रहे थे। तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी उस समय केंद्र सरकार के कुछ मंत्रियों के बयानों से बेहद आहत थे। जब वह इस मामले की शिकायत करने प्रधानमंत्री आवास पहुंचे तो डॉ. मनमोहन सिंह ने बेहद भावुक होकर कहा था कि अगर आपको (चुनाव आयोग को) ऐसा लगता है तो मैं आत्महत्या कर लूंगा। कुरैशी के मुताबिक देश के प्रधानमंत्री के मुंह से यह शब्द सुनना उनके लिए बेहद स्तब्ध करने वाला था। विवाद की पूरी कहानी और इनसाइड स्टोरी सटीक अतिरिक्त जानकारी के हिसाब से इस पूरे विवाद और प्रधानमंत्री की इस तीखी व भावुक प्रतिक्रिया को समझने के लिए तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों को जानना जरूरी है। दौरान सलमान खुर्शीद का ''9% मुस्लिम कोटा'' वाले बयान को देखें तो उत्तर प्रदेश चुनाव प्रचार के दौरान तत्कालीन केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने एक जनसभा में बयान दिया कि यदि कांग्रेस सत्ता में आती है तो वह अल्पसंख्यकों विशेषकर मुस्लिम समुदाय के लिए आरक्षण का उप-कोटा 4.5% से बढ़ाकर 9% कर देगी। विपक्षी दल भाजपा ने इसे आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct - MCC) का खुला उल्लंघन बताते हुए चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई। चुनाव आयोग की कार्रवाई और खुर्शीद की जिद के मद्देनजर चुनाव आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सलमान खुर्शीद को नोटिस जारी किया और उनके बयान पर कड़ी निंदा (Censure) जताई।


 इसके बावजूद खुर्शीद ने अपनी अगली रैलियों में इस बयान को दोहराया और कहा कि भले ही चुनाव आयोग उन्हें फांसी पर लटका दे। वह अपने रुख पर कायम रहेंगे। एक कानून मंत्री द्वारा देश की शीर्ष चुनाव संस्था को इस तरह चुनौती देना बेहद गंभीर मामला बन गया था। इस मामले में बेनी प्रसाद वर्मा की एंट्री और बढ़ता टकराव को जाने तो विवाद यहीं नहीं थमा। तत्कालीन एक और केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने सलमान खुर्शीद का समर्थन करते हुए चुनाव आयोग के खिलाफ तीखी टिप्पणियां कर दीं। मंत्रियों के इस अड़ियल और आक्रामक रवैये से चुनाव आयोग बेहद आहत हुआ। भारत के राष्ट्रपति तक पहुंची थी बात। तत्कालीन सीईसी एस.वाई.कुरैशी और उनके साथी आयुक्तों ने इस अपमान के खिलाफ एक कड़ा कदम उठाया। चुनाव आयोग ने तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को एक आधिकारिक पत्र लिखकर केंद्रीय मंत्रियों के इस अमर्यादित आचरण पर हस्तक्षेप करने की मांग की। भारतीय चुनावी इतिहास में यह बेहद दुर्लभ घटना थी जब चुनाव आयोग को कैबिनेट मंत्रियों के खिलाफ राष्ट्रपति का दरवाजा खटखटाना पड़ा था। हरिश टीका मोहन के जरिए पीएम तक संदेश पहुंचा था। मंत्रियों के इस व्यवहार से आहत होकर डॉ.एस. वाई.कुरैशी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बेहद करीबी मित्र और पूर्व नौकरशाह हरिश टीका मोहन से अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की थी। कुरैशी ने उनसे कहा था कि यदि सरकार के मंत्री ही चुनाव आयोग की गरिमा को तार-तार करेंगे तो आयोग अपनी निष्पक्षता से काम नहीं कर पाएगा। चुनाव आयोग लोकतंत्र की आत्मा है शब्दों के मद्देनजर हरिश टीका मोहन ने कुरैशी की यह नाराजगी तुरंत प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तक पहुंचाई। 


जब कुरैशी पीएम से मिलने पहुंचे तो डॉ.सिंह लॉन के दरवाजे पर खड़े उनका इंतजार कर रहे थे। कुरैशी को देखते ही उन्होंने बेहद दु:खी मन से आत्महत्या वाली बात कही। डॉ.मनमोहन सिंह ने आगे जो कहा था कि वह आज के समय में भी भारतीय लोकतंत्र के लिए एक बड़ी सीख है। उन्होंने कहा था कि इलेक्शन कमीशन सिर्फ भारत का गौरव नहीं है। यह देश के लोकतंत्र की आत्मा है अगर हम चुनाव आयोग की साख और इसकी साख पर जनता का भरोसा खो देते हैं तो हम सब कुछ खो देंगे। कुरैशी ने अपनी किताब में लिखा है कि मनमोहन सिंह ऐसे नेता थे जिनके लिए संवैधानिक मर्यादा और संस्थाओं का सम्मान कोई चुनावी भाषण या बातचीत का मुद्दा नहीं था बल्कि वह इसे अपने जीवन और आचरण में जीते थे। इस भावुक मुलाकात के तुरंत बाद प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप पर सलमान खुर्शीद ने चुनाव आयोग के सामने बिना शर्त लिखित माफी मांगी। जिसके बाद यह बड़ा विवाद शांत हुआ था।(Photos Courtesy Social media and AI)

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