*अदभुत...13वीं सदी के मुस्लिम वैज्ञानिक कुत्बुद्दीन शिराजी ने सुलझाया इंद्रधनुष का रहस्य*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*अदभुत...13वीं सदी के मुस्लिम वैज्ञानिक कुत्बुद्दीन शिराजी ने सुलझाया इंद्रधनुष का रहस्य*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
(मुंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई) इस्लामी स्वर्ण युग (Islamic Golden Age) के महान वैज्ञानिक कुत्बुद्दीन शिराजी (Qutb al-Din al-Shirazi,1236–1311) ने एक ऐसी प्राकृतिक घटना का रहस्य उजागर किया। जिसे सदियों तक कोई समझ नहीं पाया था। इंद्रधनुष (Rainbow) कैसे बनता है? उन्होंने बताया कि बारिश की बूंदों में रोशनी के सफर (the path of light inside a raindrop) से ही यह अद्भुत रंगीन कमान बनती है। विज्ञान का वह रहस्य जो सदियों छिपा था ।
उस बात को समझे तो कुत्बुद्दीन शिराजी ने अपने शोध में साबित किया कि जब सूर्य की सफेद रोशनी बारिश की एक बूंद में प्रवेश करती है तो वह अपवर्तित (refracted) होती है। बूंद की भीतरी सतह से परावर्तित (reflected) होती है और फिर बूंद से बाहर निकलते समय दोबारा अपवर्तित होती है। इस जटिल यात्रा के दौरान सफेद रोशनी अपने सात रंगों में विभक्त हो जाती है और यही वह प्रक्रिया है । जो आसमान में रंगीन इंद्रधनुष का निर्माण करती है।
उनके शिष्य कमाल अल-दीन अल-फ़ारिसी (Kamāl al-Dīn al-Fārisī) ने इस सिद्धांत को प्रयोगात्मक रूप से सत्यापित किया। उन्होंने कैमरा ऑब्स्क्यूरा (camera obscura) और पानी से भरे कांच के गोले (glass sphere) का उपयोग करके दिखाया कि प्रकाश की किरण बूंद के अंदर दो बार अपवर्तित होकर इंद्रधोनुष बनाती है। इस्लामी स्वर्ण युग की वैज्ञानिक विरासत के मद्देनजर कुत्बुद्दीन शिराजी न केवल एक भौतिक विज्ञानी (physicist) और खगोलशास्त्री (astronomer) थे। बल्कि एक गणितज्ञ,चिकित्सक, दार्शनिक और कवि भी थे।
उन्होंने अलहज़न (Alhazen) के प्रकाशिकी (optics) के अध्ययन को आगे बढ़ाया और इंद्रधनुष निर्माण की पहली सही व्याख्या देने का श्रेय उन्हीं को जाता है हालाँकि कुछ विद्वान इस बात पर बहस करते हैं कि क्या शिराजी ने स्वयं इंद्रधनुष पर कोई कृति लिखी थी फिर भी यह निर्विवाद है कि उनके मार्गदर्शन और प्रेरणा से ही उनके शिष्य फ़ारिसी ने इस घटना को प्रयोगात्मक रूप से सिद्ध किया। यह उस युग की वैज्ञानिक परंपरा को दर्शाता है। जहाँ गुरु-शिष्य की शृंखला में ज्ञान का प्रसार होता था और नई खोजें होती थीं। एक ऐतिहासिक तथ्य जो प्रेरित करता है।
13वीं सदी में जब यूरोप में अंधकार युग का दौर था। इस्लामी सभ्यता में विज्ञान,गणित और प्रकाशिकी अपने चरम पर थी। कुत्बुद्दीन शिराजी और उनके शिष्य कमाल अल-दीन अल-फ़ारिसी ने बारिश की बूंदों में प्रकाश के सफर का जो रहस्य समझाया। वह आज भी आधुनिक भौतिकी का एक मूलभूत सिद्धांत है। यह खोज इस बात का प्रमाण है कि इस्लामी स्वर्ण युग में विज्ञान ने नई राहें रोशन कीं और मानवता को प्रकृति के गूढ़ रहस्यों को समझने का मार्ग दिखाया।( Photos Courtesy Social media and AI)
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