*चीन का बड़ा शैक्षिक फैसला:12,000 से अधिक डिग्री पाठ्यक्रम समाप्त,AI और रोबोटिक्स पर 10,000 नए पाठ्यक्रम शुरू*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*चीन का बड़ा शैक्षिक फैसला:12,000 से अधिक डिग्री पाठ्यक्रम समाप्त,AI और रोबोटिक्स पर 10,000 नए पाठ्यक्रम शुरू*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई


(मुंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई)चीन ने अपने उच्च शिक्षा तंत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव किया है। जिसने दुनिया भर का ध्यान आकर्षित किया है। आंकड़ों के अनुसार साल 2021 से 2025 के बीच चीनी विश्वविद्यालयों ने 12,200 स्नातक डिग्री कार्यक्रमों को रद्द या स्थगित कर दिया है। जो देश के कुल पाठ्यक्रमों का 30 प्रतिशत से अधिक है साथ ही 10,200 नए पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं। यह आंकड़ा चीनी शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी किया गया है और इसे राज्य समाचार एजेंसी शिन्हुआ द्वारा प्रकाशित किया गया है। कौन से पाठ्यक्रम समाप्त किए जा रहे हैं? उसको जाने तो जिन क्षेत्रों के पाठ्यक्रमों को समाप्त किया जा रहा है। उनमें मुख्य रूप से कला,मानविकी,विदेशी भाषाएं,मानव संसाधन और प्रबंधन शामिल हैं।


 "साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट" की रिपोर्ट के अनुसार कटौती कला, मानविकी, विदेशी भाषाओं और प्रशासन जैसे क्षेत्रों में केंद्रित है। जिन्हें संतृप्त या कम नौकरी की संभावनाओं वाला माना जाता है। कौन से नए पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं? वह देखें तो इनके स्थान पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI),रोबोटिक्स, अर्धचालक सेमीकंडक्टर,साइबर अपराध,एम्बेडेड इंटेलिजेंस (Embodied AI), एकीकृत सर्किट और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में नए पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। इसी साल 2026 के पाठ्यक्रम सूची में 38 नए पाठ्यक्रम जोड़े गए हैं। जिनमें एम्बेडेड इंटेलिजेंस, ब्रेन-कंप्यूटर साइंस, सेमीकंडक्टर प्रक्रिया और उपकरण शामिल हैं। यह बदलाव क्यों किया गया? वह जाने तो इस बड़े बदलाव के पीछे मुख्य कारण बेरोजगारी है। चीन में 16-24 वर्ष के युवाओं में बेरोजगारी दर 15 से 19 प्रतिशत के बीच है। वहीं अकेले इस साल 2026 में 12.7 मिलियन से अधिक छात्र स्नातक होंगे। पारंपरिक पाठ्यक्रमों से निकलने वाले लाखों स्नातकों को उनकी योग्यता के अनुरूप नौकरी नहीं मिल पा रही थी। दूसरी ओर AI और टेक्नोलॉजी क्षेत्र में भारी मांग थी लेकिन कुशल लोगों की कमी थी। यह पहल "15वीं पंचवर्षीय योजना (2026-2030)" का हिस्सा है। जिसका मुख्य लक्ष्य AI को अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र में लागू करना है। शिक्षा मंत्री ह्वाइ जिनपेंग ने कहा कि चीन एक समन्वित प्रतिभा प्रशिक्षण तंत्र स्थापित करेगा। 




क्या यह सिर्फ पाठ्यक्रमों की कटौती है?नहीं यह महज पाठ्यक्रमों की कटौती नहीं है बल्कि शिक्षा के तर्क में एक बड़ा बदलाव है। पहले विश्वविद्यालय सोचते थे "हमारे पास क्या है"? अब वे सोचते हैं "देश को क्या चाहिए"?अब "डिसिप्लिन का छोटा तर्क"खत्म हो रहा है और "राष्ट्रीय विकास का बड़ा तर्क" आ रहा है। शिक्षा मंत्रालय ने रणनीतिक रूप से आवश्यक पाठ्यक्रमों के लिए एक "ग्रीन चैनल" भी बनाया है। जिसके तहत हार्बिन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, बीजिंग यूनिवर्सिटी ऑफ एरोनॉटिक्स एंड एस्ट्रोनॉटिक्स जैसे 9 विश्वविद्यालयों में एम्बेडेड इंटेलिजेंस जैसे नए पाठ्यक्रम शुरू किए गए। भारतीय छात्रों और अभिभावकों के लिए यह सबक लेना जरूरी है। यह बदलाव पूरी दुनिया के लिए एक संकेत। 



 चीन अनिवार्य रूप से राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रयोग चला रहा है। जिसमें वह उन क्षेत्रों को हटा रहा है जिन्हें AI बेकार कर देगा और उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है जहां मानव-AI सहयोग आवश्यक रहेगा। विशेषज्ञों के अनुसार यह पुनर्गठन छह प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है। जिसमें AI,सेमीकंडक्टर,ह्यूमनॉइड रोबोट,लो- अल्टीट्यूड इकॉनमी और कमर्शियल स्पेस,न्यू एनर्जी और स्टोरेज,बायोमेडिसिन और लॉन्जेविटी टेक्नोलॉजी। सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अकेले 1 मिलियन से अधिक प्रतिभाओं की कमी है अगर आप एक छात्र या अभिभावक हैं तो खुद से एक सवाल पूछें कि 10 साल बाद दुनिया को किन कौशलों की जरूरत होगी? यह चीन का सबक है । जल्दी सोचो,जल्दी अमल करो। (Photos Courtesy Social media and AI)

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