*रूस में 1.2 मिलियन लोगों की भीड़ की अफवाहें: सच क्या है?स्टेट ड्यूमा ने की सफाई,एक्सपर्ट्स ने बताया यूक्रेन का प्रोपेगैंडा*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*रूस में 1.2 मिलियन लोगों की भीड़ की अफवाहें: सच क्या है?स्टेट ड्यूमा ने की सफाई,एक्सपर्ट्स ने बताया यूक्रेन का प्रोपेगैंडा*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई) सोशल मीडिया पर एक खबर तेजी से वायरल हो रही है कि इस पतझड़ में रूस में 1.2 मिलियन लोगों की भीड़ (सैन्य लामबंदी) mobilization होगी। यह दावा अज्ञात टेलीग्राम चैनलों से फैल रहा है। जिनका कोई आधिकारिक स्रोत नहीं है हालांकि इस अफवाह ने रूसी नागरिकों में चिंता पैदा कर दी है। आइए जानते हैं इस पूरे मामले की सच्चाई और क्या कहते हैं रूसी अधिकारी और उसके विशेषज्ञ?रूसी अधिकारियों का स्पष्ट बयान देखें तो स्टेट ड्यूमा डिफेंस कमेटी के प्रमुख आंद्रेई कार्तपोलोव ने इन अफवाहों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि रूस में किसी भी प्रकार की भीड़ की कोई योजना नहीं है और न ही कभी थी। यह सारी खबरें रूसी समाज में दहशत फैलाने के लिए गढ़ी गई हैं।
उनका बयान ओएसएन (OSN) ने उद्धृत किया है। फेडरेशन काउंसिल की संवैधानिक विधान समिति के अध्यक्ष आंद्रेई क्लिशास ने भी इसी तरह की सफाई दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी संस्थानों में इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हो रही है क्योंकि वर्तमान में इसकी कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों पर अंतिम निर्णय राष्ट्रपति लेते हैं। जो विशेष सैन्य अभियान (SVO) क्षेत्र में विकास को ध्यान में रखते हुए किए जाते हैं पर टेलीग्राम पर क्या चल रहा है? कुछ टेलीग्राम चैनलों ने दावा किया है कि"अक्टूबर में 1.2 मिलियन लोगों की लामबंदी mobilization"साथ में"दूसरी लामबंदी की भी तैयारी" हो रही है हालांकि इन सभी दावों की पुष्टि नहीं हो पाई है। "प्रिज़्रक नोवोरोसी" नामक चैनल के एक यूजर ने लिखा कि अफवाहों पर गंभीरता से टिप्पणी करना मुश्किल है लेकिन दूसरी लामबंदी mobilization की संभावना पर चर्चा अब अटकलों से आगे बढ़कर सार्वजनिक अपेक्षा बन गई है।
इसके पीछे मोर्चे पर सुस्त गतिशीलता और बड़े बदलावों की आशंका को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। दो अलग-अलग धाराएं हैं । इनसाइडर ब्लैक चैनल के अनुसार भीड़ नहीं होगी बल्कि देश के नए सैन्यीकरण के लिए अन्य जरूरी फैसले लिए जाएंगे। इससे यातायात, संचार, परिवहन, इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रकाशन, क्षेत्रीय मुख्यालय, सुरक्षा बलों और स्थानीय प्रशासन पर अधिक सख्त नियंत्रण स्थापित हो सकता है। यह जानकारी भी अपुष्ट है। वहीं वोएवोडा ब्रॉडकास्ट्स चैनल का मानना है कि ड्रोन से रूसी क्षेत्रों में आतंक फैलाने वाले यूक्रेनी राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की को रोकने के लिए पूरे देश का आर्थिक और सैन्य लामबंदी mobilization करना जरूरी है।
एक्सपर्ट्स की राय के मुताबिक यह यूक्रेन का प्रोपेगैंडा है?रूसी राष्ट्रपति अकादमी ऑफ नेशनल इकॉनमी एंड पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (RANEPA) के इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ एंड नेशनल सिक्योरिटी के सैन्य विशेषज्ञ अलेक्जेंडर स्टेपानोव ने आरोप लगाया है कि यूक्रेन जानबूझकर रूस को बदनाम करने के लिए इस तरह की फर्जी खबरें फैला रहा है। उनके अनुसार असली लामबंदी mobilization में उल्लंघन यूक्रेन में हो रहे हैं। जहां एकल पिता और विकलांग लोगों को भी सेना में भर्ती किया जा रहा है। स्टेपानोव ने कहा कि यूक्रेन की सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए रूसी सशस्त्र बलों को बदनाम करने का अभियान चला रही है। उनका मकसद यह झूठी छवि बनाना है कि यूक्रेन में जो प्रक्रियाएं हो रही हैं। वही रूस में भी हैं।
यह सब अफवाह है या सच?फिलहाल सभी उपलब्ध साक्ष्य और अधिकारियों के बयान यह स्पष्ट करते हैं कि रूस में 1.2 मिलियन लोगों की भीड़ की खबर पूरी तरह से बेबुनियाद और फेक है। यह प्रोपेगैंडा का हिस्सा है। जिसे रूसी समाज में अस्थिरता फैलाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। रूसी सरकार ने इस मुद्दे पर कोई योजना नहीं बनाई है और फिलहाल किसी भी प्रकार की लामबंदी mobilization की आवश्यकता नहीं है। एक्सपर्ट्स के अनुसार यह अफवाह यूक्रेन द्वारा सूचना युद्ध के तहत फैलाई जा रही है ताकि रूस की आंतरिक सुरक्षा और जनता के मनोबल पर प्रभाव पड़े। पाठक गण इस बात पर ध्यान दें कि यह लेख रूसी मीडिया रिपोर्ट्स, अधिकारियों के बयानों और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। सभी सूचनाओं को सत्यापित नहीं किया जा सका है। पाठकों से अनुरोध है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें।( Photos Courtesy Social media and AI)
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