*एशियाई मानसून का रौद्र रूप:उत्तर भारत से दक्षिण कोरिया तक 10,000 किमी लंबा बादलों का गलियारा,भारी बारिश और बाढ़ का अलर्ट*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*एशियाई मानसून का रौद्र रूप:उत्तर भारत से दक्षिण कोरिया तक 10,000 किमी लंबा बादलों का गलियारा,भारी बारिश और बाढ़ का अलर्ट*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
(मुंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई)मौसम विज्ञानियों ने सैटेलाइट तस्वीरों में एक बेहद दुर्लभ और विशाल मौसमी हलचल दर्ज की है। उत्तर भारत से शुरू होकर हिमालय,चीन और दक्षिण कोरिया तक फैले लगभग7,000 से 10,000 किलोमीटर लंबे बादलों के एक विशाल गलियारे (Cloud Corridor) ने पूरी दुनिया के मौसम वैज्ञानिकों को चौंका दिया है। विशेषज्ञ इसे इस साल के मानसून का सबसे सक्रिय और खतरनाक चरण मान रहे हैं। जो पूरे एशियाई क्षेत्र की मौसमी प्रणाली को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है।
कई देशों में जलप्रलय की आशंका के मद्देनजर मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इतनी लंबी और लगातार सक्रिय बादलों की संरचना सामान्य दिनों में देखने को नहीं मिलती। यह विशाल मौसमी तंत्र केवल भारत तक सीमित नहीं है बल्कि यह एक ''इंटर-कनेक्टेड''एशियाई मानसूनी सिस्टम का हिस्सा है। इस महा-प्रणाली के कारण आने वाले दिनों में भारत समेत पड़ोसी देशों में भी मौसम गंभीर रूप अख्तियार कर सकता है। उत्तर और मध्य भारत के लिए''रेड अलर्ट''जारी किया गया है। इस विशाल सिस्टम के प्रभाव से आने वाले 3 से 4 दिनों में उत्तर भारत और मध्य भारत के बड़े हिस्से में मध्यम से लेकर अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि लगातार होने वाली इस मूसलाधार बारिश के चलते कई मैदानी इलाकों में गंभीर जलभराव (Waterlogging) और नदियों के उफान पर आने से बाढ़ जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। हिमालयी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा बढ़ेगा। बादलों का यह गलियारा सीधे तौर पर हिमालयी क्षेत्र के ऊपर से गुजर रहा है।
इसके कारण उत्तराखंड,हिमाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर के पहाड़ी राज्यों में अचानक बादल फटने (Cloudburst) और तीव्र भूस्खलन (Landslides) का खतरा कई गुना बढ़ गया है। प्रशासन ने पहाड़ी इलाकों की यात्रा करने वाले पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी है। आपदा प्रबंधन टीमें अलर्ट पर आ गई है। मौसम में आए इस बड़े बदलाव को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और स्थानीय प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की हिदायत दी जा रही है।
मौसम विभाग पल-पल की सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए इस 10,000 किलोमीटर लंबी बादलों की पट्टी की निगरानी कर रहा है। मौसम विभाग (IMD) की आधिकारिक चेतावनी और हाई अलर्ट जारी किया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने सैटेलाइट डेटा का विश्लेषण करने के बाद देश के कई हिस्सों क लिए ''ऑरेंज''और''रेड''अलर्ट जारी किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली मानसूनी हवाओं के इस गलियारे में मिलने से बादलों का घनत्व अत्यधिक बढ़ गया है। सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले विशिष्ट राज्यों में इस मौसमी प्रणाली का मुख्य केंद्र भारत के निम्नलिखित राज्यों में रहेगा। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में अत्यंत भारी बारिश और तीव्र भूस्खलन की चेतावनी दी गई है। उत्तर प्रदेश और बिहार में लगातार मूसलाधार बारिश से गंगा और सहायक नदियों में बाढ़ का खतरा है।
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मध्य भारत के इन राज्यों में जलभराव और निचले इलाकों के डूबने की आशंका है। पूर्वोत्तर राज्य असम और मेघालय में ब्रह्मपुत्र नदी के जलस्तर में भारी बढ़ोतरी का अनुमान है। नागरिकों के लिए बचाव और सुरक्षा के जरूरी दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आम जनता के लिए तत्काल एडवाइजरी जारी की है। पहाड़ी यात्राओं से बचें। अगले 48 से 72 घंटों तक पहाड़ी क्षेत्रों या नदी किनारों की यात्रा बिल्कुल न करें। अंडरपास और जलभराव वाले रास्तों से दूर रहें। शहरी इलाकों में गाड़ी चलाते समय गहरे पानी वाले रास्तों पर जाने से बचें। बिजली के खंभों से दूरी बनाएं रखें । भारी बारिश और आंधी के दौरान खुले तारों या ट्रांसफार्मर के पास खड़े न हों। आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें। मौसम के बारे में केवल सरकार या IMD द्वारा जारी बुलेटिन पर ही विश्वास करें। आपातकालीन किट तैयार रखें । निचले इलाकों के निवासी जरूरी दवाएं, टॉर्च, पावर बैंक और पीने का साफ पानी अपने पास सुरक्षित रखें।(Photos Courtesy Social media and AI)
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