*विश्व बैंक की नई वर्गीकरण रिपोर्ट:भारत पिछड़ा, पड़ोसी देशों ने मारी बाजी*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*विश्व बैंक की नई वर्गीकरण रिपोर्ट:भारत पिछड़ा, पड़ोसी देशों ने मारी बाजी*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई)विश्व बैंक ने 1 जुलाई 2026 को जारी अपनी वार्षिक आय वर्गीकरण रिपोर्ट में श्रीलंका,वियतनाम और फिलीपींस को "लोअर मिडल इनकम" से "अपर मिडल इनकम" देशों की श्रेणी में शामिल किया है। यह इन देशों की प्रति व्यक्ति आय में हुई महत्वपूर्ण बढ़ोतरी का परिणाम है।
विश्व बैंक के अनुसार वियतनाम की प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (GNI) बढ़कर 4,970 डॉलर (लगभग 4,74,000 रुपये) प्रति वर्ष हो गई है। फिलीपींस की GNI 4,850 डॉलर (लगभग 4,62,000 रुपये) प्रति वर्ष और श्रीलंका की GNI 4,670 डॉलर (लगभग 4,45,000 रुपये) प्रति वर्ष दर्ज की गई है। इन तीनों देशों ने 4,636 डॉलर की अपर मिडल इनकम की न्यूनतम सीमा को पार कर लिया है। वियतनाम की उपलब्धि उसके निर्यात-संचालित विकास मॉडल का परिणाम है। जहां साल 2024 और साल 2025 में निर्यात में 15% से अधिक की वृद्धि हुई। फिलीपींस ने व्यापक आर्थिक विस्तार के माध्यम से यह स्थान हासिल किया। जहां पिछले पांच वर्षों में औसत वार्षिक GDP वृद्धि 5.8% रही। श्रीलंका ने साल 2022 के गंभीर आर्थिक संकट से उबरते हुए साल 2025 में 5% की GDP वृद्धि दर्ज की।
भारत की स्थिति देखें तो जहां हम खड़े हैं। इन तीनों देशों के विपरीत भारत लोअर मिडल इनकम देशों की श्रेणी में ही बना हुआ है । एक ऐसी स्थिति जिसमें वह साल 2007 से है। विश्व बैंक के अनुसार भारत की प्रति व्यक्ति GNI लगभग 2,500 से 2,700 डॉलर (लगभग 2,38,000 से 2,57,000 रुपये) प्रति वर्ष आंकी गई है। यह आंकड़ा अपर मिडल इन्कम की 4,636 डॉलर की सीमा से काफी नीचे है। विश्व बैंक की वर्गीकरण प्रणाली GNI प्रति व्यक्ति पर आधारित है। न कि कुल GDP पर।
इसका मतलब यह है कि विशाल जनसंख्या वाला भारत चाहे कितनी भी तेज GDP वृद्धि दर्ज करें। प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि के लिए कहीं अधिक कुल आय उत्पन्न करनी होगी। देश-वार तुलना विश्व बैंक 2026 डेटा के हिसाब से देश प्रति व्यक्ति वार्षिक आय (GNI) वर्गीकरण वियतनाम $4,970 (~₹4,74,000) अपर मिडल इनकम। फिलीपींस $4,850 (~₹4,62,000) अपर मिडल इनकम। श्रीलंका $4,670 (~₹4,45,000) अपर मिडल इनकम और भारत $2,500-2,700 (~₹2,38,000- 2,57,000) लोअर मिडल इनकम। औसत आय का भ्रामक पहलू के मद्देनजर एक महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रति व्यक्ति औसत आय पूरी आबादी में आय के वितरण को नहीं दर्शाती। भारत में अत्यधिक आय असमानता है। जहाँ कुछ अरबपतियों की विशाल संपत्ति औसत आंकड़े को ऊपर खींच लेती है। फिलीपींस में भी यही स्थिति है। UMIC (अपर मिडल इनकम कंट्री) का लेबल होने के बावजूद 52% परिवार स्वयं को गरीब मानते हैं।
वास्तविक प्रति व्यक्ति आय जो असमानता को ध्यान में रखती है । भारत में औसत GNI से कहीं कम हो सकती है। श्रीलंका,वियतनाम और फिलीपींस का विश्व बैंक की अपर मिडल इनकम श्रेणी में शामिल होना उनकी आर्थिक प्रगति और स्थिरता का प्रमाण है। वियतनाम की निर्यात-संचालित वृद्धि,फिलीपींस का व्यापक आर्थिक विस्तार और श्रीलंका का संकट से उबरना । ये तीनों अलग-अलग राहें हैं । जो एक ही मंजिल तक पहुँची हैं। भारत का लोअर मिडल इनकम में बने रहना उसकी विशाल जनसंख्या और प्रति व्यक्ति आय के निम्न स्तर को दर्शाता है। जब तक प्रति व्यक्ति आय में ठोस वृद्धि नहीं होती तब तक भारत विश्व बैंक की वर्गीकरण प्रणाली में पीछे रहेगा । चाहे GDP कितनी भी बड़ी क्यों न हो। (Photos Courtesy Social media and AI)
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