*वित्तीय संकट में संयुक्त राष्ट्र,अमेरिका और चीन के बकाया के कारण क्या कंगाल होने वाला है UN?*/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*वित्तीय संकट में संयुक्त राष्ट्र,अमेरिका और चीन के बकाया के कारण क्या कंगाल होने वाला है UN?*/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई 


(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई)संयुक्त राष्ट्र (UN) इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर वित्तीय संकटों में से एक से गुजर रहा है। ''वॉल स्ट्रीट जर्नल'' (WSJ) की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं अमेरिका और चीन द्वारा अपने अनिवार्य वित्तीय योगदान (Assessments) का भुगतान न करने या उसमें देरी करने के कारण वैश्विक संस्था दिवालियापन के कगार पर पहुंच गई है। इस गंभीर स्थिति और इसके पीछे के गणित को विस्तार से निम्नलिखित बिंदुओं के जरिए समझा जा सकता है । अगस्त के मध्य तक नकदी खत्म होने का खतरा है। संयुक्त राष्ट्र के सचिवालय ने चेतावनी जारी की है कि यदि सदस्य देशों ने तुरंत अपने बकाए का भुगतान नहीं किया तो अगस्त के मध्य तक संगठन के पास परिचालन (Operations) के लिए नकदी (Cash) पूरी तरह खत्म हो जाएगी। इसका सीधा असर यूएन के रोजमर्रा के कामकाज, कर्मचारियों के वेतन और वैश्विक स्तर पर चल रहे शांति मिशनों पर पड़ेगा। अमेरिका और चीन का सबसे बड़ा बकाया है। संयुक्त राष्ट्र का बजट मुख्य रूप से उसके सदस्य देशों के योगदान पर निर्भर करता है। जिसे देश की जीडीपी और आर्थिक क्षमता के आधार पर तय किया जाता है। वर्तमान संकट की मुख्य वजह दो सबसे बड़े योगदान कर्ताओं का रुख है। 


अमेरिका पर बकाया देखें तो संयुक्त राष्ट्र का सबसे बड़ा देनदार अमेरिका है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका पर यूएन का $4 बिलियन (4 अरब डॉलर) से अधिक का बकाया है। अमेरिका अक्सर अपनी आंतरिक राजनीतिक प्राथमिकताओं या यूएन की कुछ नीतियों से असहमति के कारण भुगतान में देरी करता है। चीन पर बकाया देखें तो दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता चीन है। चीन पर भी संयुक्त राष्ट्र का $455 मिलियन (45.5 करोड़ डॉलर) बकाया है। इन दोनों महाशक्तियों द्वारा फंड रोके जाने से यूएन का "कैश फ्लो"पूरी तरह ठप हो गया है।


 संयुक्त राष्ट्र के बजट की व्यवस्था क्या है?यूएन का बजट दो मुख्य भागों में बंटा होता है।"नियमित बजट"(Regular Budget) जो न्यूयॉर्क मुख्यालय और दुनिया भर के कार्यालयों को चलाने के लिए होता है और "शांति सेना बजट" (Peacekeeping Budget) जो दुनिया के विवादित क्षेत्रों में तैनात यूएन शांति सैनिकों के खर्चों के लिए होता है। सबसे बड़ा असर देखें तो जब अमेरिका और चीन जैसे देश अपने हिस्से का भुगतान नहीं करते तो यूएन को अपने ''नियमित बजट'' को चालू रखने के लिए ''शांति सेना बजट'' से पैसे उधार लेने पड़ते हैं। अब स्थिति यह है कि दोनों ही फंड खाली होने की कगार पर हैं। इस संकट का वैश्विक असर क्या होगा? वह देखें तो अगर यूएन दिवालिया होता है या उसके पास नकदी खत्म होती है, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। जैसे कि वैश्विक शांति मिशनों में रुकावट पैदा हो सकती है। अफ्रीका और मिडिल ईस्ट जैसे अशांत क्षेत्रों में तैनात शांति सेनाओं को वापस बुलाना पड़ सकता है या उनका खर्च कम करना पड़ सकता है। मानवीय सहायता पर ब्रेक लग सकती है। भुखमरी, शरणार्थी संकट और महामारियों से लड़ रहे यूएन के विभिन्न संगठन (जैसे UNICEF,WHO या WFP) फंड की कमी से जूझने लगेंगे। कर्मचारियों की छंटनी और कटौती करनी पड़ सकती है। यूएन को अपने आधिकारिक दौरों,सम्मेलनों और अनुवाद सेवाओं में भारी कटौती करनी पड़ेगी। (Photos Courtesy Social media)

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