*RBI MPC Meeting: आम जनता को बड़ी राहत,आरबीआई ने लगातार सातवीं बार रेपो रेट को 5.25% पर रखा बरकरार*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*RBI MPC Meeting: आम जनता को बड़ी राहत,आरबीआई ने लगातार सातवीं बार रेपो रेट को 5.25% पर रखा बरकरार*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
(मुंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई) भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट को स्थिर रखने के फैसले को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अपनी हालिया समीक्षा बैठक में आम जनता और होम-कार लोन लेने वालों को बड़ी राहत दी है। आरबीआई गवर्नर ने घोषणा की है कि इस बार भी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है और इसे 5.25%पर बरकरार रखा जाएगा।इस फैसले का सीधा मतलब यह है कि आम जनता की बैंक लोन की ईएमआई (EMI) में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। आइए विस्तार से समझते हैं कि आरबीआई ने यह फैसला क्यों लिया और इसके पीछे की आर्थिक वजहें क्या हैं। रेपो रेट क्या है और इसका आपकी EMI पर क्या असर होता है? रेपो रेट (Repo Rate) वह दर होती है।
जिस पर वाणिज्यिक बैंक जैसे SBI, HDFC,ICICI अपनी फौरी जरूरतों के लिए भारतीय रिजर्व बैंक से कर्ज लेते हैं। उसका बढ़ोतरी न होने का फायदा देखें तो जब रेपो रेट स्थिर रहता है तो बैंकों के लिए आरबीआई से मिलने वाला फंड महंगा नहीं होता। इसके परिणामस्वरूप बैंक अपने ग्राहकों के लोन होम लोन,ऑटो लोन,पर्सनल लोन की ब्याज दरों में बढ़ोतरी नहीं करते हैं। जिससे आपकी ईएमआई स्थिर रहती है। आरबीआई ने क्यों नहीं बढ़ाया रेपो रेट?आरबीआई द्वारा नीतिगत दरों को यथावत रखने के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित आर्थिक कारक जिम्मेदार हैं। महंगाई दर में गिरावट और स्थिरता लाने के लिए आरबीआई का प्राथमिक लक्ष्य खुदरा महंगाई (CPI Inflation) को 4% के दायरे में रखना है। पिछले कुछ महीनों में महंगाई दर में लगातार गिरावट देखी गई है और यह आरबीआई के संतोषजनक दायरे में आ चुकी है। जब महंगाई नियंत्रण में होती है तो केंद्रीय बैंक को दरों में बढ़ोतरी करके इकोनॉमी को धीमा करने की जरूरत नहीं पड़ती। मजबूत आर्थिक विकास (GDP Growth Rate) भारतीय अर्थव्यवस्था वर्तमान में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। आरबीआई नहीं चाहता कि ब्याज दरों को बढ़ाकर आर्थिक विकास की इस रफ्तार (Momentum) को रोका जाए। दरों को स्थिर रखकर उद्योगों के लिए लोन लेना सुलभ बनाया गया है। जिससे निवेश और रोजगार को बढ़ावा मिले। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के मद्देनजर सतर्कता। दुनिया भर के प्रमुख केंद्रीय बैंक (जैसे यूएस फेडरल रिजर्व और यूरोपियन सेंट्रल बैंक) अपनी ब्याज दरों को लेकर सतर्क रुख अपना रहे हैं।
वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) और मंदी के खतरों को देखते हुए आरबीआई ने भारतीय बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए "रुको और देखो" (Wait and Watch) की नीति अपनाई है। लिक्विडिटी और कंजम्पशन (खपत) को बढ़ावा देने हेतु त्योहारी सीजन और घरेलू मांग को मजबूत बनाए रखने के लिए बाजार में पैसों का फ्लो (Liquidity) होना जरूरी है अगर रेपो रेट बढ़ाया जाता, तो लोन महंगे हो जाते और लोग खरीदारी कम कर देते। दरों को स्थिर रखकर आरबीआई ने कंजम्पशन को बूस्ट देने का प्रयास किया है। आगे की राह क्या हो सकती है?कब मिल सकती है ईएमआई से और राहत?आर्थिक जानकारों का मानना है कि अगर मानसून अच्छा रहता है और खाद्य पदार्थों की कीमतें स्थिर रहती हैं तो आने वाली तिमाहियों में महंगाई और कम हो सकती है। ऐसी स्थिति में, आरबीआई भविष्य की बैठकों में रेपो रेट में कटौती (Rate Cut) का फैसला ले सकता है। जिससे आपकी लोन की ईएमआई कम हो जाएगी फिलहाल दरों का न बढ़ना ही मिडिल क्लास के लिए एक बड़ी राहत है। (Photos Courtesy Social media)
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