*RBI का ECL फ्रेमवर्क:1 अप्रैल 2027 से बदलेगा लोन का गेम,730 से कम CIBIL वालों पर पड़ेगा भारी असर*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*RBI का ECL फ्रेमवर्क:1 अप्रैल 2027 से बदलेगा लोन का गेम,730 से कम CIBIL वालों पर पड़ेगा भारी असर*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
(मुंबई रिपोर्ट स्पर्श देसाई)अगर आप आने वाले दिनों में घर, कार या पढ़ाई के लिए लोन लेने की योजना बना रहे हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) 1 अप्रैल 2027 से एक नया नियम लागू करने जा रहा है। जिसे एक्सपेक्टेड क्रेडिट लॉस (ECL) फ्रेमवर्क कहा जा रहा है। इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा। खासकर उन पर जिनका CIBIL स्कोर 730 से कम है। क्या है RBI का ECL फ्रेमवर्क? उसे समझे तो मौजूदा व्यवस्था में बैंक तब जागते हैं जब कोई लोन पूरी तरह डूब जाता है या ग्राहक लगातार 90 दिनों तक EMI नहीं चुकाता। इसे एनपीए (Non-Performing Asset) घोषित करने के बाद बैंक नुकसान की भरपाई के लिए प्रावधान करते हैं लेकिन नए ECL नियम में यह पूरी प्रक्रिया बदल जाएगी। नए नियम के तहत बैंकों को अब लोन डूबने का इंतजार नहीं करना होगा। उन्हें पहले से ही अंदाजा लगाना होगा कि भविष्य में कौन सा लोन डिफॉल्ट हो सकता है और उसी हिसाब से पैसा अलग रखना होगा यानि बैंक अब "रिएक्टिव" के बजाय "फॉरवर्ड-लुकिंग" दृष्टिकोण अपनाएंगे।
RBI का मकसद बैंकिंग सिस्टम को मजबूत बनाना और भविष्य के जोखिमों के लिए पहले से तैयार रखना है। 730 का आंकड़ा क्यों है इतना अहम? वह जाने तो बैंक 730 या उससे अधिक CIBIL स्कोर वाले ग्राहकों को कम जोखिम वाला मानते हैं। वहीं 730 से कम स्कोर वाले लोगों को "हाई-रिस्क जोन" में रखा जाता है। आंकड़ों के मुताबिक भारत में लोन के लिए आवेदन करने वाले लगभग 62% लोगों का CIBIL स्कोर 730 से कम है। ऐसे में इस नियम का असर देश के एक बड़े तबके पर पड़ेगा। कम CIBIL स्कोर वालों पर क्या पड़ेगा असर? देखें तो ECL फ्रेमवर्क लागू होने के बाद बैंक लोन देने में और अधिक सख्ती बरत सकते हैं। कम CIBIL स्कोर वाले लोगों को तीन तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। लोन मिलना मुश्किल होगा । बैंक कमजोर क्रेडिट प्रोफाइल वालों को लोन देने से कतराएंगे। ब्याज दरें बढ़ सकती हैं अगर लोन मिला भी तो बैंक ज्यादा ब्याज वसूल सकते हैं। अतिरिक्त गारंटी की मांग के मद्देनजर बैंक ज्यादा कोलेट्रल या गारंटी मांग सकते हैं।
क्या RBI ने कोई न्यूनतम CIBIL स्कोर तय किया है? उसके बारे में जाने तो विशेषज्ञों का कहना है कि RBI ने लोन पात्रता के लिए कोई न्यूनतम CIBIL स्कोर निर्धारित नहीं किया है। ICRA के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अनिल गुप्ता के अनुसार क्रेडिट स्कोर पहले से ही लोन देने के फैसलों का एक हिस्सा हैं और हर बैंक अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार फैसला करता है हालांकि ECL फ्रेमवर्क के तहत बैंकों पर अतिरिक्त प्रावधान का दबाव बढ़ेगा। जिससे वे कम स्कोर वालों को लोन देने में सावधानी बरतेंगे। इसका बैंकों पर क्या होगा असर? वह देखें तो नए नियम से बैंकों को अपने लोन पोर्टफोलियो का उचित मूल्यांकन करना होगा। उद्योग के अनुमानों के मुताबिक इससे बैंकिंग सेक्टर के मुनाफे पर लगभग 42,000 करोड़ रुपये का असर पड़ सकता है। उदाहरण के लिए 25 लाख रुपये के होम लोन पर अगर कोई ग्राहक 30 दिनों तक EMI चूकता है तो प्रावधान करीब 10,000 रुपये से बढ़कर 25,000 रुपये हो सकता है।
31 से 60 दिनों की देरी पर यह 1.25 लाख रुपये तक और 90 दिनों से अधिक की देरी पर 5 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। क्या करें अभी से? वह जाने तो अगर आपका CIBIL स्कोर 730 से कम है तो अभी से अपनी क्रेडिट प्रोफाइल सुधारने पर ध्यान दें। समय पर EMI और क्रेडिट कार्ड के बिल चुकाएं,कर्ज का बोझ कम रखें और अपनी आय स्थिरता बनाए रखें। आगामी साल 2027 का यह बदलाव लोन की दुनिया में एक नया अध्याय शुरू करेगा। जहां अच्छा CIBIL स्कोर ही आपकी सबसे बड़ी संपत्ति होगी।( Photos Courtesy Social media)
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