*अमेरिका-ईरान शांति समझौता: ट्रंप और पेजेशकियन ने वर्साय में ऐतिहासिक MoU पर किए हस्ताक्षर*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*अमेरिका-ईरान शांति समझौता: ट्रंप और पेजेशकियन ने वर्साय में ऐतिहासिक MoU पर किए हस्ताक्षर*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई)अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने बुधवार को एक 14-सूत्री समझौता ज्ञापन (Memorandum of Understanding - MoU) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता फ्रांस के ऐतिहासिक शहर वर्साय के पैलेस ऑफ वर्साय में G7 शिखर सम्मेलन के दौरान एक रात्रिभोज में किया गया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि यह स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त करता है और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की अनुमति देता है। व्हाइट हाउस ने पुष्टि की कि ईरानी राष्ट्रपति ने भी इस दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए हैं। पाकिस्तान ने इस समझौते में मध्यस्थता की भूमिका निभाई। 14 सूत्री समझौता: क्या है इसमें? वह जाने तो यह MoU एक अंतरिम समझौता है। जो अगले 60 दिनों में अंतिम शांति समझौते की नींव रखेगा। इसके प्रमुख बिंदु देखें तो युद्धविराम और संघर्ष की समाप्ति।
पॉइंट 1: अमेरिका, ईरान और उसके सहयोगी लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को 'तत्काल और स्थायी' रूप से समाप्त करेंगे। ईरान ने स्पष्ट किया है कि लेबनान में इजरायली सैन्य अभियान जारी रहना 'समझौते का उल्लंघन' माना जाएगा। संप्रभुता का सम्मान अहम रहेगी। पॉइंट 2: दोनों देश एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करेंगे तथा आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप से बचेंगे। 60 दिनों की वार्ता अवधि तय हुई हैं।पॉइंट 3: दोनों पक्ष अधिकतम 60 दिनों में अंतिम समझौते पर बातचीत करेंगे। जिसे आपसी सहमति से बढ़ाया जा सकता है। बंदरगाहों पर से नौसैनिक नाकेबंदी हटेगी। पॉइंट 4: अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर अपनी नौसैनिक नाकेबंदी 30 दिनों के भीतर पूरी तरह समाप्त कर देगा। अब होर्मुज जलडमरूमध्य खुलेगा। पॉइंट 5: ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से वाणिज्यिक जहाजों को बिना किसी शुल्क के सुरक्षित मार्ग प्रदान करेगा। यातायात 'तत्काल' शुरू हो जाएगा। ईरान के पुनर्निर्माण के लिए $300 बिलियन का मुआवजा। पॉइंट 6: अमेरिका और क्षेत्रीय भागीदार ईरान के पुनर्निर्माण के लिए $300 बिलियन की योजना विकसित करेंगे हालांकि अमेरिका इस फंड में कोई योगदान नहीं देगा। ईरान पर से आर्थिक प्रतिबंध हटेंगे। पॉइंट 7: अमेरिका ईरान के खिलाफ सभी आर्थिक प्रतिबंधों को समाप्त कर देगा, जिसमें UNSC के प्रतिबंध और अमेरिका द्वारा एकतरफा लगाए गए प्रतिबंध शामिल हैं। ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होंगे।पॉइंट 8: ईरान परमाणु हथियार न बनाने या न खरीदने पर सहमत हो गया है। संवर्धित यूरेनियम का निपटान IAEA की देखरेख में किया जाएगा। दौरान यथास्थिति बनी रहेगी। पॉइंट 9 और 10: जब तक संवर्धित यूरेनियम का निपटान नहीं हो जाता, दोनों पक्ष अपने परमाणु कार्यक्रम की 'यथास्थिति' बनाए रखेंगे। अमेरिका तेल निर्यात के लिए छूट जारी करेगा। दौरान फ्रीज फंड जारी होंगे। पॉइंट 11: अमेरिका ईरान के फ्रीज किए गए फंड (लगभग $24 बिलियन) को जारी करने का जिम्मा लेता है। निगरानी और अंतिम मंजूरी के मद्देनजर पॉइंट 12-14: समझौते के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए एक तंत्र स्थापित किया जाएगा।अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) से पारित कराया जाएगा। जिसके बाद यह पीस डील पक्की हो जाएगी।आगे की राह के बारे में जाने तो MoU पर हस्ताक्षर होने के बाद अब 60 दिनों की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। इस अवधि में दोनों पक्ष अंतिम समझौते के बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा करेंगे।
ट्रंप ने कहा कि समझौते का मूल उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार प्राप्त करने से रोकना है हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि MoU कई महत्वपूर्ण मुद्दों को आगामी वार्ता पर छोड़ देता है। अमेरिका-ईरान युद्ध 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था। इस समझौते को "इस्लामाबाद मेमोरेंडम" भी कहा जा रहा है। अब देखना यह होगा कि क्या 60 दिनों की वार्ता के बाद यह ऐतिहासिक शांति समझौता स्थायी शांति में बदल पाता है। यह ऐतिहासिक समझौता माना जाता है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच एक ऐतिहासिक Memorandum of Understanding (MoU) साइन हुआ है। पैलेस आफ वर्साय में हस्ताक्षर हुए हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्रांस में G7 शिखर सम्मेलन के समापन के बाद पैलेस ऑफ वर्साय (Palace of Versailles) में एक भव्य रात्रिभोज के दौरान इस समझौते की हार्ड कॉपी पर व्यक्तिगत रूप से हस्ताक्षर किए हैं।
यह डिजिटल सिग्नेचर हैं। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इस समझौते पर इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल रूप से हस्ताक्षर किए हैं। जिसकी पुष्टि ईरान के विदेश मंत्रालय ने की है। मुंबई या अंतरराष्ट्रीय दैनिक समाचारों जैसे CNN या DW ने इस वास्तविक खबर को प्रमुखता से छापा है कि यूद्धविराम आगे बढ़ा दिया गया है। (Photos Courtesy Social media &AI)
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