*Loneliness Crisis in India:दुनिया में दूसरा सबसे अकेला देश भारत,58% भारतीय रोज़ करते हैं अकेलेपन का सामना,जाने क्यों बढ़ रहा यह संकट?*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*Loneliness Crisis in India:दुनिया में दूसरा सबसे अकेला देश भारत,58% भारतीय रोज़ करते हैं अकेलेपन का सामना,जाने क्यों बढ़ रहा यह संकट?*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई 


(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई) सबसे ज़्यादा अकेलापन महसूस करने वाले देशों में दूसरे नंबर पर है भारत। एक स्टडी में यह बताया गया है। JB.com द्वारा जून-2026 में जारी एक वैश्विक अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार भारत दुनिया का दूसरा ऐसा देश है । जहां सर्वाधिक लोग अकेलापन महसूस करते हैं। कुल 36 देशों के इस अध्ययन में तुर्की पहले,ब्राज़ील तीसरे,साउथ अफ्रीका चौथे और दक्षिण कोरिया पांचवें स्थान पर है। स्टडी में 58% भारतीयों ने अकेलापन और 34% ने अलग- थलग महसूस करने की बात कही। इस सूची में उज़्बेकिस्तान और नीदरलैंड को सबसे कम अकेलापन महसूस करने वाले देशों में पाया गया है। जबकि अकेलेपन की मार में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर है । 58% लोग महसूस करते हैं अकेलापन। जून 2026 में जेबी.कॉम (JB.com) द्वारा जारी एक चौंकाने वाली वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार भारत दुनिया का दूसरा ऐसा देश है जहाँ सबसे ज़्यादा लोग अकेलापन महसूस करते हैं। यह अध्ययन 36 देशों में किया गया। जिसमें तुर्की पहले,भारत दूसरे,ब्राज़ील तीसरे,दक्षिण अफ्रीका चौथे और दक्षिण कोरिया पांचवें स्थान पर रहे। स्टडी के मुताबिक 58% भारतीयों ने अकेलापन महसूस करने की बात कबूली। जबकि 34% ने खुद को दूसरों से अलग-थलग (isolated) पाया यानि हर तीन में से एक भारतीय सामाजिक रूप से कटा हुआ महसूस कर रहा है। सबसे कम अकेलापन उज़्बेकिस्तान और नीदरलैंड में पाया गया। 


क्यों बढ़ रहा है अकेलेपन का यह संकट? उस पर गौर करें तो विशेषज्ञों के अनुसार भारत में अकेलेपन की यह बढ़ती लहर कई कारणों से उपजी है। तेज़ शहरीकरण और एकल परिवार का मुद्दा अहम है। बड़े शहरों में प्रवास,न्यूक्लियर फैमिली और "जॉइंट फैमिली सिस्टम" का कमजोर पड़ना। ये सब लोगों को भावनात्मक सहारे से दूर कर रहे हैं। डिजिटल जीवन बनाम रियल कनेक्शन देखें तो सोशल मीडिया पर हजारों "फ्रेंड्स" होने के बावजूद वास्तविक बातचीत और साझा पल घट गए हैं। काम का दबाव और करियर सेंट्रिक जीवन के मद्देनजर लंबे वर्किंग आवर्स,हाई स्ट्रेस और निजी ज़िंदगी के लिए समय न होना। यह अकेलेपन को और बढ़ाता है।


 इसी दौरान मानसिक स्वास्थ्य पर चुप्पी क्यों है?भारत में अकेलापन या डिप्रेशन को कमजोरी मानकर नज़रअंदाज कर दिया जाता है। जिससे समस्या गंभीर रूप ले लेती है। क्या कहती है रिपोर्ट का भारतीय पहलू? वह जाने तो सबसे दिलचस्प बात यह है कि भारत जहाँ"दुनिया का सबसे युवा देश"होने का गौरव रखता है। वहीं इस अध्ययन ने यह भी उजागर किया कि 18-30 वर्ष के युवाओं में अकेलापन औसतन 60% से अधिक देखा गया यानि सबसे ज़्यादा अकेला महसूस करने वाला वर्ग हमारी युवा पीढ़ी है। वहीं 60+ आयु वर्ग के वरिष्ठ नागरिक भी बच्चों के विदेश या दूसरे शहरों में जाने के बाद गहरे अकेलेपन का शिकार हो रहे हैं। अब क्या हो सकता है इसका हल? वह देखें तो मनोवैज्ञानिक सलाह देते हैं कि भारत को अपनी"सामूहिकता की संस्कृति"(collectivist culture) को फिर से जीवित करना होगा।


 छोटे प्रयास जैसे परिवार के साथ बिना फोन के समय बिताना,पड़ोसियों से बातचीत,कम्युनिटी क्लब या स्वयंसेवी कार्य अकेलेपन को काफी हद तक कम कर सकते हैं। सरकार और कंपनियों को भी वर्क-लाइफ बैलेंस,मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन और सामुदायिक केंद्रों को बढ़ावा देना होगा। यह रिपोर्ट एक सचेत करने वाला संकेत है कि आर्थिक तरक्की और डिजिटल क्रांति के बीच हम अपने रिश्तों की गर्माहट खोते जा रहे हैं। अकेलापन सिर्फ एक भावना नहीं बल्कि एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बन गया है।( Photos Courtesy Social media)

~ब्यूरो रिपोर्ट स्पर्श देसाई √•Metro City Post• Digital World• #LonelinessInIndia #अकेलापन #MentalHealthMatters #IndiaSecondMostLonely #GlobalLonelinessStudy #JBComReport #LonelinessCrisis #मानसिकस्वास्थ्य #StopFeelingAlone #ReconnectIndia



Comments

Popular posts from this blog

*आज की देश राज्यों से बड़ी खबरें..* *25 - अप्रैल - शनिवार*

*मानसून 2026 अपडेट:बंगाल की खाड़ी का लो-प्रेशर एरिया कमजोर लेकिन अंडमान सागर में मानसून की एंट्री तय*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*जॉर्जिया में ठुकराया,भारत में गले लगाया: क्या AI डेटा सेंटर्स की प्यास बुझाएगा हिंदुस्तान का पानी?*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई