*अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) का सफर 2030 में होगा खत्म: प्रशांत महासागर बनेगा आखिरी ठिकाना, नासा खर्च करेगी ₹9,500 करोड़*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) का सफर 2030 में होगा खत्म: प्रशांत महासागर बनेगा आखिरी ठिकाना, नासा खर्च करेगी ₹9,500 करोड़*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई 


(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई)अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने आधिकारिक तौर पर घोषणा कर दी है कि अंतरिक्ष में पिछले ढाई दशकों से मानवता का ठिकाना रहा अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) साल 2030 के अंत तक सेवानिवृत्त (Retire) हो जाएगा। लगातार सामने आ रही तकनीकी खामियों और संरचनात्मक कमियों के कारण इसे अब और आगे चलाना संभव नहीं है। नासा इस महाकाय स्टेशन को सुरक्षित रूप से धरती पर वापस लाने और इसे प्रशांत महासागर में क्रैश कराने की योजना पर काम कर रही है। इस पूरी डी-ऑर्बिटिंग प्रक्रिया पर लगभग 1 अरब डॉलर यानि करीब 9,500 करोड़ रुपये का भारी- भरकम खर्च आएगा।


 दौरान लगातार बढ़ती खामियां ही बन गई बड़ी चुनौती। साल 1998 में लॉन्च किए गए इस स्पेस स्टेशन की निर्धारित उम्र केवल 15 साल थी लेकिन यह उम्मीद से कहीं ज्यादा समय तक सेवा दे चुका है। पिछले कुछ वर्षों से इसके रूसी मॉड्यूल ''ज्वेज्दा'' (Zvezda) में लगातार हवा का रिसाव (Air Leak) हो रहा है। नासा और रूसी अंतरिक्ष एजेंसी ''रोसकोस्मोस'' (Roscosmos) के कई प्रयासों के बाद भी इस दरार को पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सका है। इसके अलावा अंतरिक्ष के मलबे (Space Debris) से टकराने का खतरा और उपकरणों का पुराना होना अब अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के लिए बड़ा जोखिम बन गया है।


 प्रशांत महासागर का ''पॉइंट नेमो'' बनेगा कब्रगाह। नासा ने साफ किया है कि स्पेस स्टेशन को अंतरिक्ष में लावारिस नहीं छोड़ा जा सकता क्योंकि इससे अन्य उपग्रहों को खतरा होगा। इसे नियंत्रित तरीके से धरती के वायुमंडल में वापस लाया जाएगा। भारी घर्षण के कारण इसका अधिकांश हिस्सा हवा में ही जलकर खाक हो जाएगा लेकिन बचे हुए भारी मलबे को प्रशांत महासागर के सबसे सुनसान इलाके ''पॉइंट नेमो'' (Point Nemo) में गिराया जाएगा। इस जगह को ''अंतरिक्ष यानों का कब्रिस्तान'' भी कहा जाता है क्योंकि यहां इंसानी आबादी दूर-दूर तक नहीं है। इसी दौरान स्पेसएक्स बनाएगी ''स्पेस टग''। कक्षा से नीचे खींचने के लिए नासा ने एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स -SpaceX को एक विशेष ''यूएस डी-ऑर्बिट व्हीकल''-Space Tug विकसित करने का ठेका दिया है। यह शक्तिशाली अंतरिक्ष यान ISS को अपनी कक्षा से धक्का देकर सुरक्षित रूप से पृथ्वी के वातावरण की ओर धकेलेगा। साल 2030 के बाद अंतरिक्ष अनुसंधान का काम पूरी तरह निजी कंपनियों के कमर्शियल स्पेस स्टेशनों को सौंप दिया जाएगा।


अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन -ISS के आगामी साल 2030 में होने वाले अंत इसके लिए स्पेसएक्स -SpaceX के डी-ऑर्बिट व्हीकल और ''पॉइंट नेमो'' के इतिहास से जुड़ी हर एक महत्वपूर्ण जानकारी देखें तो और अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन -ISS का इतिहास और उपलब्धियां जाने तो लांच और लागत से इस महाकाय स्पेस स्टेशन को साल 1998 में लॉन्च किया गया था। इसे बनाने में लगभग 150 बिलियन डॉलर यानि करीब 12.5 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत आई थी। जिसके चलते यह मानव इतिहास के सबसे महंगे प्रोजेक्ट्स में से एक है। इसमें वैश्विक सहयोग जाने तो इसे दुनिया की 5 प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसियों नासा NASA,रोसकोस्मोस -रूस,जाक्सा- JAXA-जापान, सीएसए -कनाडा और ईएसए -यूरोप ने मिलकर संचालित किया है साथ में वैज्ञानिक अनुसंधान देखें तो इस फुटबॉल मैदान जितने बड़े स्टेशन पर अब तक 3,300 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोग किए जा चुके हैं।


 दौरान अब अंतरिक्ष यात्रियों का सफर देखें तो अब तक 19 देशों के 250 से ज्यादा एस्ट्रोनॉट्स यहां आ चुके हैं। भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला भी जून 2025 में ''एक्सिओम-4'' मिशन के तहत इस स्टेशन का दौरा कर चुके हैं। स्पेसएक्स का ''डी-ऑर्बिट व्हीकल'' (Space Tug) डिजाइन और कॉन्ट्रैक्ट के तहत। नासा ने ISS को सुरक्षित रूप से उसकी कक्षा से नीचे धकेलने के लिए एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) को 843 मिलियन डॉलर  यानि करीब 7,000 करोड़ रुपये का ठेका दिया है। इसके अतिरिक्त लॉन्चिंग का खर्च अलग से होगा।( Photos Courtesy Social media)


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