*EU Sanctions on India: रूस की मदद पर यूरोपीय यूनियन सख्त,भारत-चीन समेत 50 कंपनियों पर लगेगा बैन!*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*EU Sanctions on India: रूस की मदद पर यूरोपीय यूनियन सख्त,भारत-चीन समेत 50 कंपनियों पर लगेगा बैन!*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई 


(मुंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई)पाकिस्तान से लौटीं हैं EU नेता। अब भारत पर होगा एक्शन । 50 कंपनियां होंगी बैन? यूरोपीय यूनियन (EU) रूस की ''वॉर इकोनॉमी'' को कमजोर करने के लिए 21वां प्रतिबंध पैकेज ला रहा है। जिसमें भारत, चीन,तुर्किये समेत 6 देशों की करीब 50 कंपनियों पर एक्सपोर्ट कंट्रोल लगेगा। यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्षा मिस काजा कलास ने कहा कि ब्रसेल्स पिछले दो सालों में अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है। यह कदम रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था की नींव को ढहाने के लिए है।


 यूरोपीय यूनियन (EU) द्वारा रूस के खिलाफ लाए जा रहे नए प्रतिबंध पैकेज और उसमें भारत की कंपनियों के शामिल होने की खबर इस समय काफी चर्चा में है। आइए इस पूरे मामले को बिल्कुल आसान शब्दों में और सटीक तरीके से समझते हैं। दरअसल मामला क्या है? (The Core Issue) वह  देखें तो यूक्रेन युद्ध के बाद से यूरोपीय यूनियन लगातार रूस पर आर्थिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। इसी सिलसिले में EU अब अपना 21वां प्रतिबंध पैकेज (21st Sanctions Package) ला रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य रूस की ''वॉर इकोनॉमी'' (युद्ध से जुड़ी अर्थव्यवस्था) की कमर तोड़ना है ताकि उसे युद्ध के लिए जरूरी संसाधन और फंडिंग न मिल सके। इससे भारत और अन्य देशों पर इसका क्या असर होगा?


इस नए पैकेज के तहत सिर्फ रूस ही नहीं बल्कि उन देशों की कंपनियों को भी निशाना बनाया जा रहा है। जो परोक्ष (indirectly) रूप से रूस की मदद कर रही हैं। इसके मद्देनजर 50 कंपनियों पर गाज। भारत,चीन, तुर्किये,संयुक्त अरब अमीरात (UAE), किर्गिस्तान और कजाकिस्तान जैसे 6 देशों की लगभग 50 कंपनियों को इस प्रतिबंध सूची में शामिल करने की तैयारी है।


 इन देशों पर एक्सपोर्ट कंट्रोल कानून के तहत निर्यात पर रोक लगेगी इन कंपनियों पर ''एक्सपोर्ट कंट्रोल'' लगाया जाएगा। इसका मतलब है कि यूरोपीय देश अब इन कंपनियों को ऐसी तकनीक या सामान नहीं बेच पाएंगे, जिसका इस्तेमाल रूस अपनी सेना या युद्ध में कर सकता है । जैसे माइक्रोचिप्स, इलेक्ट्रॉनिक्स या केमिकल इत्यादि। EU का मानना है कि ये कंपनियां यूरोप से सामान खरीदकर उसे प्रतिबंधों से बचते हुए (Circumvention) रूस तक पहुंचा रही हैं।




मिस काजा कलास का बयान क्यों अहम है? वह देखें तो यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कलास (Kaja Kallas) ने हाल ही में पाकिस्तान का दौरा किया था और वहां से लौटने के बाद उन्होंने इस कड़े कदम के संकेत दिए। उन्होंने साफ किया है कि ब्रसेल्स (EU मुख्यालय) पिछले दो सालों में अब तक का सबसे बड़ा और सबसे सख्त प्रतिबंध लगाने जा रहा है। इसका मकसद रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था की नींव को पूरी तरह से हिला देना है। (Photos Courtesy Social media)

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