*इंडियन ओशन डाइपोल:अल नीनो के सामने मानसून की ढाल,कैसे यह समुद्री घटना भारत को सूखे से बचा सकती है?*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*इंडियन ओशन डाइपोल:अल नीनो के सामने मानसून की ढाल,कैसे यह समुद्री घटना भारत को सूखे से बचा सकती है?*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई) क्या है इंडियन ओशन डाइपोल जो अल नीनो से भारत के मॉनसून को बचा सकता है?इंडियन ओशन डाइपोल एक जलवायु पैटर्न है। जो हिंद महासागर में दिखता है। इसके सकारात्मक चरण में गर्म पानी हिंद महासागर के पश्चिमी हिस्से की ओर जाता है और पूर्वी हिस्से में ठंडा पानी सतह पर आता है। तापमान के अंतर से हवा का पैटर्न बदलता है और भारत की ओर अधिक नमी पहुंचती है। जिससे अधिक बारिश होती है हालांकि अल नीनो ने भारत में दी दस्तक है। 15 जून तक पूर्वी प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो ने एक बार फिर भारतीय मानसून पर संकट के बादल मढ़ दिए हैं। ऐतिहासिक आंकड़े बताते हैं कि अल नीनो के वर्षों में अक्सर भारत में कम बारिश और सूखे की स्थिति बनती है लेकिन मौसम वैज्ञानिकों के बीच एक उम्मीद की किरण है ।
इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) नाम की समुद्री घटना जो अल नीनो के दुष्प्रभावों को बेअसर कर सकती है और मानसून को बचा सकती है। क्या है इंडियन ओशन डाइपोल? वह देखें तो IOD एक जलवायु पैटर्न है। जो हिंद महासागर के पश्चिमी (अरब सागर के पास) और पूर्वी (इंडोनेशिया के तट) हिस्सों के बीच समुद्र की सतह के तापमान में अंतर पर आधारित है। सकारात्मक IOD में पश्चिमी हिंद महासागर में सामान्य से अधिक गर्म पानी और पूर्वी हिस्से में सामान्य से अधिक ठंडा पानी। इससे पश्चिमी हिस्से में बादल और नमी सघन होती है। जो भारत की ओर चलने वाली मानसूनी हवाओं को मजबूत करती है। यही वह चरण है जो भारत में अच्छी बारिश लाता है। नकारात्मक IOD से इसकी विपरीत स्थिति में भारत में सूखा पड़ने की आशंका बढ़ जाती है।
अल नीनो का खतरा क्या है? वो जाने तो अल नीनो प्रशांत महासागर में पैदा होता है। यह भारत के ऊपर की हवाओं को दबा देता है। जिससे मानसूनी नमी कमजोर पड़ती है। आमतौर पर अल नीनो के सक्रिय वर्षों में भारत में औसत से 10-15% कम वर्षा होती है। दौरान कैसे IOD बन जाता है "रक्षक"?उस बात को समझे तो यहीं आता है इंडियन ओशन डाइपोल का महत्व। जब अल नीनो और सकारात्मक IOD दोनों एक साथ सक्रिय होते हैं तो ये एक-दूसरे के प्रभाव को संतुलित करते हैं। सकारात्मक IOD हिंद महासागर से भारत की ओर नमी पहुंचाने वाली हवाओं को ताकत देता है। जिससे अल नीनो के कारण उत्पन्न सूखे की स्थिति काफी हद तक कम हो जाती है। उदाहरण के लिए साल 1997, साल 2006 और साल 2018 में सकारात्मक IOD ने अल नीनो के बावजूद भारत को सामान्य से बेहतर मानसून दिलाने में मदद की थी। वर्तमान स्थिति का विश्लेषण जाने तो इस बार अल नीनो ने दस्तक दे दी है लेकिन मौसम एजेंसियों के अनुसार हिंद महासागर में सकारात्मक IOD के विकसित होने के संकेत हैं।
यदि IOD पर्याप्त मजबूत रहता है तो यह अल नीनो के नकारात्मक असर को काटते हुए भारत के मानसून को बचा सकता है। केंद्र सरकार और कृषि वैज्ञानिक बारीकी से निगरानी कर रहे हैं क्योंकि इसका सीधा असर खरीफ फसलों और खाद्य सुरक्षा पर पड़ता है। आखिर में निष्कर्ष यह है कि अल नीनो अकेले निर्णायक नहीं है। इंडियन ओशन डाइपोल की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है । यह "मानसून का संरक्षक" या "विनाशक" हो सकता है। फिलहाल उम्मीद सकारात्मक IOD पर टिकी है।( Photos Courtesy Social media)
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