*आठ अमेरिकी राष्ट्रपति और उनके फैसले: हिरोशिमा से गाजा तक लाखों निर्दोषों की मौत का सिलसिला*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*आठ अमेरिकी राष्ट्रपति और उनके फैसले: हिरोशिमा से गाजा तक लाखों निर्दोषों की मौत का सिलसिला*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई)दोस्तों इस दुनिया में कुछ ऐसे खतरनाक लोग हुए हैं। जिन्होंने ऐसे फैसले लिए जिनका खामियाजा आज भी हम सब भुगत रहे हैं। ये सभी आठ अमेरिकी राष्ट्रपति थे। हैरी ट्रूमैन, लिंडन बी. जॉनसन, जॉर्ज डब्ल्यू.बुश, जिम्मी कार्टर,रोनाल्ड रैगन, बराक ओबामा,जो बाइडन और आठवें डोनल्ड ट्रंप। इनके फैसलों ने जापान,वियतनाम,इराक, अफगानिस्तान,ईरान और गाजा के साथ ईरान में लाखों निर्दोष नागरिकों को मौत के घाट उतार दिया। आइए, इनके कारनामों की पड़ताल करते हैं।
सबसे पहले अमरीकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन (1945) का हिरोशिमा-नागासाकी पर परमाणु हमला। अगस्त 1945 में अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने इतिहास का सबसे विनाशकारी फैसला लिया था। 6 अगस्त 1945 को हिरोशिमा पर"लिटिल बॉय"नामक यूरेनियम बम गिराया गया था। जिससे लगभग 70,000 लोग तुरंत मारे गए थे और इतने ही घायल हुए थे। तीन दिन बाद 9 अगस्त को नागासाकी पर "फैट मैन" बम गिराया गया था। जिसमें लगभग 40,000 लोग मारे गए थे। कुल मिलाकर लगभग 1,20,000 से 2,00,000 लोग मारे गए थे। ट्रूमैन ने खुद इसे "युद्ध का एक हथियार" बताया और कहा कि उन्हें इस पर कोई पछतावा नहीं है हालाँकि कई इतिहासकार इसे युद्ध अपराध मानते हैं।
उसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति लिंडन बी.जॉनसन (1964) ने वियतनाम युद्ध किया और झूठी खुफिया जानकारी फैलाई। साल 1964 में राष्ट्रपति लिंडन बी. जॉनसन ने "टोंकिन खाड़ी" की घटना के आधार पर वियतनाम में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप को बढ़ावा दिया था। बाद में यह साबित हुआ कि 4 अगस्त 1964 को हुए दूसरे हमले की खुफिया जानकारी फर्जी थी। NSA के इतिहासकार रॉबर्ट हैन्योक ने पुष्टि की कि"उस रात कोई हमला नहीं हुआ"। इस झूठ के आधार पर जॉनसन ने कांग्रेस से युद्ध की मंजूरी ली थी। इस युद्ध में 58,000 अमेरिकी और लगभग 30 लाख वियतनामी मारे गए थे। अनुमानतः20 लाख से अधिक वियतनामी नागरिक मारे गए थे।
तिसरे नंबर पर है अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू.बुश। उन्होंने भी( साल 2003) इराक पर हमला किया और झूठे WMD दावे भी किए थे। साल 2003 में राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू.बुश ने दावा किया था कि इराक के पास सामूहिक विनाश के हथियार (WMD) हैं और उसका अल-कायदा से संबंध है। इस झूठे दावे के आधार पर इराक पर हमला किया गया था। ब्राउन यूनिवर्सिटी के "कॉस्ट ऑफ वॉर"प्रोजेक्ट के अनुसार इराक युद्ध में लगभग3,06,000 लोग मारे गए थे। संयुक्त राष्ट्र-WHO के अध्ययन के अनुसार1,04,000 से 2,23,000 इराकी नागरिक मारे गए थे। कुछ अनुमानों के अनुसार यह संख्या 9.46 लाख से 11.2 लाख तक है। 9 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए थे।
अब देखें बराक ओबामा (2009-2017) को, उन्होंने ड्रोन युद्ध का विस्तार किया था। "नोबेल शांति पुरस्कार विजेता"बराक ओबामा ने अपने कार्यकाल में ड्रोन हमलों में भारी वृद्धि की थी। ओबामा ने 563 ड्रोन हमलों को मंजूरी दी थी। जिनमें लगभग3,797 लोग मारे गए थे। इनमें 324 से अधिक नागरिक शामिल थे। पाकिस्तान में ओबामा के पहले CIA ड्रोन हमले में एक अंतिम संस्कार को निशाना बनाया गया। जिसमें 41 पाकिस्तानी नागरिक मारे गए थे। साल 2016 में ओबामा प्रशासन ने 26,171 बम गिराए थे। अफगानिस्तान, पाकिस्तान,यमन, सोमालिया और सीरिया में हुए इन हमलों में हजारों निर्दोष मारे गए थे।
अब देखें जो बाइडन ( साल 2023) को गाजा में इज़राइल का अनुकंद्रीय समर्थन किया था। अमरीकी राष्ट्रपति राष्ट्रपति जो बाइडन ने गाजा पट्टी में इज़राइल को बिना शर्त समर्थन दिया था। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद इज़राइल ने गाजा पर हवाई हमले शुरू किए थे। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार तीन सप्ताह में 8,000 से अधिक लोग मारे गए थे । जिनमें आधे तो बच्चे थे। बाइडन ने भारी बमों की आपूर्ति रोकने से इनकार किया था। 23,000 से अधिक फिलिस्तीनी नागरिक मारे जा चुके हैं। बाइडन के इस रुख ने पूरे मध्य पूर्व को अस्थिर कर दिया था और वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ गया था। ये अमरीकी राष्ट्रपति ट्रूमैन,जॉनसन, बुश,जिम्मी कार्टर,रोनाल्ड रैगन,ओबामा और बाइडन ऐसे फैसले ले चुके थे कि जिनके कारण दुनिया भर में लाखों निर्दोष नागरिक मारे गए हैं। चाहे वह हिरोशिमा का परमाणु बम हो, वियतनाम में झूठी खुफिया जानकारी, इराक में WMD का झूठा दावा,ड्रोन युद्ध का विस्तार या गाजा में इज़राइल को बिना शर्त समर्थन हो। हर अमरीकी राष्ट्रपति के फैसले ने कई निर्दोषों की जान ली है और पूरी दुनिया को अस्थिर किया है। यह इतिहास का वह काला अध्याय है। जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। अब देखें ईरान पर अमेरिकी हमले और साल 1953 से 2026 तक का काला इतिहास का कलंक। ईरान के साथ अमेरिकी टकराव की शुरुआत साल 1953 में हुई थी। जब CIA ने ब्रिटेन के साथ मिलकर ईरान के लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसद्देक को सत्ता से बेदखल कर दिया था। मोसद्देक ने ईरान के तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण कर दिया था। जिससे ब्रिटिश हितों को नुकसान पहुँच रहा था। CIA ने इस तख्तापलट के लिए 50 लाख डॉलर खर्च किए और शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी को सत्ता में बिठाया था। साल 2013 में CIA ने आधिकारिक तौर पर इस भूमिका को स्वीकार किया था। साल 1979 की इस्लामी क्रांति में ईरानी जनता ने शाह को उखाड़ फेंका था। उसी साल नवंबर में तेहरान स्थित अमेरिकी दूतावास पर हमला हुआ और 52 अमेरिकी राजनयिकों को 444 दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया था। इसके बाद अमेरिका ने ईरान से राजनयिक संबंध तोड़ दिए थे।
साल 1987-88 सातवें राष्ट्रपति "रोनाल्ड रीगन"के कार्यकाल में अमेरिकी नौसेना ने ईरानी तेल प्लेटफार्मों और नौसैनिक ठिकानों पर हमले किए थे। 3 जुलाई 1988 को अमेरिकी युद्धपोत USS Vincennes ने ईरान एयर फ्लाइट 655 को मार गिराया था। एक यात्री विमान जिसमें 290 निर्दोष नागरिक सवार थे। जिनमें 66 बच्चे भी शामिल थे। अमेरिका ने इसे"गलती" बताया था। साल 1980-88 के ईरान-इराक युद्ध के दौरान राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के प्रशासन ने सद्दाम हुसैन को खुफिया जानकारी मुहैया कराई थी। साल 1988 में अमेरिकी अधिकारियों ने सद्दाम को ईरानी सेना के ठिकानों की जानकारी दी थी । यह जानते हुए कि वह रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल करेगा। इन हमलों में 1,00,000 से अधिक ईरानी हताहत हुए थे। साल 2002 में राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू.बुश ने ईरान को इराक और उत्तर कोरिया के साथ "एक्सिस ऑफ ईविल" (बुराई की धुरी) करार दिया।
मानवाधिकार संगठन HRANA के अनुसार युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान में 3,636 लोग मारे गए । जिनमें 1,701 नागरिक और 254 बच्चे शामिल हैं। मई 2026 में अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरानी मिसाइल लांच साइटों पर "आत्मरक्षा" हमले किए। जून 2026 में अमेरिका ने बंदर अब्बास में ईरानी सैन्य स्थलों पर नए हमले किए। इतिहास गवाह है कि साल 1953 के CIA तख्तापलट से लेकर 2026 के खामेनेई की हत्या तक,अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने ईरान के खिलाफ तख्तापलट, युद्ध, प्रतिबंध,ड्रोन हमले,नेताओं की हत्या और पूर्ण पैमाने पर सैन्य आक्रमण के साथ हर संभव हथियार का इस्तेमाल किया। इस सिलसिले में हज़ारों निर्दोष नागरिक मारे गए। लाखों विस्थापित हुए और पूरा मध्य पूर्व अस्थिर हो गया।( Photos Courtesy Social media)
~ब्यूरो रिपोर्ट स्पर्श देसाई √•Metro City Post•Digital World#USElection
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