*जब सुप्रीम कोर्ट की ‘गलती’ ने भारत को दिलाई शर्मिंदगी,मनमोहन सिंह की चेतावनी ने इटली को किया झुकने पर मजबूर*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*जब सुप्रीम कोर्ट की ‘गलती’ ने भारत को दिलाई शर्मिंदगी,मनमोहन सिंह की चेतावनी ने इटली को किया झुकने पर मजबूर*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई) भारत के सुप्रीम कोर्ट से एक बार गलती हो गई। हुआ यह कि साल 2012 में एक जहाज इटली से भारत आ रहा था। केरल तट के पास शिपगार्ड ने दो मछुआरों को जहाज की तरफ आते देख उन मछुआरों को गोली मार दी। तुरंत पुलिस और कोस्टगार्ड ने उन इटली के नाविकों को अरेस्ट कर लिया गया। मामला सुप्रीम कोर्ट चला गया और सुनवाई होने लगी लेकिन इन दिनों में इटली में चुनाव होना था तो इटली की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक निवेदन किया कि हमारे देश में चुनाव होना है और इलेक्शन में दो वोटर्स की भी बहुत इंपॉर्टेंस है इसलिए प्लीज इन्हें जमानत दे दी जाए। चुनाव खत्म होने के बाद इटली की सरकार खुद इन दो नाविकों को भारत भेज देगी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा इसके लिए गारंटर लगेगा जो इनकी जमानत लेगा अगर वह दोनों नाविक भारत वापस नहीं आए तो हम उस गारंटर को अरेस्ट कर लेंगे। इटली गवर्नमेंट ने कह दिया कि भारत में हमारा राजदूत है तो भारत में उसे ही गारंटर बना लो। सुप्रीम कोर्ट ने वह बात मान ली। राजदूत गारंटर बन गया और वो दो इटली के नाविक एक महीने के लिए इटली चले गए फिर जिस डेट में उन्हें वापस आना था । जब नहीं आए तो सुप्रीम कोर्ट ने फिर से समन किया। तब इटली की सरकार ने कह दिया कि हम इन दो नागरिकों को वापस भारत नहीं भेजेंगे। इनका ट्रायल इटली की कोर्ट में ही चलेगा। तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम गारंटर को अरेस्ट कर लेंगे और गारंटर कौन है? इटली का राजदूत और गारंटर फेलने लगा कि"वियना कन्वेंशन"के तहत आप किसी भी एंबेसडर को राजदूत को अरेस्ट नहीं कर सकते।
यही सबसे बड़ी गलती हो गई भारत के सुप्रीम कोर्ट से और इस बात को सुनकर तब के भारत के प्राइम मिनिस्टर डॉ.मनमोहन सिंह बहुत नाराज हुए। उन्होंने इटली की सरकार को वार्निंग दी कि अगर आपने उन दो नाविकों को भारत नहीं भेजा तो भारत इटली से सभी प्रकार के समझौते खत्म कर देगा। जो हमारे मधुर संबंध सारे,वो सब खत्म हो जाएंगे। आपने भारत के कानूनों का उल्लंघन तो किया ही है साथ ही भारत के सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना भी की है इसलिए अगर आप चाहते हैं कि भारत के साथ आपके संबंध अच्छे रहें तो तुरंत अपने उन दो नाविकों को भारत भेजिए। कई प्रकार का इटली पर दबाव बनाया गया और आखिरकार उसी गूंगे प्रधानमंत्री के सामने इटली की सरकार को झुकना पड़ा।
कुछ ही दिनों में वो दो नाविक भारत भेजना पड़ा । यह थी गूंगे प्रधानमंत्री की ताकत। इस मामले को गंभीरता से विस्तारित रुप से देखें तो जब केरल तट पर खूनी घटना घटी । जब दो मछुआरे बने गोलियों के शिकार। 15 फरवरी 2012 की वह सुबह केरल के "अम्बालापुझा" तट से करीब 20 समुद्री मील दूर मछली पकड़ने गए"अजेश पिंक" (25 वर्ष) और "वैलेन्टीन जलास्टिन"(45 वर्ष) के लिए यह आखिरी प्रक्रिया साबित हुई। इतालवी तेल टैंकर "एमवी एनरिका लेक्सी" पर सवार दो इतालवी नौसैनिकों "मास्सिमिलियानो लटोरे" और "साल्वातोरे गिरोने"ने उन पर गोलियां बरसा दीं। इटली का दावा था कि मछुआरे सोमालियाई समुद्री लुटेरे लगे लेकिन भारत सरकार ने इसे नकारते हुए कहा कि दोनों मछुआरे निहत्थे थे। घटना के चार दिन बाद 19 फरवरी को केरल पुलिस ने दोनों इतालवी नाविकों को गिरफ्तार कर लिया। भारतीय तटरक्षक ने "एनरिका लेक्सी"को रोका और उसे कोच्चि बंदरगाह पर लाकर खड़ा कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई और जमानत का विवाद के मामले के मद्देनजर यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने जहाज को भारतीय जल से जाने की अनुमति तो दी लेकिन चालक दल के सदस्यों को जरूरत पड़ने पर पेश होने का निर्देश दिया। इस बीच इटली में चुनाव होने वाले थे। इटली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में निवेदन किया कि चुनाव में हर वोट की अहमियत हैं । दोनों नाविकों को जमानत दे दी जाए। 22 फरवरी 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने दोनों नाविकों को चार सप्ताह के लिए इटली जाने की अनुमति दे दी। शर्त यह थी कि 22 मार्च 2013 तक वे भारत वापस लौटेंगे। इस मामले में इटली ने दे दिया धोखा। 11 मार्च 2013 को इटली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट और भारत सरकार को चौंका देने वाला ऐलान किया कि हम दोनों नाविकों को भारत वापस नहीं भेजेंगे। इनका मुकदमा इटली की अदालत में होगा। यह सुप्रीम कोर्ट और भारत सरकार दोनों के लिए अपमान था। कोर्ट ने तुरंत कार्रवाई करते हुए भारत में इटली के राजदूत "डेनियल मांचिनी"को देश छोड़ने पर रोक लगा दी। चीफ जस्टिस अल्तमास कबीर की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि हमें अब "मांचिनी"पर भरोसा नहीं। उन्होंने एक बार धोखा दिया है। दोबारा भी देंगे।"वियना कन्वेंशन" अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत राजदूत को गिरफ्तार नहीं कर सकते हैं। जब सुप्रीम कोर्ट ने राजदूत "मांचिनी"को गिरफ्तार करने की बात कही तो इटली ने "वियना कन्वेंशन 1961"का हवाला दिया कि किसी भी राजदूत को गिरफ्तार या हिरासत में नहीं रखा जा सकता।
इटली ने भारत पर अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। यहीं से भारत के सुप्रीम कोर्ट की सबसे बड़ी गलती सामने आई। कोर्ट ने राजदूत को गारंटर बनाकर एक ऐसा कदम उठाया। जिसकी कोई कानूनी सुरक्षा नहीं थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह की चेतावनी। जब गूंगे PM ने दिखाया अपना दम। तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह ने 13 मार्च 2013 को इटली को अल्टीमेटम दिया कि इटली का यह फैसला अस्वीकार्य है अगर नाविक वापस नहीं आए तो भारत इटली से सभी समझौते खत्म कर देगा। आपने भारत के कानूनों का उल्लंघन किया है और सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना की है। उन्होंने “परिणाम” की चेतावनी दी और स्पष्ट किया कि अगर आप भारत के साथ संबंध अच्छे रखना चाहते हैं तो तुरंत नाविकों को भेजें। भारी दबाव के चलते अंत में इटली को झुकना पड़ा।
इस भारी दबाव के मद्देनजर कूटनीतिक संबंधों को नुकसान की आशंका,यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौते पर असर को लेकर और संयुक्त राष्ट्र महासचिव "बान-की-मून"के हस्तक्षेप के चलते इटली ने घुटने टेक दिए। 22 मार्च 2013 को दोनों नाविक"लटोरे" और "गिरोने" वापस भारत भेजना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट ने राजदूत "मांचिनी" पर यात्रा प्रतिबंध हटा लिया। आखिरकार साल 2021 में नौ साल बाद मामले का अंत हुआ। 15 जून 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने भारत में दोनों नाविकों के खिलाफ सभी कार्यवाही बंद करने का आदेश दिया। इटली ने 10 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया। प्रत्येक मछुआरे के परिवार को 4-4 करोड़ और नाव के मालिक को 2 करोड़। कोर्ट ने कहा कि यह राशि उचित और पर्याप्त है। अब इस मामले की जांच इटली में होगी। इस मामले में विश्लेषण देखें तो सुप्रीम कोर्ट की ‘'गलती'’ और उससे मिली सीख।
इस पूरे मामले में क्या थी गलती? वह जाने तो सबसे पहले राजदूत को गारंटर बनाना। "वियना कन्वेंशन"के तहत राजदूत को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। भारत ने अपनी न्यायिक प्रक्रिया को अंतरराष्ट्रीय कानून की दीवार से टकरा दिया। यह भरोसे की भूल थी। इटली सरकार को निर्विवाद रूप से भरोसेमंद मान लिया गया। अधिकार क्षेत्र का विवाद देखें तो यह घटना अंतरराष्ट्रीय जल में हुई। जिससे भारत का कानूनी अधिकार क्षेत्र ही विवादित था। डॉ.मनमोहन सिंह की ताकत देखने को मिली। जिस प्रधानमंत्री को “गूंगा” कहा जाता था। उन्होंने “अस्वीकार्य” जैसे कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया और “परिणाम” की चेतावनी दी। यह भारत की कूटनीतिक ताकत का प्रतीक था। इस मामले में संबंधों पर असर देखने को मिले।
जैसे हमारे उच्चस्तरीय संपर्क ठप हो गए। संयुक्त आयोग की बैठकें रद्द हुई। साल 2015 में इटली ने मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रेजीम (MTCR) में भारत की सदस्यता रोकी गई। साल 2014 में फेरारी ने अपनी F1 कारों पर इतालवी नौसेना का झंडा लगाकर विवाद बढ़ाया और भारत-ईयू शिखर सम्मेलन 2015 में टला। इसके दीर्घकालिक परिणाम भी हुएं। जैसे मई 2020 में संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून न्यायाधिकरण (ITLOS) ने फैसला सुनाया । भारत को इतालवी नाविकों पर आपराधिक अधिकार क्षेत्र छोड़ना होगा। भारत ने अंततः यह स्वीकार किया। यह घटना भारत की न्यायपालिका,कार्यपालिका और कूटनीति के लिए एक बड़ा सबक बनकर रह गई।( Photos Courtesy Social media)
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