*लोकतंत्र की भारी कीमत:संसद,सांसदों और विधायकों पर देश का कितना पैसा होता है खर्च?एक सटीक विश्लेषण*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*लोकतंत्र की भारी कीमत:संसद,सांसदों और विधायकों पर देश का कितना पैसा होता है खर्च?एक सटीक विश्लेषण*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई 


(मुंबई /रिपोर्ट स्पर्श देसाई)​सांसदों की संख्या के मद्देनजर लोकसभा में कुल सांसदों की संख्या  543 है और राज्यसभा की संख्या 245 है। इस तरह संसद में कुल सांसदों की संख्या 788 होती है। ​सांसदों का वेतन के मद्देनजर भारत में सांसदों का आधिकारिक मूल वेतन (Basic Salary) ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) प्रति माह है। (इसे कुछ साल पहले महंगाई के अनुसार संशोधित कर भत्तों के साथ बढ़ाया गया था लेकिन मूल वेतन ₹1 लाख ही है)। ​संसद सत्र की लागत (अतिरिक्त जानकारी) का खर्च देखें तो सरकारी और संसदीय कार्य मंत्रालयों के आंकड़ों के अनुसार जब संसद का सत्र चल रहा होता है तो संसद को चलाने का खर्च लगभग ₹2.5 लाख प्रति मिनट (यानी ₹1.5 करोड़ प्रति घंटा) आता है। यह जानकारी लेख को और अधिक प्रामाणिक बनाएगी। ​संशोधित और अधिक विस्तृत समाचार लेख के आंकड़ों के हिसाब से भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और इस विशाल प्रशासनिक व विधायी तंत्र को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए हर साल जनता की गाढ़ी कमाई (टैक्स) का एक बड़ा हिस्सा खर्च होता है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि देश के संसद भवन की कार्यवाही चलाने,हमारे सांसदों (MPs),मंत्रियों और विधायकों (MLAs) को मिलने वाली सुख- सुविधाओं पर सालाना कितना खर्च आता है? ​वित्तीय अनुमानों और आधिकारिक प्रावधानों के आधार पर तैयार किया गया यह विश्लेषण आपको चौंका सकता है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं कि देश के इन नीति-निर्माताओं पर सालाना कितना निवेश या खर्च होता है? संसद भवन को चलाने का खर्च जाने तो₹2.5 लाख प्रति मिनट। ​भारतीय संसद के दो सदन हैं। लोकसभा और राज्यसभा। देश के लिए कानून बनाने वाली इन सर्वोच्च संस्थाओं के संचालन का बजट अरबों में है। ​लोकसभा को चलाने के लिए सालाना लगभग 1,000 करोड़ रुपये का अनुमानित खर्च आता है। ​राज्यसभा के संचालन पर सालाना करीब 483 करोड़ रुपये का खर्च बैठता है।


 ​सत्र के दौरान का खर्च का हिसाब जाने तो संसदीय कार्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार जब संसद का सत्र (Budget,Monsoon या Winter Session) चल रहा होता है तो सदन की कार्यवाही का खर्च लगभग ₹2.5 लाख प्रति मिनट (या ₹1.5 करोड़ प्रति घंटा) आता है। ऐसे में संसद में होने वाले हंगामे और व्यवधान से देश को हर दिन करोड़ों का नुकसान होता है। ​एक सांसद (MP) को मिलने वाली सुविधाएं और वास्तविक खर्च जाने तो ​संसद में कुल स्वीकृत सीटों की संख्या 788 है। जिसमें 543 लोकसभा सांसद और 245 राज्यसभा सांसद शामिल हैं। इन सभी सांसदों के वेतन, भत्तों और प्रत्यक्ष सुविधाओं पर सालाना कुल खर्च लगभग 1,182 करोड़ रुपये बैठता है। ​संसदीय नियमों के तहत एक सांसद को निम्नलिखित प्रमुख सुविधाएं मिलती हैं। वह देखें तो ​मासिक मूल वेतन देखें तो₹1,00,000 (एक लाख रुपये)। ​निर्वाचन क्षेत्र भत्ता (Constituency Allowance) के हिसाब से₹70,000 प्रति माह खर्च आता है। ​कार्यालय व्यय भत्ता (Office Allowance) के मद्देनजर ₹60,000 प्रति माह (जिसमें स्टाफ और स्टेशनरी शामिल है) खर्च होते हैं। ​संसद सत्र के दौरान दैनिक भत्ता का खर्च₹2,000 प्रति दिन (सत्र में उपस्थिति दर्ज कराने पर)​वाहन भत्ता/ऋण सुविधा का खर्च देखें तो₹70 लाख तक की वाहन व्यवस्था या अग्रिम लोन की सीमा। इसमें ​VIP सुविधाएं देखें तो दिल्ली के लुटियंस ज़ोन में मुफ्त बंगला/फ्लैट,सालाना 34 मुफ्त हवाई यात्राएं (परिवार के साथ),असीमित मुफ्त रेल यात्रा (फर्स्ट क्लास एसी),सीजीएचएस (CGHS) के तहत मुफ्त मेडिकल सुविधा और मुफ्त फोन/इंटरनेट भत्ता। ​निजी स्टाफ का खर्च देखें तो एक सांसद के सुरक्षा और सहायक स्टाफ (दो पुलिसकर्मी, पीए,रसोइया,गाड़ी, मीडिया प्रभारी आदि) पर सालाना करीब 1.5 करोड़ रुपये का खर्च आता है। ​सारे सांसदों का कुल मिलाकर केवल प्रत्यक्ष व्यक्तिगत और स्टाफ संबंधी सालाना खर्च ही 665.60 करोड़ रुपये के पार पहुंच जाता है। ​मंत्रियों,वीआईपी (VIP) नेताओं और विपक्ष पर खर्च जाने तो ​सांसदों के ऊपर जो नेता कैबिनेट या राज्य मंत्री बनते हैं। उनकी सुरक्षा, आधिकारिक सचिवालय और प्रोटोकॉल के कारण खर्च कई गुना बढ़ जाता है। 




देश के लगभग 72 मंत्रियों के काफिले और रखरखाव पर सालाना करीब 720 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। ​एक मंत्री पर होने वाले खर्च का अनुमानित ब्रेकअप। ​सालाना सैलरी और भत्ते के हिसाब से ₹40 लाख रुपए का खर्च ‌। ​सरकारी बंगला व उसका रख-रखाव का खर्च ₹1 करोड़। ​बिजली और पानी का बिल ₹20 लाख। ​निजी स्टाफ व सचिवालय (Secretariat) खर्च ₹2 करोड़। ​गाड़ियों का काफिला और ईंधन के पीछे का खर्च₹50 लाख। ​सुरक्षा व्यवस्था (Z या Z+ कैटेगरी) के मद्देनजर ₹3 से ₹10 करोड़ (सुरक्षा घेरे के आधार पर) ​आधिकारिक यात्राएं व घरेलू और विदेशी दौरों का खर्च करोड़ों रुपये में हो सकता है। ​प्रधानमंत्री और शीर्ष मंत्रियों का खर्च जाने तो देश के प्रधानमंत्री,गृहमंत्री और रक्षामंत्री जैसे शीर्ष पदों पर आसीन नेताओं की सुरक्षा जैसे SPG कमांडो और आधिकारिक प्रोटोकॉल के सटीक आंकड़े राष्ट्रीय सुरक्षा के कारणों से सार्वजनिक नहीं किए जाते लेकिन अनुमानों के मुताबिक यह खर्च कई हजार करोड़ रुपये तक जाता है। इसके अलावा राज्यसभा और लोकसभा में विपक्ष के नेताओं (Leaders of Opposition) की व्यवस्था पर भी सालाना 15 से 25 करोड़ रुपये का खर्च आता है। राज्यों के विधायकों (MLAs) और पूर्व नेताओं पर होने वाला खर्च जाने तो ​केंद्र के बाद यदि हम राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं की बात करें तो भारत में कुल 4,580 विधायक हैं। ​एक विधायक के वेतन,भत्तों और स्थानीय खर्चों को मिलाकर औसतन ₹2 लाख प्रति माह का खर्च आता है हालांकि यह अलग-अलग राज्यों में भिन्न हो सकता है। जैसे तेलंगाना और दिल्ली में यह अधिक है। ​इस हिसाब से देश के सभी विधायकों पर सालाना करीब 1,000 करोड़ रुपये खर्च होते हैं।​ पूर्व जनप्रतिनिधि (Ex-MPs/MLAs) जो नेता राजनीति से रिटायर हो चुके हैं या चुनाव हार चुके हैं। उन्हें मिलने वाली पेंशन और मुफ्त सुविधाओं जैसे मुफ्त रेल पास और मेडिकल पर भी देश का सालाना करीब 1 अरब (100 करोड़) रुपये खर्च होता है। क्या यह खर्च वाकई जायज है? यह एक चर्चा का विषय है। ​इन सभी आंकड़ों को एक साथ जोड़ दिया जाए तो भारत जैसे विकासशील देश में राजनेताओं और विधायी व्यवस्था को बनाए रखने के लिए हर साल कई हजार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। एक तरफ जहां देश की बड़ी आबादी बुनियादी सुविधाओं,रोजगार और स्वास्थ्य के लिए संघर्ष कर रही है। वहीं जनप्रतिनिधियों पर होने वाला यह भारी-भरकम खर्च अक्सर आम जनता के बीच बहस का विषय बनता है हालांकि विचारकों का मानना है कि इतने बड़े देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की सुरक्षा और सुचारू संचालन के लिए यह प्रशासनिक खर्च अनिवार्य है लेकिन इसमें पारदर्शिता लाना और फिजूलखर्ची पर रोक लगाना भी वक्त की मांग है। यह वीडियो संसद व्यवधानों की लागत दर्शाता है कि जब संसद की कार्यवाही बाधित होती है तो प्रति मिनट ₹2.5 लाख की दर से देश के करदाताओं के पैसों का कितना बड़ा नुकसान होता है। (Photos Courtesy Social media)

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