*पुतिन का ज़ेलेंस्की से मिलने से इनकार: कहा,अभी आमने-सामने की बातचीत का कोई औचित्य नहीं*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*पुतिन का ज़ेलेंस्की से मिलने से इनकार: कहा,अभी आमने-सामने की बातचीत का कोई औचित्य नहीं*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई)रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष को पांच साल से अधिक का समय हो चुका है लेकिन शांति की राह अब भी बेहद धुंधली नजर आ रही है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडीमिर ज़ेलेंस्की के साथ व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करने के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। सेंट पीटर्सबर्ग में आयोजित प्रमुख आर्थिक मंच के दौरान पुतिन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में ऐसी किसी भी बैठक का "कोई औचित्य (नो प्वाइंट)" नहीं है। ज़ेलेंस्की का खुला पत्र और पुतिन की उसकी तीखी प्रतिक्रिया देखें तो यह पूरा घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने एक खुला पत्र साझा कर पुतिन से आमने-सामने बैठक करने की अपील की थी ताकि युद्ध को समाप्त करने का कोई रास्ता निकाला जा सके। ज़ेलेंस्की ने पत्र में रूसी नेता से आग्रह किया था कि वे इस युद्ध से बाहर निकलने का रास्ता खोजने से न डरें हालांकि पुतिन को ज़ेलेंस्की की यह भाषा रास नहीं आई। पुतिन ने इस पत्र को कुछ हिस्सों में ''असभ्य'' और ''अशिष्ट'' करार देते हुए कहा कि इस पत्र में कुछ बेहद अशिष्ट टिप्पणियां हैं। क्या यह आमने-सामने की बैठक के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाने का तरीका था या बैठक से बचने का एक बहाना? मुझे लगता है कि यह दूसरा विकल्प था। यह केवल यूक्रेनी पक्ष द्वारा हमारे सशस्त्र बलों की सैन्य प्रगति को रोकने की एक चाल है। पुतिन ने साफ किया कि बातचीत से पहले विशेषज्ञों को काम करने देना चाहिए और कुछ ठोस समाधान विकसित करने चाहिए उसके बाद ही किसी मुलाकात की संभावना बनती है। ज़ेलेंस्की ने पलटवार भी किया। क्रेमलिन की नीयत साफ नहीं। पुतिन के इस रुख पर प्रतिक्रिया देते हुए यूक्रेनी राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने अपने रात के वीडियो संबोधन में क्रेमलिन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पुतिन द्वारा प्रस्ताव को ठुकराना यह साबित करता है कि रूस युद्ध को समाप्त करने का इच्छुक नहीं है। ज़ेलेंस्की ने निराशा जताते हुए कहा कि दुर्भाग्य से रूसी पक्ष एक बार फिर युद्ध का रास्ता चुन रहा है। हर कोई उनकी प्रतिक्रिया सुन रहा है । यह एक कमजोर और निराशाजनक प्रतिक्रिया है। मुझे लगता है कि इस रुख ने दुनिया भर के कई लोगों को निराश किया होगा। वैश्विक समीकरणों में बदलाव देखें तो अमेरिका का बदलता ध्यान लगभग आधे दशक से चल रहे इस युद्ध को समाप्त करने के राजनयिक प्रयास अब कमजोर पड़ते दिख रहे हैं। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि संयुक्त राज्य अमेरिका जो अब तक इस शांति वार्ता में मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था। उसकी विदेश नीति की प्राथमिकताएं अब बदल चुकी हैं। वाशिंगटन का ध्यान अब ईरान केंद्रित संघर्षों की ओर स्थानांतरित हो गया है। ज़ेलेंस्की ने भी अपने पत्र में इस बात को स्वीकार करते हुए कहा था कि अब वाशिंगटन के फिर से सक्रिय रूप से शामिल होने का इंतजार करना सही नहीं होगा। लक्ष्यों की प्राप्ति तक जारी रहेगा युद्ध। पुतिन ने अपनी पुरानी स्थिति को दोहराते हुए स्पष्ट कर दिया है कि सैन्य कार्रवाई तब तक नहीं रुकेगी जब तक रूस अपने तय लक्ष्यों को हासिल नहीं कर लेता। उन्होंने कहा कि सैन्य कार्रवाई एक दिन अवश्य समाप्त होगी लेकिन ऐसा तभी होगा जब हमारे द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को पूरी तरह प्राप्त कर लिया जाएगा। सेंट पीटर्सबर्ग से रिपोर्टों के अनुसार यह साफ है कि रूस फिलहाल युद्ध के मैदान में पीछे हटने को तैयार नहीं है। आर्थिक मोर्चे पर तनातनी चालू है। युद्ध के लंबे खिंचने और पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण रूस की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव है। साल 2026 की पहली तिमाही में रूसी अर्थव्यवस्था में 0.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। जो पिछले तीन वर्षों में इसकी पहली त्रैमासिक गिरावट है। देश के भीतर बढ़ती कीमतें,टैक्स में बढ़ोतरी और दो दशकों के उच्चतम स्तर पर पहुंची उधारी लागत ने आम नागरिकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं हालांकि पुतिन ने इन दावों को खारिज कर दिया कि देश की अर्थव्यवस्था ढह रही है। आलोचनाओं का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि हम उसी आर्थिक स्तर पर हैं जिस पर यूरोजोन के देश पिछले कुछ वर्षों से जी रहे हैं। रूस पूरी तरह से एक ''संप्रभु'' अर्थव्यवस्था के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। (Photos Courtesy Social media)
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