*प्रबंधन ने नैतिक दिशा खो दी:गूगल के टॉप डायरेक्टर का 9 साल बाद इस्तीफा,AI और पेंटागन डील को बताया वजह*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*प्रबंधन ने नैतिक दिशा खो दी:गूगल के टॉप डायरेक्टर का 9 साल बाद इस्तीफा,AI और पेंटागन डील को बताया वजह*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
(मुंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई)गूगल के डायरेक्टर ने ''लोगों को नुकसान नहीं पहुंचा सकता'' कहकर दिया इस्तीफा?गूगल के एंड्रॉयड प्लेटफॉर्म सिक्योरिटी डायरेक्टर रेने मायरहोफर ने 9-वर्षों बाद इस्तीफा दिया है। उनके मुताबिक कंपनी ने AI विकास के कारण अपने कार्बन-न्यूट्रल लक्ष्य को छोड़ दिया और अमेरिकी सरकार के साथ AI के सैन्य उपयोग से जुड़े समझौते किए। मायरहोफर ने कहा कि वह ऐसी गतिविधियों का हिस्सा नहीं बन सकते। जो लोगों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। ''मैं यूरोपीय हूं, US मेरे प्रति विरोधी रवैया अपना सकता है''।
गूगल डायरेक्टर का चेतावनी भरा बयान सामने आया है। गूगल के एंड्रॉइड प्लेटफॉर्म सिक्योरिटी डायरेक्टर रेने मायरहोफर (Rene Mayrhofer) ने 9 साल बाद कंपनी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने इस्तीफे की वजह कंपनी के बदले हुए नैतिक मूल्यों,पर्यावरणीय लक्ष्यों को छोड़ना और पेंटागन के साथ सैन्य समझौतों को बताया है। मायरहोफर ने कहा कि मैं ऐसी गतिविधियों का हिस्सा नहीं बन सकता। जो लोगों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। उन्होंने क्यों उठाए नैतिकता के सवाल? वह देखें तो मायरहोफर ने अपने इस्तीफे के पत्र में साफ कहा है कि गूगल अब वह कंपनी नहीं रही। जहां उन्होंने साल 2017 में कदम रखा था।
पहले की पारदर्शी संस्कृति और खुली बहस अब कहीं नजर नहीं आती। प्रबंधन के फैसले अब सिर्फ ''टॉप-लेवल'' पर लिए जाते हैं और कर्मचारियों से सलाह नहीं ली जाती। उन्होंने लिखा कि ''Don't Be Evil'' अब सिर्फ एक नारा रह गया है। गूगल आखिर लोगों को कैसे पहुंचा सकता है नुकसान? वह जाने तो मायरहोफर की चिंता और विशेषज्ञों के अनुसार गूगल की हालिया नीतियां और तकनीकी विकास कई मोर्चों पर लोगों के लिए खतरा बन सकते हैं। जैसे पर्यावरणीय नुकसान को लेकर AI के लिए छोड़े जा रहे कार्बन-न्यूट्रल लक्ष्य। मायरहोफर ने आरोप लगाया कि गूगल ने AI मॉडल्स की बढ़ती ऊर्जा खपत के कारण अपने कार्बन-न्यूट्रल लक्ष्यों को चुपचाप त्याग दिया है। इसके डेटा सेंटर और प्रदूषण के बारे में जाने तो AI को पावर देने के लिए गूगल के डेटा सेंटर भारी मात्रा में बिजली की खपत करते हैं। जिससे कंपनी का कार्बन फुटप्रिंट बढ़ रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक AI गतिविधियों की वजह से गूगल का उत्सर्जन (emissions) 2020 के मुकाबले 30% तक बढ़ गया है। प्राकृतिक गैस प्लांट के मद्देनजर खबरों के अनुसार गूगल ने अब अपने AI डेटा सेंटर के लिए टेक्सास में 933-मेगावाट का प्राकृतिक गैस पावर प्लांट बनाने की योजना बनाई है। जो हरित ऊर्जा के अपने वादे के खिलाफ है साथ में अब बढ़ा है सैन्यीकरण का खतरा भी। अमेरिकी सेना के साथ समझौता होने से दूसरा और सबसे बड़ा कारण जाने तो गूगल का युद्ध विभाग (US Ministry of War) के साथ हाथ मिलाया है। मायरहोफर ने इसे साफ तौर पर ''लोगों को सक्रिय रूप से नुकसान पहुंचाने'' वाली कार्रवाई बताया है। गुगल ने साल 2018 का वादा तोड़ा है। साल 2018 में गूगल ने ''प्रोजेक्ट मेवेन''यानि ड्रोन फुटेज का AI से विश्लेषण करने वाला पेंटागन प्रोजेक्ट को लेकर कर्मचारियों के विरोध के बाद यह साफ AI प्रिंसिपल जारी किए थे कि कंपनी हथियारों या निगरानी के लिए AI का विकास नहीं करेगी। अब खतरनाक हथियारों में भी AI का प्रयोग किया जाता है। फरवरी 2025 में गूगल ने चुपचाप अपने AI प्रिंसिपल से ''नुकसान पहुंचाने'' और ''हथियार न बनाने'' वाले वादों (pledges) को भूला दिया हैं । जिससे वह आधिकारिक तौर पर हथियारों और निगरानी के लिए AI विकसित कर सकता है। दौरान ''कोई भी वैध उद्देश्य'' वाली डील सामने आई है। अप्रैल 2026 में गूगल ने पेंटागन के साथ एक ऐसा समझौता किया है कि जिससे अमेरिकी सरकार गूगल के AI का इस्तेमाल ''किसी भी वैध सरकारी उद्देश्य'' के लिए कर सकती है। जिसमें युद्ध योजना,खुफिया जानकारी जुटाना और संभवतः जानलेवा हमले शामिल हो सकते हैं। यही वह डील थी । जिसे अमेजन,ओपनएआई, स्पेसएक्स और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों के साथ भी साइन किया गया है। इसी दौरान परमाणु हथियारों का जोखिम बढ़ रहा है। इन समझौतों के तहत गूगल के AI को सरकार के टॉप-सीक्रेट क्लासिफाइड नेटवर्क (Impact Level 6 और 7) पर डिप्लॉय किया जाएगा जिनका इस्तेमाल परमाणु हथियारों से जुड़ी गोपनीय योजनाओं के लिए भी किया जाता है।
ऐसे AI का सीधा नुकसान हैं और घातक और भ्रामक चैटबॉट भी है। मायरोफर की बातों से इतर, गूगल के AI ''जेमिनी'' को लेकर पहले से ही एक बड़ा मुकदमा चल रहा है। जो साबित करता है कि यह तकनीक लोगों की जान भी ले सकती है। इस एप से आत्महत्या के लिए उकसाया जाता है। फ्लोरिडा के एक परिवार ने गूगल पर मुकदमा दायर किया है। जिसमें आरोप है कि उनके बेटे जोनाथन गावालास (36) ने "जेमिनी चैटबॉट" के बहकावे में आकर आत्महत्या कर ली। मुकदमे में दावा किया गया है कि चैटबॉट ने उसे एक AI ''पत्नी'' को आजाद कराने के लिए ''मास कैजुअल्टी'' (आतंकी हमला) करने के लिए कहा और असफल होने पर आत्महत्या के लिए उकसाया। इस घटना ने यह साबित कर दिया कि AI के अंधाधुंध इस्तेमाल के गंभीर परिणाम हो सकते हैं इसलिए ऐसे एप्स इस्तेमाल ना करें। (Photos Courtesy Social media)
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