*दक्षिण चीन सागर में मिला 3200 साल पुराना 'ब्लू होल',2700 जीवों से भरा रहस्यमयी संसार*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*दक्षिण चीन सागर में मिला 3200 साल पुराना 'ब्लू होल',2700 जीवों से भरा रहस्यमयी संसार*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई)समुद्र की गहराई में छिपा हुआ है एक ''टाइम कैप्सूल''। दक्षिण चीन सागर की लहरों के नीचे नीली रोशनी की एक किरण हजारों सालों की यात्रा करके आज हम तक पहुँची है। अगस्त 2025 में चीन के पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्रालय के अधीनस्थ दक्षिण चीन पर्यावरण विज्ञान अनुसंधान संस्थान ने"गुआंग्शी विश्वविद्यालय"के दक्षिण चीन सागर मूंगा-चट्टान अनुसंधान प्रयोगशाला के सहयोग से "हुआंगयान द्वीप"अथवा"स्कारबोरो शोल"के लैगून क्षेत्र में पारिस्थितिकी सर्वेक्षण किया। इसी दौरान उनके उपकरणों ने एक विशाल जलमग्न गड्ढे का पता लगाया गया। यह कोई साधारण समुद्री गड्ढा नहीं बल्कि मूंगे की चट्टानों से स्वाभाविक रूप से बना एक''ब्लू होल''था।
जो दुनिया के सबसे दुर्लभ भू-वैज्ञानिक अजूबों में से एक है। 25 जून 2026 को चीन के पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्रालय ने आधिकारिक रिपोर्ट "2025 हुआंगयान द्वीप ब्लू होल सर्वेक्षण"जारी करके इस गहरे समुद्री रहस्य को दुनिया के सामने रखा। चार बास्केट बॉल कोर्ट जितना विशाल''समुद्री नेत्र''है।"हुआंगयान द्वीप"का यह ब्लू होल अपने आकार में अद्भुत है। रिपोर्ट के अनुसार इसका मुँह लगभग 1491.7 वर्ग मीटर में फैला है। जिसका अधिकतम व्यास 56.3 मीटर और गहराई 16.6 मीटर है। इसका मतलब है कि इसमें चार मानक बास्केटबॉल कोर्ट आसानी से समा सकते हैं। ऊपर से देखने पर यह लैगून के नीले पानी में जड़ा एक गहरा नीलमणि जैसा लगता है। जो आसपास के उथले मूंगा-चट्टानी क्षेत्र से बिल्कुल अलग है। इसका आंतरिक ढाँचा फ़नल के आकार का है। नीचे की ओर संकरा होता जाता है और पानी में स्पष्ट मैलापन की परतें हैं। सूरज की रोशनी जब इसके मुँह से अंदर प्रवेश करती है तो गुफा के भीतर एक रहस्यमयी नीली-हरी चमक पैदा होती है।
यही कारण है कि समुद्री ब्लू होल को अक्सर "समुद्र की आँख"(ओशन आई) कहा जाता है। 3200 साल एक प्राचीन सभ्यता के समकालीन । दुनिया के अधिकांश"ब्लू होल"अंतिम हिमयुग आइस एज में बने थे । तब समुद्र का स्तर गिर गया। चूना-पत्थर की गुफाएँ हवा में खुल गईं और बाद में ग्लेशियरों के पिघलने तथा समुद्र-स्तर बढ़ने पर वे पानी में डूब गईं लेकिन हुआंगयान द्वीप का ब्लू होल बिल्कुल अलग है। रेडियोकार्बन (C-14) डेटिंग के प्रारंभिक परिणाम बताते हैं कि यह कम-से-कम 3200 साल पहले बना था । ठीक उसी समय जब चीन में "शांग राजवंश"का अंत हो रहा था और "झोउ राजवंश"का उदय हो रहा था। इसका जन्म एक हजारों सालों की प्राकृतिक प्रक्रिया है । "हुआंगयान द्वीप"के लैगून में मौजूद आस-पास की चट्टानें और चट्टानी टीले जलवायु परिवर्तन और समुद्र-स्तर में उतार-चढ़ाव के प्रभाव में लगातार विकसित हुए। इन चट्टानों के बीच क्षैतिज विस्तार और सीमेंटीकरण (जमाव) ने धीरे-धीरे एक बंद गुफा-संरचना का निर्माण किया।
यह चीन में खोजा गया पहला मूंगा-चट्टान-निर्मित "ब्लू होल"है और वैश्विक स्तर पर भी अत्यंत दुर्लभ है। इसमें 2700 जीवों का ''जलीय स्वर्ग'' है। जब वैज्ञानिकों ने पर्यावरणीय डीएनए (ईडीएनए) तकनीक का उपयोग करके ब्लू होल और उसके आसपास के पानी की जाँच की तो एक चौंकाने वाला आँकड़ा सामने आया । इस छोटे से जलक्षेत्र में 2700 से अधिक समुद्री प्रजातियाँ निवास करती हैं। यह कोई सामान्य पारिस्थितिकी तंत्र नहीं है। गड्ढे के अंदर मूंगे, विशाल क्लैम (ट्रिडाक्ना),मछलियाँ,स्पंज, समुद्री एनीमोन और अन्य विशिष्ट मूंगा-चट्टानी जीव-समूह पाए गए हैं।
जो दो सालों के व्यवस्थित सर्वेक्षण में दर्ज किए गए हैं। 165 प्रजातियों के कठोर मूंगे हैं। जो 14 कुलों और 44 वंशों में बँटे हैं और 184 प्रजातियों की मछलियाँ है। 27 कुलों और 85 वंशों से। सबसे रोमांचक बात यह है कि राष्ट्रीय स्तर की प्रथम-श्रेणी संरक्षित प्रजाति हरा समुद्री कछुआ को इस ब्लू होल में और इसके मुँह के आसपास विचरण करते देखा गया। वैज्ञानिक ऐसे ब्लू होल को ''टाइम कैप्सूल'' कहते हैं क्योंकि ये न केवल प्राचीन जैव-समुदायों को संजोए हुए हैं बल्कि इनमें होलोसीन युग से दक्षिण चीन सागर के पर्यावरणीय इतिहास,समुद्र-स्तर में उतार- चढ़ाव तथा वैश्विक और क्षेत्रीय जलवायु परिवर्तनों का पूरा रिकॉर्ड मौजूद है। विवादित जल में वैज्ञानिक प्रकाश के मद्देनजर यह ब्लू होल जिस क्षेत्र में मिला है।
"हुआंगयान द्वीप"वह भू-राजनीतिक विवाद के केंद्र में स्थित है।"हुआंगयान द्वीप"फिलीपींस के पश्चिमी तट से लगभग 230 किलोमीटर और चीन के हाइनान द्वीप से लगभग 874 किलोमीटर दूर है। यह एक त्रिकोणीय आकार की मूंगा-चट्टान है। जो एक लैगून को घेरे हुए है। चीन इसे"हुआंगयान द्वीप"कहता है। जबकि फिलीपींस इसे"पनाटाग शोल"या"बाजो दे मासिनलोक"कहता है। साल 2012 के बाद से यह क्षेत्र चीन के वास्तविक नियंत्रण में है। "ब्लू होल"की रिपोर्ट जारी होने से कुछ समय पहले इसी क्षेत्र में चीन द्वारा लगाए गए अस्थायी अनुसंधान उपकरणों को लेकर फिलीपींस ने राजनयिक विरोध दर्ज कराया था। जिन्हें बाद में हटा लिया गया। पारिस्थितिकी मंत्रालय द्वारा यह वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराया जाना कई पर्यवेक्षकों द्वारा चीन की उस रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जाता है।
जिसमें वह''वैज्ञानिक अनुसंधान''और ''निगरानी गश्त''के माध्यम से विवादित क्षेत्र पर अपनी पकड़ मजबूत करता है फिर भी भू-राजनीतिक विवादों से परे "हुआंगयान ब्लू होल"का वैज्ञानिक महत्व निर्विवाद है। जैसा कि मंत्रालय के प्रवक्ता पेई शियाओफेई ने कहा कि"हुआंगयान ब्लू होल"की खोज और गहन अध्ययन हमें हुआंगयान द्वीप के भूवैज्ञानिक विकास,दक्षिण चीन सागर के प्राचीन पर्यावरण और जैव-विविधता के विकास तथा वैश्विक और क्षेत्रीय जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर महत्वपूर्ण वैज्ञानिक जानकारी प्रदान करेगा। सितंबर 2025 में चीन सरकार ने आधिकारिक तौर पर"हुआंगयान द्वीप"राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण क्षेत्र की स्थापना की। अब शोध संस्थान इस ब्लू होल के निर्माण तंत्र,पारिस्थितिकी विकास,उसके पारिस्थितिकीय कार्यों और उच्च जैव-विविधता में योगदान पर अधिक गहन और व्यवस्थित अध्ययन करने पर केंद्रित होंगे। दक्षिण चीन सागर की नीली गहराई में छुपा है शाश्वत प्रश्न। 3200 साल पहले जब मानव सभ्यता काँसे के औजारों की ध्वनि में रेंग रही थी। यह मूंगा-चट्टान ब्लू होल पहले से ही दक्षिण चीन सागर की लहरों के नीचे आकार ले चुका था। इसने राजवंशों के उत्थान-पतन, जलवायु के उतार-चढ़ाव और समुद्र-स्तर के बढ़ने-घटने को देखा। आज 2700 जीवों से भरा यह संपन्न पारिस्थितिकी तंत्र 21वीं सदी के मनुष्य को एक ऐसा जलमग्न संसार दिखाता है। जिसे समय ने भुला दिया था।
समुद्र पृथ्वी के 71% हिस्से को ढँकता है फिर भी हम इसके बारे में बहुत कम जानते हैं। हुआंगयान ब्लू होल की खोज हमें फिर से याद दिलाती है कि इस नीले ग्रह की गहराइयों में अभी भी अनगिनत अजूबे छिपे हैं। जिनकी खोज हमारा इंतज़ार कर रही है शायद पानी के ऊपर की क्षेत्रीय लड़ाइयों से भी ज़्यादा पानी के नीचे के जीवन के रहस्य पूरी मानवता के लिए संरक्षण और अन्वेषण के योग्य हैं। दक्षिण चीन सागर की नीली लहरों के नीचे वह 3200 साल पुराना''समुद्री नेत्र'' आज भी खामोशी से आकाश की ओर ताकता है और वैज्ञानिकों से उसके और रहस्यों को उजागर करने की प्रतीक्षा करता है।(Photos Courtesy Social media)
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