*अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर विवाद:क्या $300 अरब पुनर्निर्माण कोष और $24 अरब फ्रीज फंड रिलीज पर सहमति बनी?*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर विवाद:क्या $300 अरब पुनर्निर्माण कोष और $24 अरब फ्रीज फंड रिलीज पर सहमति बनी?*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
( मुंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई) ईरान को रिकंस्ट्रक्शन फंड के तौर पर $300 बिलियन देने पर सहमत हुआ अमेरिका। ऐसा ईरानी मीडिया ने कहा। अमेरिका- ईरान के बीच शांति समझौता तय होने के बाद ईरानी सरकारी मीडिया ने दावा किया है कि अमेरिका रिकंस्ट्रक्शन फंड के तौर पर ईरान को $300 बिलियन देने पर सहमत हुआ है। बकौल मीडिया अमेरिका फ्रीज़ किए गए $24 बिलियन भी जारी करेगा। यह अमेरिकी दावे के उलट है जिसमें कहा गया था कि ईरान को कोई फंड नहीं मिलेगा। 19 जून को जिनेवा में इस समझौते पर होंगे हस्ताक्षर। अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर विवाद जाने तो क्या $300 अरब पुनर्निर्माण कोष और $24 अरब फ्रीज फंड रिलीज पर सहमति बनी?ईरानी मीडिया के दावों के बीच अमेरिका ने साफ किया कि पहले ''परफॉरमेंस'' के दायित्व पूरे करो फिर मिलेगी रकम। अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम और शांति समझौते की घोषणा के बाद ईरान के सरकारी मीडिया "मेहर न्यूज़ एजेंसी" ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान को कम से कम 300 अरब डॉलर (लगभग 29 लाख करोड़ रुपये) का पुनर्निर्माण कोष देने पर सहमत हुए हैं। मेहर के अनुसार इस कोष के अलावा संयुक्त राज्य अमेरिका 24 अरब डॉलर ईरान की फ्रोजन (अवरुद्ध) संपत्ति भी रिलीज करेगा। जिसमें से 12 अरब डॉलर बिना शर्त औपचारिक वार्ता शुरू होने से पहले ही ईरान को दे दिए जाएंगे साथ ही समझौते पर औपचारिक रूप से 19 जून 2026 को जिनेवा,स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर किए जाने की संभावना है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ,अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के उप विदेश मंत्री काज़िम ग़रीबाबादी ने अलग-अलग इस समझौते की पुष्टि की है। जिसमें लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तुरंत और स्थायी रूप से रोकने की बात कही गई है। इसके तहत अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलेगा और अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटाएगा। दौरान ईरानी पक्ष के 14-सूत्रीय मसौदे का आधार देखें तो ईरानी मीडिया द्वारा जारी किए गए 14-सूत्रीय मसौदे (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) के अनुसार युद्ध की समाप्ति सभी मोर्चों (लेबनान सहित) पर सैन्य कार्रवाई का स्थायी अंत। ईरान की संप्रभुता को लेकर अमेरिका ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा।
नौसैनिक नाकाबंदी को 30 दिनों के भीतर पूरी तरह हटाई जाएगी। अमेरिकी सेना की वापसी को लेकर क्षेत्र से सैनिकों को हटाया जाएगा। होर्मुज जलडमरूमध्य को 30 दिनों में ईरानी प्रबंधन में पुनः खोला जाएगा। तेल प्रतिबंधों में ढील के मद्देनजर तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर लगे प्रतिबंध हटेंगे। पुनर्निर्माण योजना। अमेरिका और सहयोगी कम से कम 300 अरब डॉलर की योजना पेश करेंगे। 60 दिन की वार्ता अहम परमाणु मुद्दे और प्रतिबंध हटाने पर अंतिम समझौते के लिए। परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता दोहरानी होगी। "एनपीटी"के तहत ईरान पुष्टि करेगा। इसके बाद नए प्रतिबंध नहीं लगेगा । इस दौरान अमेरिका कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा। फ्रोजन फंड की रिहाई के बारे में जाने तो 60 दिन में 24 अरब डॉलर जारी किए जाएंगे। आधी राशि वार्ता शुरू होने से पहले। निगरानी तंत्र के मद्देनजर समझौते के क्रियान्वयन के लिए संयुक्त तंत्र बनेगा। संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव देखें तो अंतिम समझौता यूएन सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव से पुष्ट होगा। शर्तें पूरी होने पर ही वार्ता शुरू होगी । फंड की रिहाई,तेल प्रतिबंध हटना और नाकाबंदी समाप्त होना अनिवार्य। अमेरिका का इनकार “फ्रीज फंड नहीं मिलेगा। दे देंगे तो ‘परफॉरमेंस’ के बाद”ईरानी मीडिया के दावों के ठीक उलट अमेरिकी प्रशासन ने साफ तौर पर इनकार किया है कि ईरान को वार्ता शुरू होने से पहले कोई अवरुद्ध राशि दी जाएगी। वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर कहा कि यह पूरी तरह से सही नहीं है। यह ‘'पे फॉर परफॉरमेंस’' डील है। कोई भी फ्रोजन फंड तब तक रिलीज नहीं किया जाएगा जब तक ईरान अपने दायित्वों को पूरा नहीं करता”।"Axios"की रिपोर्ट के अनुसार ईरान को 60 दिन की वार्ता अवधि से पहले कोई बिना शर्त राशि नहीं मिलेगी। जबकि ईरानी मीडिया ने दावा किया था कि वार्ता पूरी होने से पहले ही 12 अरब डॉलर ईरान को सौंप दिए जाएंगे। यह अंतर दोनों पक्षों के बीच समझौते के क्रियान्वयन को लेकर पहले बड़े विवाद के रूप में उभरा है।
वॉशिंगटन का कहना है कि ईरान को फंड तभी मिलेगा जब वह समझौते की शर्तों का पालन करेगा, जबकि तेहरान फंड रिलीज को बिना शर्त पूर्व शर्त बना रहा है। $300 अरब डॉलर सिर्फ ‘प्लान’ या ‘पैकेज’ की बात?यह बात जाने तो दोनों पक्षों के बीच 300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण कोष को लेकर भी अस्पष्टता है। ईरानी पक्ष इसे एक निश्चित राशि के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। वेस्टर्न मीडिया "CNBC" और "रॉयटर्स" के अनुसार यह 300 अरब डॉलर की योजना (प्लान) है। कोई सुनिश्चित '‘कोष’' नहीं। इस योजना के तहत ईरान के बुनियादी ढांचे को बहाल करने और उद्योगों को समर्थन देने की बात कही गई है लेकिन फंडिंग का स्रोत और टाइमलाइन अस्पष्ट है। "न्यूयॉर्क टाइम्स"ने पहले ही रिपोर्ट किया था कि दोनों पक्षों के बीच “इन्वेस्टमेंट फंड” पर चर्चा है लेकिन यह सुनिश्चित राशि नहीं है। 19 जून जिनेवा में होंगे हस्ताक्षर लेकिन तनाव बरकरार है। घोषणा के अनुसार इस समझौते पर 19 जून 2026 को जिनेवा,स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर किए जाएंगे। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि वे समारोह में भाग लेंगे और राष्ट्रपति ट्रंप भी मौजूद हो सकते हैं हालांकि फंड रिलीज और पुनर्निर्माण पैकेज पर सहमति न होने से यह समझौता विवादास्पद बना हुआ है। इससे पहले 12 जून को राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी मीडिया के लीक किए गए कथित मसौदे को “फेक न्यूज़” बताते हुए ईरानी नेतृत्व पर “बेईमानी” का आरोप लगाया था। इससे क्या संकेत मिलते हैं? वह देखें तो फंड रिलीज मुख्य अड़चन है। अमेरिका बिना शर्त रिलीज को ठुकरा रहा है। जबकि ईरान इसे शुरुआत के लिए जरूरी बता रहा है। 300 अरब डॉलर वास्तविक कोष न होकर एक दीर्घकालिक योजना हो सकती है।
जो अंतिम वार्ता और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सहमति पर निर्भर करेगी। क्षेत्रीय ताकतें और प्रतिक्रियाएं महत्वपूर्ण होंगी। अमेरिकी सहयोगी (खाड़ी देश) इस बात को लेकर चिंतित हैं कि फ्रोजन फंड का उपयोग ईरान की क्षतिपूर्ति के बजाय उनके पुनर्निर्माण में किया जाए। ईरानी जनता की नजर इस बात पर होगी कि अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ कब मिलेगा। वहीं ट्रंप प्रशासन को घरेलू स्तर पर इस समझौते को “जीत” के रूप में पेश करना होगा। अमेरिका और ईरान युद्धविराम और शांति वार्ता के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गए हैं लेकिन मुख्य मुद्दे फ्रोजन फंड की रिलीज और 300 अरब डॉलर पुनर्निर्माण योजना पर गंभीर असहमति बनी हुई है। 19 जून को जिनेवा में हस्ताक्षर समारोह तो होंगे लेकिन इस समझौते की सफलता पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष इन्हीं मुद्दों पर आपसी सहमति बना पाते हैं या नहीं। (Photos Courtesy Social media)
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