*कोंकण-पश्चिमी महाराष्ट्र में लौटी मानसूनी बारिश, गर्मी से राहत; किसानों में खुशी की लहर,25 जून तक राज्य में मॉनसून के आसार*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*कोंकण-पश्चिमी महाराष्ट्र में लौटी मानसूनी बारिश, गर्मी से राहत; किसानों में खुशी की लहर,25 जून तक राज्य में मॉनसून के आसार*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई 



(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई)आज मंगलवार 23जून की सुबह सुबह मुंबई में प्रि मानसून देखने को मिली। महाराष्ट्र के कोंकण तट और पश्चिमी जिलों में रविवार को अचानक भारी बारिश ने दस्तक दे दी । जिससे पिछले कई हफ्तों से चली आ रही भीषण गर्मी और लू से जनता को बड़ी राहत मिली। मुंबई,पुणे,भिवंडी, सतारा और रत्नागिरी सहित कई शहरों में बादल फटने जैसी स्थिति बनी और सड़कें कुछ ही मिनटों में पानी से लबालब हो गईं हालांकि यह बारिश उमस भरी दोपहर में एक अप्रत्याशित तोहफा साबित हुई क्योंकि पारा अचानक कई डिग्री लुढ़क गया और लोगों ने राहत की सांस ली। पिछले दिनों बंगाल की खाड़ी में सक्रिय कम दबाव का क्षेत्र निष्क्रिय पड़ा था लेकिन अब उसकी सक्रियता से कोंकण और पश्चिमी घाट के ऊपरी इलाकों में जोरदार वर्षा हुई है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 48 घंटों में और अधिक बारिश की संभावना है और 25 जून के बाद पूरे राज्य में मॉनसून के पूरी तरह सक्रिय होने का अनुमान है फिलहाल पुणे के कोथरुड,कर्वे रोड,हडपसर और निकटवर्ती हजाम कोडना क्षेत्रों में दोपहर के समय तेज बौछारें पड़ीं। जिससे यातायात बाधित हुआ लेकिन नागरिकों ने गाड़ियां रोककर बारिश का मज़ा लिया। मुंबई के उपनगरों में भी रुक-रुक कर बारिश होती रही और शहर के कई चौक-चौराहों पर जलभराव की स्थिति बन गई हालांकि यह अल्पकालिक रही। सबसे अधिक खुशी किसानों के चेहरों पर देखी गई। पिछले एक महीने से तापमान 40 डिग्री से ऊपर बने रहने और लू के थपेड़ों से खेतों में नमी सूख गई थी। 


जिससे धान,गन्ना और सब्जियों की फसलें संकट में थीं। रत्नागिरी जिले के पासधारी और धोस्थान क्षेत्रों में ईस्टर की कटाई के बाद खरीफ की बुआई के लिए पानी की किल्लत थी लेकिन अब हुई बारिश ने मिट्टी की नमी को बहाल कर दिया है। सतारा जिले में तो फली और अन्य सब्जी उत्पादकों ने राहत की सांस ली क्योंकि अचानक बारिश ने फसलों को नया जीवन दिया है। किसानों ने बताया कि यह बारिश समय पर आ गई अन्यथा खरीफ सीजन पर गहरा संकट आ सकता था हालांकि बारिश ने कुछ इलाकों में परेशानी भी खड़ी की। पुणे-सतारा मार्ग पर स्थित बैका दर्रे और फरारी रोड के निकट कुछ निचले क्षेत्रों में पानी भर गया। जिससे आवाजाही बाधित हुई लेकिन राहत राहत कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर निकासी सुनिश्चित की। कोकण के मलारा,विनस और अन्य तटीय गांवों में तो बारिश के साथ कुछ धूप भी खिली। जिससे स्थानीय लोगों ने बीच-बीच में समुद्री किनारों पर चहलकदमी का आनंद लिया। इस बीच खास बात यह रही कि सार्वजनिक स्थलों पर लोगों ने इस बारिश को त्योहार जैसा मानकर भीगने और नाचने का आनंद लिया। महायेदर में स्थानीय समाज और शिवभक्त समितियों ने बारिश से उपजी खुशी को धार्मिक आयाम दिया। असनारा खेड़ में एक धार्मिक फंड बनाया गया और खेदनबाई माता के दर्शन के बाद भक्तों ने मंदिर में जाकर किसानों की समृद्धि के लिए प्रार्थना की। करेटी झील में प्रतीकात्मक रूप से जल उठाव करते हुए स्थानीय नेता दिलीप मोकाशी ने विश्वास जताया कि महादेव भक्तों की पुकार ज़रूर सुनते हैं और यह बारिश उनकी कृपा का संकेत है।


 जहां एक ओर शहरी क्षेत्रों में लोगों ने छतरियां और रेनकोट निकाल लिए वहीं ग्रामीण इलाकों में किसानों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अगले 72 घंटों में कोंकण में 50-70 मिमी तक वर्षा हो सकती है। जबकि पश्चिमी महाराष्ट्र के घाट क्षेत्रों में भारी बौछारें जारी रहेंगी। यह बारिश फसलों के लिए वरदान साबित होगी बशर्ते जलभराव न हो। प्रशासन ने सभी जिलों में नदियों और जलाशयों के स्तर पर नज़र रखने के निर्देश दिए हैं फिलहाल आम जनता और किसान दोनों ही इस मौसमी बदलाव से संतुष्ट नज़र आ रहे हैं। उमस और प्यास से त्रस्त लोगों को रविवार की इस बारिश ने जहां दिनभर की थकान मिटाई। वहीं किसानों को उम्मीद जगाई है कि इस साल खरीफ की पैदावार अच्छी होगी। अब सभी की निगाहें 25 जून के बाद आने वाले पूर्ण मॉनसून पर टिकी हैं। जो राज्य की अर्थव्यवस्था और जल संकट दोनों के लिए निर्णायक साबित होगा। (Photos Courtesy Social media)

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