"समुद्र की गहराइयों से निकला 2,000 साल पुराना इतिहास,मिस्र के डूबे शहर 'थोनिस-हेराक्लिओन' में मिला खजाना*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

"समुद्र की गहराइयों से निकला 2,000 साल पुराना इतिहास,मिस्र के डूबे शहर 'थोनिस-हेराक्लिओन' में मिला खजाना*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई 


(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई)मिस्र में समुद्र में डूबे 2,000 साल पुराने शहर में पुरातत्वविदों को मिला दुर्लभ खज़ाना। मिस्र में भूमध्य सागर में डूबे 2,000 साल पुराने शहर ''थोनिस-हेराक्लिओन'' से पुरातत्वविदों को दुर्लभखज़ाने-ऐतिहासिक अवशेष मिले हैं। फ्रेंच खोजकर्ता फ्रैंक गोडियो के नेतृत्व में हुई खोज में सोने के आभूषण,चांदी के अनुष्ठान की वस्तुएं,दुर्लभ पात्र, ''डजेड पिलर''आदि मिले हैं। उन्हें प्राचीन ''आमून मंदिर''के अवशेष और 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व की लकड़ी की संरचनाएं भी मिलीं। खोजकर्ताओं को यूनानी देवी ऐफ्रोडाइट को समर्पित अज्ञात यूनानी मंदिर भी मिला है। काहिरा मिस्र (Egypt) में भूमध्य सागर कीq गहराइयों में दफन प्राचीन इतिहास ने एक बार फिर दुनिया को हैरान कर दिया है। पुरातत्वविदों को मिस्र के तट के पास समुद्र में डूबे हुए 2,000 साल पुराने ऐतिहासिक शहर। "थोनिस- हेराक्लिओन'' (Thonis-Heracleion) से एक दुर्लभ और बेशकीमती खजाना मिला है। इस खोज ने प्राचीन मिस्र और यूनानी (ग्रीक) सभ्यताओं के आपसी संबंधों और उनके वैभव को एक बार फिर जीवंत कर दिया है। फ्रैंक गोडियो के नेतृत्व में मिली है यह बड़ी कामयाबी। यह ऐतिहासिक खोज प्रसिद्ध फ्रांसीसी पानी के नीचे के पुरातत्वविद् (Underwater Archaeologist) फ्रैंक गोडियो (Franck Goddio)के नेतृत्व में की गई है। उनकी टीम लंबे समय से इस क्षेत्र में शोध और उत्खनन (Excavation) कर रही थी। नई खोजों ने न केवल इस डूबे हुए शहर के धार्मिक महत्व को साबित किया है बल्कि प्राचीन काल के व्यापारिक वैभव को भी उजागर किया है। खोज में क्या-क्या मिला? दुर्लभ अवशेष और खजाना। समुद्र की तलहटी में जमी सदियों पुरानी मिट्टी और मलबे को हटाने के बाद टीम को कई अमूल्य वस्तुएं प्राप्त हुईं। सोने और चांदी के आभूषण मिले हैं इस खोज में।प्राचीन काल के उत्कृष्ट कारीगरी वाले सोने के गहने और आभूषण साथ में धार्मिक और अनुष्ठानिक वस्तुएं जैसे चांदी से बने अनुष्ठान के बर्तन और दुर्लभ पात्र, जिनका उपयोग पवित्र धार्मिक अनुष्ठानों में किया जाता था।"डजेड पिलर' (Djed Pillar) मिस्र की पौराणिक कथाओं में ''डजेड पिलर'' को स्थिरता का प्रतीक माना जाता है और यह भगवान ओसिरिस से जुड़ा है। प्राचीन आमून मंदिर के अवशेष शहर के मुख्य देवता ''अमून'' (Amun) के विशाल मंदिर के ढहे हुए हिस्से और स्तंभ भी मिले हु। 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व की लकड़ी की संरचनाएं भी सामने आई है। पानी के अंदर बेहद सुरक्षित स्थिति में मिलीं लकड़ी की प्राचीन संरचनाएं, जो तत्कालीन वास्तुकला की समझ को दर्शाती हैं। यूनानी देवी ''ऐफ्रोडाइट''का अज्ञात मंदिर भी मिला है। इस खोज की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली बात यह है कि पुरातत्वविदों को यहाँ यूनानी प्रेम की देवी ''ऐफ्रोडाइट'' (Aphrodite)को समर्पित एक अज्ञात मंदिर के अवशेष भी मिले हैं। यह मंदिर इस बात का पुख्ता सबूत है कि"थोनिस-हेराक्लिओन"शहर में मिस्र के लोगों के साथ-साथ बड़ी संख्या में यूनानी (ग्रीक) लोग भी रहते थे और उन्हें अपने देवताओं की पूजा करने की पूरी स्वतंत्रता थी। क्या था थोनिस- हेराक्लिओन शहर का इतिहास? वह देखें तो सदियों पहले "अलेक्जेंड्रिया"  (Alexandria) की स्थापना से पहले "थोनिस- हेराक्लिओन" भूमध्य सागर में मिस्र का सबसे बड़ा और मुख्य बंदरगाह (Port City) हुआ करता था। सभी विदेशी जहाजों को मिस्र में प्रवेश करने के लिए इसी शहर से होकर गुजरना पड़ता था। ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी के अंत में भीषण भूकंप,सुनामी और मिट्टी के धंसने (Soil Liquefaction) जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण यह पूरा शहर समुद्र में समा गया था। साल 2000 में फ्रैंक गोडियो ने ही पहली बार इस शहर को दोबारा खोज निकाला था। 


वैज्ञानिकों और इतिहासकारों का मानना है कि समुद्र के नीचे अभी भी इतिहास का एक बहुत बड़ा हिस्सा छिपा हुआ है। जिसकी खोज होना बाकी है। यहां मिस्र और ग्रीक (यूनानी) सभ्यताओं का अनोखा संगम रहा होगा।" थोनिस-हेराक्लिओन"केवल एक व्यापारिक केंद्र नहीं था बल्कि यह दो महान सभ्यताओं मिस्र और ग्रीस का मिलन स्थल था।"देवी ऐफ्रोडाइट"के मंदिर से मिले कांसे और चीनी मिट्टी के आयातित सामान यह दर्शाते हैं कि"साइस (Saite) राजवंश" के दौरान यहाँ यूनानी व्यापारियों और सैनिकों की भारी मौजूदगी थी। वे यहाँ आकर बस गए थे और मिस्र के राजाओं (Faraohs) के रक्षक के रूप में भी सेवा देते थे। पानी के नीचे कैसे सुरक्षित रहा यह खजाना? वह देखें तो ​कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि 2,000 साल से पानी में रहने के बाद भी लकड़ी और कीमती सामान नष्ट क्यों नहीं हुए? वैज्ञानिकों के अनुसार आपदा के समय जब यह शहर समुद्र में डूबा तो यह तुरंत समुद्री गाद (Marine Sediment) और मिट्टी की कई फीट मोटी परत के नीचे दब गया था। हवा (ऑक्सीजन) न मिलने और इस प्राकृतिक सुरक्षा कवच के कारण सदियों पुरानी लकड़ी, सोने की चमक और चांदी के बर्तन वैसे के वैसे ही सुरक्षित बच गए। नए तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल
की बात पर ध्यान दें तो ​फ्रैंक गोडियो की टीम ''यूरोपियन इंस्टीट्यूट फॉर अंडरवाटर आर्कियोलॉजी''(IEASM) के साथ मिलकर काम कर रही है। इस बार की खुदाई में पारंपरिक तरीकों के बजाय अत्याधुनिक सब-बॉटम प्रोफायलर (Sub-bottom Profilers),सैटेलाइट इमेजरी और मैग्नेटोमीटर जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। इसी तकनीक की मदद से मिट्टी के नीचे कई मीटर गहरे दबे हुए मंदिर के गुप्त कक्षों (Secret Chambers) का पता लगाया जा सका। दौरान मिस्र के राजाओं के राज्याभिषेक से संबंध रखने की बात पर ध्यान दें तो ​ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार इस शहर का धार्मिक महत्व इतना अधिक था कि प्राचीन काल में मिस्र के नए राजाओं (Faraohs) को अपनी सत्ता को वैध शासक के रूप में स्थापित करने के लिए "थोनिस-हेराक्लिओन" के इसी ''अमून मंदिर'' में आकर सर्वोच्च भगवान अमून से आशीर्वाद और दिव्य शक्ति प्राप्त करनी होती थी।( Photos Courtesy Social media)

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