*स्वर्णगिरि:2000 साल बाद फिर से निकलने लगा सोना,एक साल में 400KG का लक्ष्य*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*स्वर्णगिरि:2000 साल बाद फिर से निकलने लगा सोना,एक साल में 400KG का लक्ष्य*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई


(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई) भारत के सोना खनन क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मोड़ आया है। आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में स्थित "जोन्नागिरी (Jonnagiri) गोल्ड माइन"का नाम बदलकर ''स्वर्णगिरि''(Swarnagiri) कर दिया गया है। 24 जून 2026 को मुख्यमंत्री एन.चंद्रबाबू नायडू ने इस परियोजना का उद्घाटन किया। यह आज़ादी के बाद भारत की पहली निजी क्षेत्र की प्राथमिक सोने की खदान है। इस खदान से कितना सोना निकलेगा? वह जाने तो स्वर्णगिरि खदान से वित्त वर्ष 2026-27 में लगभग 400 किलोग्राम सोना निकालने का लक्ष्य है। आंध्र प्रदेश सरकार को इससे 4% रॉयल्टी मिलेगी। जो 400 किलोग्राम उत्पादन पर लगभग ₹57 करोड़ सालाना होगी। 



चरणबद्ध विस्तार योजना के तहत चरण वार्षिक उत्पादन का विवरण देखें तो प्रथम चरण साल 2026-27 में 400 KG वर्तमान उत्पादन । द्वितीय चरण में 900 KG अगले वर्ष से और अंतिम चरण में 2 टन विस्तार पूर्ण होने पर। मुख्यमंत्री नायडू ने महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखते हुए कहा कि 50 मीट्रिक टन सालाना उत्पादन का लक्ष्य है। खदान में लगभग 50 टन सोने के भंडार होने का अनुमान है। जिसमें प्रमाणित संसाधन 13.1 टन हैं। खदान का अस्सल स्थान और आकार व स्थान जाने तो कुरनूल जिले के तुग्गली मंडल में जोन्नागिरी, एर्रागुडी और पगाडिराई गाँव में। इसका क्षेत्रफल देखें तो लगभग 598 हेक्टेयर करीब 1,477 एकड़ है। इसमें निवेश ₹405 करोड़ का है। परिचालन अवधि के बारे में जाने तो 15 वर्ष से अधिक का अनुमान है। जल आपूर्ति हैंड्री नीवा सुजला स्रवंति योजना से 0.021 TMC पानी। इसकी सोने की क्वालिटी देखें तो खदान से निकलने वाले अयस्क में सोने की ग्रेड 12-14 ग्राम प्रति टन है। चिगुरुगुंटा-बिसनाथम ब्लॉक में औसत गोल्ड ग्रेड 5.64 ग्राम प्रति टन है। प्रयोगात्मक खनन ने अयस्क की उच्च गुणवत्ता की पुष्टि की है।



 खदानों से मिलने वाले अन्य खनिज पदार्थ के बारे में जाने तो सोने के साथ खदान में तांबा (Copper),चांदी (Silver), सीसा (Lead) और पाइराइट जैसे अन्य खनिज भी मिल रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार चांदी की ग्रेड 1.1 से 11.7 ppm तक है। इस खदान से रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। इस परियोजना से लगभग 700 लोगों को रोजगार मिलेगा। जिनमें से 80% स्थानीय युवा होंगे। इस क्षेत्र का ऐतिहासिक महत्व जाने तो यह क्षेत्र 2000 साल पहले मौर्य साम्राज्य के दौरान विशेषकर सम्राट अशोक के शासनकाल में सोना उत्पादन का केंद्र था। आसपास मिले प्राचीन शिलालेख इस क्षेत्र की ऐतिहासिक खनन गतिविधियों की पुष्टि करते हैं। इसके लिए अतिरिक्त जानकारी देखें तो खदान का विकास "जियोमैसोर सर्विसेज इंडिया"कर रहा है। जिसमें "डेक्कन गोल्ड माइंस"की हिस्सेदारी है। मई 2026 में ट्रायल प्रोडक्शन शुरू हुआ। 



सरकार स्वर्णगिरि के पास"ज्वैलरी मैन्युफैक्चरिंग पार्क"स्थापित करेगी। आंध्र प्रदेश में रामगिरी,जव्वाकुला और चिगुरुकुंटा जैसे अन्य संभावित क्षेत्रों की खोज जारी है । भारत सालाना 721 टन सोना आयात करता है। स्वर्णगिरि खदान घरेलू उत्पादन बढ़ाकर आयात निर्भरता कम करने में मददगार साबित होगी। (Photos Courtesy Social media)

~ब्यूरो रिपोर्ट स्पर्श देसाई √•Metro City Post• Digital World•#SwarnagiriGoldMine #JonnagiriGold #AndhraPradeshGold #IndiaGoldMining #GoldProductionIndia #Swarnagiri #GoldMiningIndia #AndhraPradeshMining #GoldReserveIndia #MakeInIndiaGold

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