*अमेरिकी रक्षा विभाग ने खोले राज:1968 में लद्दाख और सिक्किम में दिखे थे UFO, नेपाल में मिली धातु की डिस्क*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*अमेरिकी रक्षा विभाग ने खोले राज:1968 में लद्दाख और सिक्किम में दिखे थे UFO, नेपाल में मिली धातु की डिस्क*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई)अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन का बड़ा दावा किया है कि भारत के लद्दाख और सिक्किम में दिखे थे UFO। इसके लिए 72 फाइलें की जारी की गई है कि UFO sightings India । पेंटागन द्वारा जारी 72 यूएफओ फाइलों में लद्दाख, सिक्किम,नेपाल और अमेरिका में देखी गई रहस्यमयी उड़ती वस्तुओं का खुलासा किया गया है। CIA, FBI और NASA के दस्तावेजों में कई घटनाओं का जिक्र मिलता है।यूएफओ (UFO) का पूरा नाम 'अनआइडेंटिफाइड फ्लाइंग ऑब्जेक्ट' (Unidentified Flying Object) है । इसे हिंदी में 'अज्ञात उड़ने वाली वस्तु' कहा जाता है। यह आकाश में दिखने वाली किसी भी ऐसी वस्तु या घटना को कहते हैं, जिसे देखने वाला व्यक्ति, रडार, या विशेषज्ञ किसी ज्ञात विमान, मिसाइल या प्राकृतिक घटना के रूप में पहचान नहीं पाता। ऐसा विकीपीडिया कहता है।
पेंटागन ने 1968 में लद्दाख और सिक्किम में देखी गई रहस्यमय उड़ती वस्तुओं (UFO) की जानकारी सार्वजनिक कर दी है। इन घटनाओं का जिक्र सीआईए, एफबीआई और नासा के दस्तावेजों में है। जिनमें तेज रोशनी, जोरदार धमाके और आसमान में अजीबोगरीब हरकतों का ब्योरा मिलता है। फाइलों में नेपाल में 1968 की एक और चौंकाने वाली घटना का भी जिक्र है। जहां एक धात्विक डिस्क के मिलने का दावा किया गया है। इन खुलासों के बावजूद अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इन घटनाओं को एलियंस से जोड़ने का कोई ठोस सबूत नहीं है। नासा की रिपोर्टों के मुताबिक ज्यादातर यूएफओ देखे जाने के दावे प्राकृतिक घटनाओं,मौसम के गुब्बारों या सैन्य विमानों जैसे सामान्य कारणों से होते हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने यूएफओ (अज्ञात उड़ान वस्तुओं) और एलियंस से जुड़ी 72 गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक कर दिया है। इन दस्तावेजों में सीआईए,एफबीआई और नासा की रिपोर्ट शामिल हैं। जिनमें भारत के लद्दाख और सिक्किम क्षेत्रों में साल 1968 में देखी गई रहस्यमयी घटनाओं का विस्तृत जिक्र है।
यह जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के आदेश पर सार्वजनिक की गई है। साल 1968 में सिक्किम में क्या हुआ था?वो जाने तो दस्तावेजों के मुताबिक सबसे पहली घटना 19 फरवरी 1968 को उत्तरी सिक्किम के इलाकों में हुई थी। लाचुंग,लाचेन, ट्रांगू,मुगुथांग और छोल्हामू में स्थानीय लोगों ने एक रहस्यमय वस्तु को उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम दिशा में तेजी से उड़ते देखा। गवाहों के मुताबिक इस वस्तु के पीछे से इतनी तेज रोशनी निकल रही थी कि पूरा इलाका उजाला हो गया। देखते ही देखते आसमान में गड़गड़ाहट जैसी तेज आवाज भी गूंजी थी। दौरान लद्दाख के आसमान में चमके रहस्यमयी नूर की कहानी जाने तो लद्दाख के आसमान में मार्च 1968 में कई बार अजीब नजारे देखे गए। 4 मार्च को चांग ला,फुकचे और कोयुल क्षेत्रों के लोगों ने एक सफेद रोशनी को पूर्व से पश्चिम की ओर बढ़ते देखा। रिपोर्ट के अनुसार इससे पहले दो जोरदार धमाके सुनाई दिए फिर अचानक लाल रोशनी छिटकी और सफेद धुएं का गुबार उठा। इसी दिन पास के आने ला इलाके में भी कुछ ऐसा ही हुआ। जहां एक वस्तु गोल-गोल चक्कर लगा रही थी और उसके पीछे धुएं का निशान बन रहा था। 25 मार्च को फिर से फुकचे,कोयुल और डेमचोक में लोगों ने एक रॉकेट जैसी वस्तु को आसमान में उड़ते हुए देखा था। उसने अपने पीछे करीब 200 गज लंबा पीला-सफेद निशान छोड़ा था और वह करीब 20,000 से 25,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ रही थी।
नेपाल में देखी गई चमकती वस्तु और मिली थी धातु की डिस्क। इन फाइलों में पड़ोसी देश नेपाल की एक घटना भी दर्ज है। जो और भी हैरान करने वाली है। 27 मार्च 1968 को नेपाल के कास्की जिले (पोखरा के पास) के लोगों ने आसमान में एक बेहद तेज रोशनी वाली वस्तु को उत्तर से दक्षिण दिशा की ओर जाते देखा। यह वस्तु रुक-रुक कर चमक रही थी और इससे बहुत तेज आवाज भी आ रही थी। इस घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि फाइलों में दावा किया गया है कि इसके बाद पोखरा से पांच मील उत्तर-पूर्व में बाल्टीचौर के पास एक गड्ढे में धातु की बनी एक डिस्क के आकार की वस्तु मिली थी। इसका आधार करीब छह फीट चौड़ा बताया गया है और यह लगभग चार फीट ऊंची थी। क्या होते हैं UFO और UAP?वो समझे तो अक्सर लोग यूएफओ देखने के दावे करते हैं लेकिन वैज्ञानिक इसे लेकर बहुत सतर्क हैं। नासा और पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रालय) की आधिकारिक रिपोर्टों में साफ कहा गया है कि आसमान में दिखने वाली ये अज्ञात वस्तुएं (UFO) अक्सर सेना के विमान, ड्रोन, मौसम के गुब्बारे या प्राकृतिक घटनाएं होती हैं। अब सरकारी दस्तावेजों में इन्हें ''यूएपी'' (Unidentified Anomalous Phenomena यानि असामान्य घटनाएं) कहा जाता है। नासा का कहना है कि इनमें से ज्यादातर मामलों की जांच के बाद उनका कोई न कोई सामान्य कारण निकल ही आता है।
नासा के मुताबिक यूएफओ देखने का सच जानें तो नासा के विशेषज्ञों ने कहा है कि आमतौर पर यूएफओ को लेकर दावा किया जाता है कि वे बहुत तेज हैं हालांकि ऐसे ज्यादातर दावे भ्रम या ऑप्टिकल इल्यूजन (आंखों के धोखे) के होते हैं। उदाहरण के लिए मशहूर ''गो फास्ट'' वीडियो में दिख रहा ''बेहद तेज'' यूएफओ दरअसल हवा के साथ बहता एक सामान्य गुब्बारा था। इन दावों पर रिसर्च कर रही सरकारी एजेंसी AARO (All-domain Anomaly Resolution Office) के अनुसार आधिकारिक रिपोर्टों में से करीब 40 फीसदी मामले ऐसे हैं जिनका कोई ठोस जवाब अभी तक नहीं मिल पाया है। पेंटागन और अमेरिकी एजेंसियों का रुख जाने तो पेंटागन ने साफ तौर पर कहा है कि इन तमाम दस्तावेजों के बावजूद एलियंस या परग्रही जीवन के होने का कोई सबूत नहीं मिला है। इन फाइलों का मकसद सिर्फ पारदर्शिता बढ़ाना है। न कि किसी सनसनीखेज नतीजे पर पहुंचना। जहां तक यूएफओ के मूल स्थान और गायब होने का सवाल है तो विज्ञान के पास इसका कोई जवाब नहीं है। अभी तक पृथ्वी के वायुमंडल में ऐसी किसी भी वस्तु की मौजूदगी का प्रमाण नहीं मिला है । जो मानव निर्मित या प्राकृतिक न हो। (Photos Courtesy Social media)
~ब्यूरो रिपोर्ट स्पर्श देसाई √•Metro City Post•Digital World• #UFO #PentagonFiles #LadakhUFO #SikkimUFO #AlienMystery #NASAResearch #UAP #UFOSecrets #HindiNews #HindiHashtags





Comments