*कभी सोने-चाँदी से भी कीमती था एल्युमिनियम, सन 1886 में आया ऐसा आविष्कार जिसने बदल दिया इसकी तकदीर*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*कभी सोने-चाँदी से भी कीमती था एल्युमिनियम, सन 1886 में आया ऐसा आविष्कार जिसने बदल दिया इसकी तकदीर*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई 

(मुंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई)जब एल्युमिनियम था शाही ठाठ-बाट की निशानी। आज हम जिस एल्युमिनियम को रसोई के बर्तन, कोल्ड ड्रिंक के कैन और खाना पैक करने के फॉइल के रूप में रोजमर्रा में इस्तेमाल करते हैं, वह करीब 150 साल पहले सोने-चाँदी से भी अधिक कीमती हुआ करता था। यह सुनकर हैरानी हो सकती है, लेकिन यह सच है। दरअसल 19वीं सदी के मध्य तक शुद्ध एल्युमिनियम निकालना बेहद मुश्किल था। पृथ्वी की सतह पर यह सबसे अधिक मात्रा में पाया जाने वाली धातु है फिर भी यह प्रकृति में कभी शुद्ध रूप में नहीं मिलती। यह ऑक्सीजन से तेजी से जुड़कर एल्युमिना (Al₂O₃) बना लेती है। जिसे तोड़ना अत्यंत कठिन होता है। इसी कारण इसे निकालने के लिए भारी मात्रा में ऊर्जा और जटिल प्रक्रियाओं की जरूरत पड़ती थी। 

नेपोलियन की दावतें और एल्युमिनियम का दबदबा था। फ्रांस के सम्राट नेपोलियन तृतीय अपने विशिष्ट मेहमानों को एल्युमिनियम के बर्तनों में खाना परोसते थे। जबकि कम खास मेहमानों को सोने और चाँदी के बर्तन मिलते थे। पेरिस की अमीर महिलाएं एल्युमिनियम के गहने पहनती थीं। 1855 के पेरिस एक्सपोज़िशन में फ्रांसीसी सरकार ने एल्युमिनियम की सिल्लियों को शाही ताज के जेवरात के साथ प्रदर्शित किया।


 यहाँ तक कि सन 1884 में वाशिंगटन मोन्यूमेंट के शिखर पर छह पाउंड का एल्युमिनियम पिरामिड लगाया गया था। जो उस समय इस धातु की कीमत और प्रतिष्ठा का प्रतीक था। इसकी कीमत सन 1855 में लगभग 550 डॉलर प्रति पाउंड थी। जबकि उस समय सोना भी इससे सस्ता था। सन 1886 वह साल था जिसने बदल दिया सब कुछ। 


साल 1886 आया और दुनिया ने एक ऐसी खोज देखी जिसने एल्युमिनियम की तकदीर हमेशा के लिए बदल दी। अमेरिका के चार्ल्स मार्टिन हॉल (Charles Martin Hall) और फ्रांस के पॉल हेरॉल्ट (Paul Héroult) ने एक-दूसरे से अनजान लगभग एक ही समय पर एल्युमिनियम निकालने की एक नई विद्युत-रासायनिक प्रक्रिया खोजी थी। इस प्रक्रिया में एल्युमिना को पिघले हुए क्रायोलाइट (cryolite) में घोलकर उसमें विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है। इससे एल्युमिनियम ऑक्साइड से ऑक्सीजन अलग हो जाती है और शुद्ध एल्युमिनियम प्राप्त होता है। आज भी दुनिया भर में एल्युमिनियम बनाने के लिए यही हॉल-हेरॉल्ट प्रक्रिया (Hall–Héroult process) इस्तेमाल की जाती है। इसके बाद एल्यूमीनियम की कीमत 200 गुनी कम हो गई थी। 

वह भी सिर्फ 10 साल में! इस खोज से पहले सन 1880 के दशक की शुरुआत में एल्युमिनियम की कीमत घटकर 4 डॉलर प्रति पाउंड आ गई थी। हॉल-हेरॉल्ट प्रक्रिया ने इसे 2 डॉलर और फिर 30 सेंट प्रति पाउंड कर दिया। सन 1900 तक यह कीमत मात्र 23 सेंट प्रति पाउंड रह गई थी यानी महज 10-15 सालों में एल्युमिनियम की कीमत करीब 200 गुना कम हो गई थी। वही एल्युमिनियम जो कभी नेपोलियन के खास मेहमानों की शान हुआ करता था। अब पेरिस की गलियों में भिखारियों के हाथों में भीख माँगने का कटोरा बन गया था। यह उस धातु की कहानी है। जो शाही ठाठ-बाट से उठकर आम आदमी की रोजमर्रा की जरूरत बन गई थी।  


अब देखें कि इस धातु एल्यूमीनियम के लिए विकिपीडिया क्या कहता है? वह देखें तो विकिपीडिया के अनुसार एल्युमिनियम धातु प्राकृतिक रूप में अत्यंत दुर्लभ है और इसे अयस्कों से शुद्ध करने की प्रक्रिया जटिल है हालाँकि एल्युम (फिटकरी) का उपयोग ईसा पूर्व 5वीं शताब्दी से होता आ रहा है। सन 1825 में डेनिश भौतिकशास्त्री स्वान क्रिश्चियन Ørsted ने इस धातु की खोज की घोषणा की थी। खोज के तुरंत बाद एल्युमिनियम की कीमत सोने से भी अधिक हो गई थु। सन 1856 में फ्रांसीसी रसायनशास्त्री हेनरी एटियेन सैंट-क्लेयर डेविल ने पहली औद्योगिक उत्पादन शुरू किया था। सन 1886 में हॉल और हेरॉल्ट द्वारा स्वतंत्र रूप से विकसित हॉल-हेरॉल्ट प्रक्रिया और सन 1889 में बायर प्रक्रियाने एल्युमिनियम को जनता के लिए उपलब्ध कराया था। विश्व उत्पादन सन 1900 में 6,800 मीट्रिक टन से बढ़कर 1954 में 2,810,000 मीट्रिक टन हो गया था । जब एल्युमिनियम तांबे को पीछे छोड़कर सबसे अधिक उत्पादित अलौह धातु बन गया था। फ्रांस की महारानी (Empress) और ब्रिटेन की रानी (Queen) ने भी एल्युमीनियम के गहने पहने थे। 

19वीं सदी के मध्य में यह धातु सोने से भी अधिक कीमती थी इसलिए यह शाही ठाट-बाट का प्रतीक था। रानी विक्टोरिया (ब्रिटेन) ने सन 1851 के क्रिस्टल पैलेस प्रदर्शनी में एल्युमीनियम के गहने पहने थे। महारानी यूजनी (फ्रांस) नेपोलियन तृतीय की पत्नी,एल्युमीनियम के गहने पहनने वाली शुरुआती हस्तियों में शामिल थीं। इनके अलावा फ्रांसीसी कुलीन वर्ग में भी एल्युमीनियम के गहने पहनना प्रतिष्ठा का प्रतीक था। तब सोने की कीमत सन 1852 के आसपास के वक़्त सोना लगभग $20.67 प्रति औंस था और एल्युमीनियम लगभग $37 प्रति औंस था। तुलना के लिए सन 1852 में एल्युमीनियम की कीमत $550 प्रति पाउंड थी। जो सोने से लगभग दोगुनी थी। सन 1886 की हॉल-हेरॉल्ट प्रक्रिया के बाद इसकी कीमत गिरकर सन 1900 तक मात्र 20 सेंट प्रति पाउंड रह गई थी। (Photos Courtesy Social media and AI)


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