*100 दिनों की जंग और $347 अरब का नुकसान, फिर भी क्यों नहीं ढही ईरान की अर्थव्यवस्था? जानिए पूरा गणित*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*100 दिनों की जंग और $347 अरब का नुकसान, फिर भी क्यों नहीं ढही ईरान की अर्थव्यवस्था? जानिए पूरा गणित*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई 

(मुंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई) US-इज़रायल से 100 दिनों के युद्ध के बावजूद क्यों नहीं ढही ईरान की अर्थव्यवस्था?वो समझे तो अमेरिका-इज़रायल संग 100-दिनों के युद्ध में $347-बिलियन का नुकसान झेलने के बावजूद ईरान की अर्थव्यवस्था बनी रही। "होर्मुज़ स्ट्रेट"बंद होने से पहले ईरान ने बड़े पैमाने पर तेल बेचकर अच्छी कमाई की थी। बकौल रिपोर्ट्स उसने कुछ तेल गुप्त तरीकों से भी निर्यात किया गया। वहीं देश के उत्तरी बंदरगाहों के ज़रिए व्यापार और सामान की आवाजाही लगातार जारी रही। इस साल 2026 में ईरान की जीडीपी 6.1% घट सकती है। UN ने ऐसी खबर दी।

 दौरान ईरान जंग का दुनियाभर की ग्रोथ पर बुरा असर हुआ । वर्ल्ड बैंक ने घटाया अनुमान। विश्व बैंक ने चेतावनी दी है कि ईरान युद्ध के कारण बढ़ती ऊर्जा कीमतें और वैश्विक अनिश्चितता दुनिया की आर्थिक वृद्धि पर असर डालेगी। विश्व बैंक ने ''वैश्विक आर्थिक संभावनाएं'' की रिपोर्ट में कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 2026 में घटकर 2.5% रह सकती है। भारत के लिए बैंक ने जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.6% लगाया है। बैंक ने उम्मीद जताई कि FY28 में अर्थव्यवस्था फिर से 7.2% की वृद्धि दर हासिल कर लेगी। हमारे अंतरराष्ट्रीय डेस्क पर बड़ी खबर आई है। अमेरिका और इज़रायल के साथ जारी 100 दिनों के भीषण युद्ध ने मध्य पूर्व सहित पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। इस जंग में ईरान को अब तक करीब $347 बिलियन (अरब) का भारी-भरकम आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। इसके बावजूद पश्चिमी देशों के तमाम अनुमानों को धता बताते हुए ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह जमींदोज नहीं हुई है।


आखिर प्रतिबंधों और बमबारी के बीच ईरान खुद को कैसे संभाले हुए है और इस युद्ध का भारत सहित वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ रहा है? तो आइए विस्तार से समझते हैं। ईरान की अर्थव्यवस्था टिके रहने के 3 बड़े कारण देखें तो युद्ध के मैदान में चौतरफा घिरे होने के बाद भी ईरान की आर्थिक रीढ़ की हड्डी नहीं टूटने के पीछे मुख्य रूप से तीन रणनीतिक कारण सामने आए हैं । जंग से पहले तेल की बंपर कमाई हुई की मान्यता है। सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ''होर्मुज़ स्ट्रेट'' (Strait of Hormuz) के ब्लॉक होने से ठीक पहले ईरान ने बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का निर्यात किया था। इस बंपर बिक्री से ईरान को भारी मात्रा में नकद राजस्व मिला। जो इस संकट काल में उसके काम आ रहा है। गुप्त रास्तों से तेल का निर्यात होते रहने की खबरें आती रही।अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स की मानें तो ईरान पर लगे कड़े प्रतिबंधों के बावजूद वह गुप्त तरीकों और ''डार्क फ्लीट'' यानि बिना ट्रैकिंग वाले जहाजों के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार तेल की सप्लाई कर रहा है। जिससे उसकी कमाई का जरिया पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। 


उत्तरी बंदरगाहों से सुरक्षित व्यापार के मद्देनजर जहां एक तरफ खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) युद्ध की वजह से पूरी तरह अशांत है। वहीं ईरान के उत्तरी बंदरगाहों (Northern Ports) के जरिए व्यापार और जरूरी सामानों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के लगातार जारी रहा। इसने ईरान की घरेलू सप्लाई चेन को टूटने नहीं दिया। इस साल 2026 में ईरान की GDP को लगेगा बड़ा झटका। ऐसा UN का अनुमान है। भले ही ईरान की अर्थव्यवस्था ढही नहीं है लेकिन युद्ध की मार उस पर साफ दिखने लगी है। संयुक्त राष्ट्र (UN) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक इस साल 2026 में ईरान की जीडीपी (GDP) में 6.1% की भारी गिरावट आ सकती है। लगातार जारी युद्ध और बुनियादी ढांचे को पहुंचे नुकसान के कारण आने वाले महीनों में ईरान की आर्थिक चुनौतियां और बढ़ने वाली हैं। दौरान वर्ल्ड बैंक की चेतावनी देखें तो वैश्विक विकास दर घटकर 2.5% रहने का अनुमान है। इस क्षेत्रीय युद्ध की तपिश से पूरी दुनिया झुलस रही है। 


विश्व बैंक (World Bank) ने अपनी ''वैश्विक आर्थिक संभावनाएं'' (Global Economic Prospects) रिपोर्ट में गंभीर चेतावनी जारी की है। ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा यानि कि क्रूड ऑयल और गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं। वैश्विक अनिश्चितता के इस माहौल का दुनिया की आर्थिक वृद्धि पर बेहद बुरा असर पड़ेगा। विश्व बैंक के मुताबिक इस संकट के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था की विकास दर साल 2026 में घटकर महज 2.5% रह सकती है। 


भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर? वह देखें तो वैश्विक मंदी के इस खतरे के बीच भारत की रफ्तार थोड़ी धीमी जरूर होगी लेकिन स्थिति नियंत्रण में रहेगी। विश्व बैंक ने भारत के लिए जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान संशोधित कर 6.6% किया है हालांकि बैंक ने राहत भरी उम्मीद भी जताई है कि वित्तीय वर्ष 2028 (FY28) तक भारतीय अर्थव्यवस्था एक बार फिर बाउंस बैक करेगी और 7.2% की मजबूत विकास दर हासिल कर लेगी। (Photos Courtesy Social media)

~ब्यूरो रिपोर्ट स्पर्श देसाई √•Metro City Post• Digital World• #IranEconomy #IranIsraelWar #GlobalEconomy #WorldBankReport #Geopolitics2026 #OilCrisis #IndiaGDP #EconomicCrisis #GlobalGrowth #BusinessNews

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